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इस वर्ष नई मूर्तियों का निर्माण नहीं होगा बड़ी मूर्तियों का रंगरोगन भी रोक दिया गया

इस वर्ष नई मूर्तियों का निर्माण नहीं होगा बड़ी मूर्तियों का रंगरोगन भी रोक दिया गया

रायपुर, 28 जून। इस वर्ष गणेश चतुर्थी सितंबर माह में है, लेकिन मूर्तिकारों द्वारा अभी से इसकी तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। बारिश के दिनों में मिट्टी सूखने में वक्त लगता है। यदि मूर्ति बड़ी है और लगातार बारिश हो रही है तो उसके सूखने में माहभर का समय लग जाता है। प्रतिवर्ष माना में बड़े पैमाने पर मूर्तियां बनाई जाती हैं, लेकिन इस वर्ष नई मूर्तियों का निर्माण नहीं हो रहा है। बीते वर्ष कोराेना संक्रमण के कारण बड़ी मूर्तियाें की बिक्री नहीं हो सकी थी, इसलिए उन्हीं मूर्तियों की इस वर्ष बिक्री की जाएगी। आदेश आने के बाद बड़ी मूर्तियों का रंगरोगन भी रोक दिया गया था। अब उन मूर्तियों की फिनिशिंग की जा रही है। कई माह बीत जाने के कारण पहले मूर्तियों की सफाई की जाएग, इसके बाद उनमें पुट्टी लगाकर फिर घिसाई की जाएगी, अंत में रंगरोगन होगा। अभी सिर्फ बीते वर्ष की बड़ी मूर्तियों को ही तैयार किया जा रहा है। 

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छोटी मूर्तियां पर्व के कुछ समय पूर्व बनाई जाएंगी। कोलकाता के मूर्तिकार मूर्तिकार मणिक ठाकुर पिछले 30 साल से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है, बड़ी संख्या में हर साल कोलकाता से कलाकार बुलाए जाते थे। इस बार नहीं बुलाएंगे। बीते वर्ष बनाई गई मूर्तियों की बिक्री करेंगे, इसलिए उनकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो कुछ मूर्तिकार बुला सकते हैं। 

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अभी सिर्फ इस पर ही फाेकस है कि लागत निकल जाए। हमने वैक्सीन भी लगवा ली है। अन्य नियम भी मानने के लिए तैयार हैं। गाइडलाइन मिले तो करें तैयारी एक अन्य मूर्तिकार युधिष्ठिर कुमार मलिक ने बताया, सामान्य परिस्थितियों में जून अंत तक 15 से 20 बुकिंग हो जाया करती थी। इस वर्ष अब तक कुछ लोगों ने संपर्क किया है, लेकिन बुकिंग किसी ने नहीं की है। दो माह बाद कोरोना संक्रमण की स्थिति ही मूर्तियों का विक्रय निर्धारित करेगी। हमने कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा है कि आदेश जारी कर दिया जाए, ताकि हम तैयारी कर सकें। 6-7 लाख की मूिर्तयां गोदाम में माना में एक मूर्तिकला भवन के संचालक आकाश शर्मा बताते हैं कि वे अधिकतर बड़ी मूर्तियां ही बनाते हैं। सामान्य दिनों में लगभग 100 मूर्तियों की बिक्री हो जाती थी। बीते वर्ष सिर्फ 15 मूर्तियां ही उन्होंने बेची। 6 से 7 लाख की प्रतिमाएं पिछले साल से गोदाम में हैं। इस वर्ष नई मूर्तियों के निर्माण में मूर्तिकार लागत नहीं लगाना चाहते, इसलिए पिछले साल की मूर्तियों को ही तैयार कर रहे हैं। अभी तक उनके पास एक भी मूर्ति की बुकिंग नहीं है। अनुमानत: माना के सभी मूर्तिकारों के गोदामों में सालभर से रखी मूर्तियों की कीमत एक करोड़ से अधिक है।