breaking news New

डकैतों के बीहड़ों चंबल में होगा अटेर महोत्सव का आयोजन

डकैतों के बीहड़ों चंबल में होगा अटेर महोत्सव का आयोजन

भिण्ड । मध्यप्रदेश के चंबल का नाम आते ही बीहड़, बागी और डकैतों की छवि सामने आती है। समय के साथ इन बीहड़ों में बागी और डकैत तो बीते जमाने की बात हो गए, लेकिन लोगों के मन-मस्तिष्क से चंबल की यह पचान नहीं जाती। चंबल की इसी छवि को बदलने के लिए नववर्ष पर संकल्प लिया था और सुझाव बताए थे। अब जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद ने बीहड़ों    में चंबल नदी के किनारे गुजरात के कच्छ रण उत्सव जैसा अटेर महोत्सव की योजना तैयार की है।

सहकारिता मंत्री के साथपांच दिसम्बर को मीटिंग : पर्यटन एवं संस्कृति परिषद ने कच्छ रण उत्सव की तरह चंबल नदी के किनारे फरवरी में तीन दिन के अटेर महोत्सव की तैयारी की है। अटेर में निर्माणाधीन पुल के समीप चंबल नदी किनारे रेत पर तीन दिन का आयोजन होगा।

तैयारियों को अमलीजामा पनाने के लिए पांच दिसम्बर को सहकारिता मंत्री डॉ. अरविन्द भदौरिया की अध्यक्षता में बैठक होगी। महोत्सव में देशभर से आने वाले पर्यटक चंबल के आसपास बिखरी ऐतिहासिक धरोहरों, जैसी दसवीं शताब्दी के खैराघाट गांव में ब्रिक्स टेंपल, अटेर दुर्गा, पुराना डै, सूय्र दर्शन, वर्ड बंचिंग आदि को निहारने के साथ-साथ चंबल नदी में डाल्फिन की अठखेलियां देख पाएंगे।

जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं सस्कृति परिषद की ओर से मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड को प्रस्ताव भेजा जाएगा। परिषद जनवरी से यहा डे-पैकेज शुरु करने जा रही है। इसमें एक दिन में पर्यटक को नौकायन, ऊंट की सवारी, घुड़सवारी, बीहड़ दश्रन आदि कराए जाएंगे। इससे लोग चंबल को जान पाएंगे। अटेरसे 25 किमी दूरी पर इटावा सफारी पार्क है।

इसे इंग्लैंड के लॉगलीट सफारी पार्क की थीम पर बनाया गया है। यहां 18 एशियन शेर, नौ तेंदुए, 50 हिरण, 80 काले हिरण, तीन भालू सहित अन्य वन्यजीव हैं। यह सफारी आगरा के ताजमकल से दो घंटे की ड्राइविंग की दूरी पर है। अटेर महोत्सव में आने वाले पर्यटक 25 किमी की दूरी तय कर आसानी से यहां पहुंच पाएंगे।

चंबल में डाल्फिन, घडिय़ाल, मगरमच्छ के नजारे : महोत्सव में आनेवाले सैलानी चंबल नदी में पाए जाने वाले घडिय़ाल, मगरमच्छ और डाल्फिन को देख  पाएंगे। चंबल नदी में गंगा नदी में पाई जाने वाली गैंगेटिक प्रजाति की डाल्फिन पाई जाती है। उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा में 435 किमी के चंबल अभ्यारण्य की 80 फीसदी से ज्यादा डाल्फिन भिण्ड जिले की सीमा में चंबल नदी में पाई जाती है।