breaking news New

चंद पैसे की लालच और लापरवाही ने छीन लिया दूध मुहें बच्चे से बाप का साया

चंद पैसे की लालच और लापरवाही ने छीन लिया दूध मुहें बच्चे  से बाप का साया

सुरजपुर- जिले में धड़ल्ले से चल रहे अवैध पत्थर से गिट्टी क्रेशर, अवैध पत्थल खुदाई करते एक ग्रामीण की हुई मौत

सुरजपुर। चंद पैसे की लालच पत्थल क्रेशर संचालकों व खनिज विभाग की लापरवाही से पत्थल की खुदाई करने गए एक ग्रामीण के ऊपर पत्थल गिरने से मौत हो गई। मृतक सुरजपुर मुख्यालय से 10- 15 किलोमीटर दूर ग्राम कोर्ट के उरांव पारा निवासी कलिंदर तिर्की उम्र लगभग 30 वर्ष आत्मज सोना लाल मृतक के 2 बच्चे है। एक बड़ा लड़का  है जो कि 3 वर्ष का है। दूसरा 3-4 माह का शिशु है। मृतक के घर की माली हालत खराब होने के कारण पत्थल खन्न करके क्रेशर संचालकों को बेचने का कार्य करते है। जिससे मिलने रुपये से घर का खर्च चलता था। किन्तु अब घर मे कमाने वाले मुखिया घर मे नही होगा, घर मे चूल्हा नही जलेगा, दो बच्चे अपने पापा के गोद मे नही खेल पाएंगें। मृतक घर का मुखिया था। 


लॉक डाऊन ने काम धाम छीन लिया था। घर की माली हालत ठीक नही होने के कारण घर मे पालन पोषण नही हो पा रहा था। घर का खर्च चलाने के लिए मृतक कलिंदर तिर्की अपने साथियों के साथ पत्थल की खुदाई करने समीप के ग्राम देवीपुर चला गया। जहां पत्थल की खुदाई करके पत्थल क्रेशरसंचालकों को बेचने का कार्य करते थे। एक ट्रैक्टर पत्थल के बदले क्रेशर संचालक ट्रेक्टर मालिक के माध्यम से एक हजार रुपये मिलता था। प्रतिदिन के माफीक आज भी मृतक घर से काम के लिए निकला था कि तभी पत्थल खन्न करते ऊपर से पत्थल गिरा और मौके पर ही मौत हो गई। साथियों ने सुरजपुर अस्पताल में लाया, जहां से परिजनों को सूचना दी गई। 

जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, पीएम के उपरांत शव को घर भेज दिया गया है। घर मे मातम पसरा हुआ है। महिलाओं का रो - रो कर बुरा हाल है। 

पिछले वर्ष ग्राम तेलसरा के बंचरपारा में निवासरत ग्रामीण अपने एक मासूम बेटे के साथ पत्थल की अवैध खुदाई करते मिट्टी के धंसने के कारण बाप, समेत मासूम बेटे की मौत हो गई थी। ऐसे ही ना जाने कितने ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। 


जिले में बड़ी मात्रा में गौण खनिज का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जाता है। जिले में संचालित गिट्टी व्यवसाय में 90% पत्थरो की आपूर्ति अवैध पत्थर खदानों से ही होती है, गांव-गांव में पत्थर की अवैध खदान खतरों के बीच संचालित हो रही है, राजस्व और वन आमला सदैव इन अवैध खदानों की अनदेखी करती रही है, जिसका परिणाम अक्सर ऐसे हादसों के रूप में देखने को मिलता है। जिले में छुई खदान, मुरूम खदान, कोयला खदान, और गिट्टी की खदानों में अक्सर ऐसे हादसे देखने और सुनने को मिलते हैं, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर इन्हें रोकने कोई सार्थक पहल नहीं की जाती है।