II पाठशाला खुलवा दो महाराज, मोर जिया पढ़ने को चाहे : प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ई.एजुकेशन सिस्टम की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं

II पाठशाला खुलवा दो महाराज, मोर जिया पढ़ने को चाहे : प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ई.एजुकेशन सिस्टम की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं
  • सुभाष मिश्र


पाठशाला खुलवा दो महाराज, मोर जिया पढऩे को चाहे
कोई राह दिखा दो महाराज, मोर जिया बढ़ने को चाहे


सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की यह कविता उस समय लिखी गई थी जब गांव-गांव में स्कूल नहीं थे, साक्षरता कम थी। अज्ञानता, अक्षर ज्ञान, जागरूकता की कमी थी, जिसके कारण शोषक वर्ग गरीबों का हक मार रहे थे, शोषण कर रहे थे। आज गांव-गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी यहां तक कि अंग्रेजी माध्यम के प्रायवेट स्कूल भी हैं। ग्रामीण हो या शहरी नागरिक, सब पढ़ऩे-लिखने के महत्व को स्वीकारने लगे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण स्कूल, कालेज बंद हैं। पढ़ाई बंद न हो, इसके लिए घर बैठे-बैठे ई-क्लास, ई-लाइब्रेरी, आडियो, वीडियो के जरिये पढ़ाई के वैकल्पिक माध्यम तलाशे जा रहे हैं। लोगों के पढ़ऩे और देखने के तरीके बदल रहे हैं।

अब अधिकांश लोग जिनके पास एनराइड फोन, टैप, लैपटाप, कम्प्यूटर, टीवी है, वे सब अब पीडीएफ फार्म में पत्र-पत्रिका, पुस्तकें पढ़ रहे हैं। सिनेमा में जाने की बजाय घर में बैठकर डिजीटल फार्मेट में फिल्म और अन्य प्रोग्राम देख रहे हैं। कोरोना कालखंड में परंपरागत तरीको से हटकर वैकल्पिक तौर-तरीके खोजे जा रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके। स्कूल-कालेज, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का नुकसान ना हो, इसके लिये ई-क्लास, स्मार्ट क्लास, गूगल क्लास, स्कूल आन एप, जूम क्लास, आडियो-वीडियो क्लास प्रारंभ की गई है। हमारे छत्तीसगढ़ में सरकारी, स्कूल में पढ़ऩे वाले छात्र-छात्राओं के लिये 'पढ़ई तुहर दुआर' कार्यक्रम के जरिये 7 अप्रैल से ई.क्लास प्रारंभ की गई है। इसी तरह उत्तरप्रदेश और अन्य प्रदेशों में मोबाईल क्लास प्रारंभ हुई है। बड़े अंग्रेजी माध्यम के प्रायवेट स्कूलों में बहुत पहले से ई क्लास चल रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उन लोगों के लिये, जो पढ़ाई करना चाहते हैं, आनलाईन कोर्सेज शुरू किये हैं। इसी तरह ऑल इंडिया काउन्सिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन एआईसीटीई ने अपनी वेबसाईट https://neat.aicte-india.org/course प्रारंभ किया है।

अब जब स्कूल बंद हो गये हैं और उन्हें 'पढ़ई तुंहर दुआर' के अंतर्गत क्लास से पढ़ाने की कोशिश जारी है, तब यह समझना होगा कि क्या ये बच्चे और टीचर सरकार और समय की मंशा के अनुरुप ई-पेपर, ई-गवर्नेंस, ई-बिजनेस की तरह ही ई.क्लास के महत्व को समझकर बहुत सारे जोक, गाने और गेम से भरी वाट्सअप यूनिवर्सिटी से निकलकर अपने पाठ्यक्रम की पढ़ाई में रूचि दिखा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट www.cgschook.in पर जाकर देखने से मालूम होता है कि छत्तीसगढ़ में प्रारंभ पढई तुंहर दुआर पोर्टल के जरिये इस समय 587545 विद्यार्थियों तथा 121722 शिक्षकों को पंजीकृत करके आनलाईन पढ़ाई प्रारंभ की गई है।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, ई बुक्स और ई.लर्निंग को अपने स्वयं के व्यय पर 'किलोल' पत्रिका संचालित कर रहे हैं। डॉ. आलोक शुक्ला ने बताया कि इस आनलाईन एजुकेशन को हम एक भौतिक क्लास में बदलने जा रहे हैं। इसमें संबंधित क्लास के विद्यार्थियों और शिक्षकों को छोटे-छोटे वाट्सअप, फेसबुक ग्रुप होगा, जो होमवर्क देगाद, उस किये गये होमवर्क के फोटो अपलोड करवाकर उसे चेक करके वापस विद्यार्थी को देगा, ताकि इसे पता चल सके कि उसने कहां गलती की है। आनलाईन एजुकेशन मटेरियल वीडियो, आडियो फार्म में 25 से 30 एमबी का आडियो-वीडियो ताकि मोबाइल हेंग न हो। विशेषज्ञ शिक्षकों की देखरेख में तैयार करके अनुमोदित उपरांत वेबसाईट पर अपलोड किया जाता है। अभी तक 1979 वीडियो, 1465 फोटो, 452 कोर्स मटेरियल 64 आडियो अपलोड किये जा चुके हैं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।

उनका मानना है कि कोई भी व्यवस्था 100 प्रतिशत सही नही होती। दूसरे अंचलों में कनेक्टिविटी और स्मार्ट फोन आदि की समस्या हो सकती है, बावजूद इसके यदि 5 लाख 80 हजार विद्यार्थी वेबसाइट देख रहे हैं तो यह बड़ी उपलब्धि है। जून से 100 क्लासेस संचालित होगी। अभी तक 60 लाख 68 हजार हिट मिल चुकी है। यह कोई कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। अभी तक टीचर, स्टूडेंट के 25-30 टेलीग्राम ग्रुप बन गये हैं और यह सिलसिला जारी है। ये कहना गलत होगा कि शिक्षक इसमें रूचि नहीं ले रहे हैं क्योंकि नये-नये शिक्षक रोज अपनी ओर से शैक्षणिक सामग्री बनाकर अपलोड कर छात्रों को उपलब्ध करा रहे हैं।