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पान-मसाला और गुड़ाखू कारोबार का यह नया बदलाव, नहीं लेंगे छोटे नोट और सिक्के...!

पान-मसाला और गुड़ाखू कारोबार का यह नया बदलाव, नहीं लेंगे छोटे नोट और सिक्के...!


पसंदीदा ब्रांड की अनुपलब्धता से मांग ने बदली दिशा

राजकुमार मल

भाटापारा- छोटे नोट और सिक्के नहीं लेंगे। फोन-पे से  बेचने के पूरे प्रयास में लगे पान-मसाला और गुड़ाखू कारोबार का यह नया बदलाव, बाजार में देखने में आ रहा है। इस बीच  उधारी की भी वसूली किए जाने के प्रयास चालू हो चुके हैं। और हां, एक और बात, मांग के अनुरूप उपलब्धता नही होने से पान-मसाला की मांग, दूसरे ब्रांड की ओर जाती दिखाई देती है।

पान मसाला में जैसी जमाखोरी और बेलगाम हो चली स्थितियां बन रहीं है,उसके बाद नित-नए बदलाव देखने में आ रहे हैं लेकिन पहली बार जो परिवर्तन आया है, उससे छोटे दुकानदार हैरत में हैं। परेशान भी इसलिए हो रहे हैं क्योंकि इसके पहले कभी यह शर्त नही रखी गई। लिहाजा होलसेल मार्केट से सामंजस्य बिठाने की कवायद की जा रही है,लेकिन प्रयास को सफलता  मिलती नजर नही आती।


छोटे नोट और सिक्के नहीं

गुड़ाखू और पान मसाला का होलसेल मार्केट भुगतान में बड़े नोट की ही स्वीकार्यता की शर्त रख रहा है। तर्क यह दिया जा रहा है कि बैंक में प्रति  लाख के बाद की रकम की गिनती पर अतिरिक्त चार्ज देना पड़ रहा है।500 या 2000 रूपये के ही नोट लिए जाएंगे। इस शर्त से रिटेल मार्केट नई परेशानी का सामना कर रहा है।

फोन-पे से दूरी

कैशलैस ट्रांजैक्शन अच्छी सुविधा है लेकिन गुटखा और गुड़ाखू बाजार, फोन-पे से दूरी बना रहा है। भारी-भरकम राशि के लेन-देन की जानकारी उजागर होने के बाद, होने वाली परेशानी के भय से यह बाजार पूरा भुगतान, नगद में मांग रहा है। यह शर्त भी सभी छोटे कारोबारियों के लिए नई परेशानी बन रही है।

मांग ने बदली दिशा



पसंदीदा ब्रांड में जैसी कीमत बताई जा रही है, उसके बाद अब मांग की दिशा ऐसे ब्रांड की ओर जाती नजर आ रही है, जो तय कीमत पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को भी आर्थिक नुकसान की जानकारी दी जा रही है।

अच्छा मौका इनके लिए

रिटेल मार्केट, तेजी को अच्छा अवसर के रूप में देख रहा है। होलसेल मार्केट की अच्छी-खासी रकम उधार के रूप में रिटेल मार्केट के पास जमा है। इसकी वसूली भी इस तेजी की आड़ में की जा रही है। इसलिए भी कृत्रिम शॉर्टेज का सहारा लिया जा रहा है।