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मतांकन प्रक्रिया में संशोधन की जरूरत -दुबे

मतांकन प्रक्रिया में संशोधन की जरूरत -दुबे

मतांकन के चक्कर में पर्यवेक्षक परेशान- गौतम

रायपुर, 25 दिसंबर। महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक इन दिनों अपने गोपनीय चरित्रावली में तीसरे मतांकन को लेकर बेहद परेशान हैं। तीसरे मतांकन में स्थानांतरण हो चुके तात्कालिक कलेक्टर से हस्ताक्षर कराने के लिए उन्हें एक जिला से दूसरा जिला, मंत्रालय, संचालनालनालय , निगम मंडलों कार्यालयों के बार बार चक्कर लगाना पड़ रहा है।

पर्यवेक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता विद्याभूषण दुबे नें इस खराब और महिलाओं को परेशान करने वाली व्यवस्था के लिए 26 अगस्त 2013 को जारी एक आदेश को जिम्मेदार ठहराते हुए संसोधन की जरूरत बताया है।

पर्यवेक्षक संघ के सलाहकार शशिकांत सिंह गौतम का कहना है  संचालक से भेंट के समय मतांकन प्रक्रिया में संशोधन मांग पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी। 

पर्यवेक्षक संघ की मांग है कि तीसरा मतांकन कलेक्टर के स्थान पर संचालक या सचिव महिला एवं बाल विकास के पास होना चाहिए। वैसे भी पूरी स्थापना व्यवस्था महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अधीन है इसलिए नई व्यवस्था से गोपनीय चरित्रावली में मतांकन संबंधित सारी परेशानी दूर हो जाएगी। नई व्यवस्था लागू किये जाने से सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पारित निर्णय और सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा जारी आदेश का पालन भी सुगमता से किया जा सकेगा। आदेशानुसार कर्मचारियों को गोपनीय चरित्रावली की प्रति संसूचित संचालनालय को करना है।

श्री दुबे ने बताया कि मंत्रालय महिला एवं बाल विकास का आदेश क्र एफ 1-6/2012/मबावि/50  रायपुर दिनाँक 26.8.2013 को विभाग में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली लिखने, मतांकन एवं संधारण की व्याख्या की गई है। जिसमें पर्यवेक्षकों के लिए तीसरा मतांकन संबंधित जिला के कलेक्टर को देना होता है। इस आदेश के कारण ही प्रदेश के लगभग 1700 पर्यवेक्षक परेशान हैं।