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राइस मिलरों को कस्टम मिलिंग की राशि का पिछला भुगतान अब तक नहीं

राइस मिलरों को कस्टम मिलिंग की राशि का पिछला भुगतान अब तक नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में  राइस मिलरों को कस्टम मिलिंग की राशि का अब तक भुगतान नहीं किया गया है। अकेले दुर्ग जिले के राइस मिलरों को 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना बाकी है।  मिलरों का आरोप है कि सरकार द्वारा सत्यापन के नाम पर आए दिन कुछ न कुछ नया दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है। 

 दुर्ग जिले में राइस मिलरों ने धान की मिलिंग कर करीब 82 लाख क्विंटल चावल नागरिक आपूर्ति निगम (नान) और एफसीआई में जमा कराया है। इसके एवज में उन्हें 50 करोड़ रुपये का भुगतान मार्कफेड द्वारा किया जाना है।

राइस मिलरों का कहना है कि सरकार द्वारा मिलिंग के भुगतान को लेकर आए दिन नए दिशा निर्देश जारी कर अंड़गा पैदा किया जा रहा है। इन दिनों सीए का सर्टिफिकेट मंगाया जा रहा है। इसके पहले ट्रांसपोर्टिंग बिल मंगाया जा रहा था। मिलरों का कहना है कि राइस मिलरों द्वारा धान परिवहन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले समस्त वाहनों में जीपीएस लगा हुआ था।

शिकायत पर अफसर तकनीकी खामी का हवाला देते हुए इसमें सुधार करने की बात कह रहे हैं। इसमें तकनीकी खामियों में सुधार नहीं होगा, तब तक भुगतान को लेकर दिक्कत बनी रहेगी।खरादे गए धान का सरकार द्वारा कस्टम मिलिंग कराई जाती है। मिलरों द्वारा धान उठाव करने पर सरकार को दो फायदे होते हैं। पहला खरीद केंद्रों से धान का उठाव समय-समय पर होते रहने से केंद्रों में धान जाम नहीं होता और दूसरा धान की मिलिंग का काम भी समय पर पूरा हो जाता है।

 दुर्ग जिले में सौ से अधिक राइस मिलर हैं। जिले के मिलर दुर्ग के अलावा बेमेतरा जिले के धान का भी कस्टम मिलिंग करते हैं। हालाकि दुर्ग जिले में अभी भी करीब पांच लाख क्विंटल धान की कस्टम मिलिंग नहीं हो पाई है।

दुर्ग राइस मिल एसोसिएशन के महासचिव विनीत जैन ने कहा कि सरकार द्वारा भुगतान से पहले सत्यापन के नाम पर आए दिन कुछ न कुछ दस्तावेज मंगाया जा रहा है। सरकार को जो भी दस्तावेज चाहिए था वह एक बार में निर्देश जारी कर जमा करवा लेना था। इससे पहले भुगतान में इतनी देरी कभी नहीं हुई। दुर्ग ही नहीं प्रदेश में भी भुगतान को लेकर इसी तरह की स्थिति बनी हुई है।

 छग राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश रुंगटा ने बताया कि धान का कस्टम मिलिंग करने वाले राइस मिलरों से सत्यापन के नाम पर इस बार कुछ नई जानकारी मंगाई जा रही है। इसका दस्तावेज तैयार करने में मिलरों में समय लग रहा है। इस वजह से भुगतान धीरे-धीरे हो रहा है।