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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - दो जासूस करें महसूस के दुनिया बड़ी खराब है

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  - दो जासूस करें महसूस के दुनिया बड़ी खराब है

- सुभाष मिश्र

बहुत साल पहले एक फिल्म आई थी दो जासूस। इस फिल्म में राजकपूर और राजेन्द्र कुमार पर फिल्माया गया यह गाना....दो जासूस करे महसूस, के दुनिया बड़ी खराब है, कौन है सच्चा कौन है झूठा, हर चेहरे पे नक़ाब है। इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस साफ्टवेयर से भारत के तीन सौ नामचीन लोगों के फोन हैक करके उनकी जासूसी का मामला सुर्खियों में है। कांग्रेस और विपक्ष इसे सत्तारुढ़ भाजपा का कारनामा बताकर भारतीय जनता पार्टी को भारतीय जासूस पार्टी कह रही है। वहीं कुछ लोग मोदी जी और अमित शाह को दो जासूस करार देकर उनके मीम बना रहे हैं। जिज्ञासा कब जासूसी में तब्दील हो जाती है पता नहीं चलता। अक्सर अपने दुश्मन देशों और सत्ता के उलटफेर, आतंरिक षड्यंत्र के डर से जासूसी कराने की परंपरा रही है। बहुत से संदेही स्त्री-पुरुष भी शक के आधार पर आजकल प्रायवेट जासूसों की मदद लेकर एक दूसरे की खोज-खबर भी रखते हैं। यह खोज-खबर, मौके-बेमौके काम आती है। तलाक के बढ़ते मामलों में जासूसी और मोबाईल एप की भी भूमिका रहती है। बहुत सारे परिवारों में झगड़े की जड़ मोबाईल एप के जरिये होने वाली चेटिंग और चिटिंग है। मोबाईल एक तरह का जासूस है जो हमसे ही हमारी जानकारी साझा कराता है। जिसे हम अपना गोपन समझते हैं। दरअसल वह कब सार्वजनिक हो जाता है, पता नहीं चलता।

जबसे हम सब मोबाईल नेटवर्क और जगह-जगह लगे कैमरों की जद में आये हैं हमारी निजता खतरे में है। मोबाईल, लैपटाप और कम्प्यूटर के जरिये बहुत से लिंक और साईड के नाम पर भी हमारी रुचि, हमारे काम पर निगरानी रखी जाती है। कुछ लोगों का अनुभव तो यह भी कहता है कि हम अपने मोबाईल के सामने जो बातें करते हैं उनसे जुड़ी सामग्री, विषय के नोटिफिकेशन आने शुरु हो जाते हैं। इधर के सालों में साइबर क्राइम बढ़े हैं, जगह-जगह जमताड़ा जैसे गिरोह इंटरनेट पर मौजूद हैं। हम सभी को जासूसी उपन्यास बहुत पसंद आते हैं। हिन्दी में आया देवकीनंदन खत्री का जासूसी उपन्यास चन्द्रकांता संतती को पढऩे के लिए बहुत सारे अहिन्दी भाषियों ने हिन्दी सीखी। देवकीनंदन खत्री ने अपने जासूसी उपन्यास में प्राचीन किले, गुफाओं, निर्जन स्थान, बीहड़ जंगल को कथा वस्तु में शामिल किया। उर्दू के किस्से कहानियों में भी अय्यार यानि वेश बदलकर जासूसी करने वाला व्यक्ति या फिर कई बार धूर्त और चालाक व्यक्ति को भी अय्यार कहा जाता है। अभी जिस तरह की जासूसी या अय्यारी की बातें हो रही हैं वह उसमें इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे तथा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी और भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर अप्रैल 2019 में यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने वाली उच्चतम न्यायालय की कर्मचारी और उसके रिश्तेदारों से जुड़े 11 फोन नंबर सहित कई लोग शामिल हैं, जिनकी जासूसी की जा रही है। पिछले दो दिनों से संसद के सत्र में यही मुद्दा शामिल है जिसकी वजह से संसद का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। लोकसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। जिसके चलते सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई। कांग्रेस का कहना है कि कांग्रेस के सरकार की ओर से आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा है कि पहले डिस्कसन उसके बाद प्रेजेंटेशन। अगर वे डिस्कसन नहीं चाहते और सभी सांसदों को प्रेजेंटेशन देना है तो सेंट्रल हाल में दें।
राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने मांग की कि गृहमंत्री अमित शाह को बर्खास्त किया जाए और वह इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में उठाएगी।  
देश में पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी करवाने के मामले के तार छत्तीसगढ़ से भी जोडऩे की कोशिश होने लगी है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का नाम इससे जोड़ते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक ट्वीट के जरिए इस मामले में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि साल 2017 में जब भाजपा की सरकार थी तब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के कुछ नामी लोगों की जासूसी का प्रयास किया था। इसके लिए उन्होंने इजराइल के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस की सेवाएं लेने की कोशिश भी की थी। इस आरोप को खारिज करके डॉ. रमन सिंह ने कहा कि चार साल बाद क्या कांग्रेसियों को सपना आ रहा है कि उनकी जासूसी हुई थी या फोन टेप हुआ था, कांग्रेस के नेता सुबह अखबार पढ़कर मुद्दा बनाने वाले लोग हैं।  

इजराइल स्थित कंपनी एनएसओ ग्रुप के सैन्य दर्जे के मालवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक असंतुष्टों की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है। पत्रकारिता संबंधी पेरिस स्थित गैर-लाभकारी संस्था फॉरबिडन स्टोरीज एवं मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा हासिल की गई और 16 समाचार संगठनों के साथ साझा की गई 50,000 से अधिक सेलफोन नंबरों की सूची से पत्रकारों ने 50 देशों में 1,000 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की है, जिन्हें एनएसओ के ग्राहकों ने संभावित निगरानी के लिए कथित तौर पर चुना। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जिन लोगों को संभावित निगरानी के लिए चुना गया, उनमें 189 पत्रकार, 600 से अधिक नेता एवं सरकारी अधिकारी, कम से कम 65 व्यावसायिक अधिकारी, 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। जासूसी का यह तरीका ये एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन में डाल दिया जाए, तो कोई हैकर उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्स मैसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी हासिल कर सकता है।

ड्रॉपआउटजीप एक स्पाइवेयर है जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) पहले लक्षित व्यक्तियों की जासूसी करने के लिए इस्तेमाल कर रही थी। यह स्पाइवेयर को लैपटॉप के साथ-साथ मोबाइल उपकरणों, विशेष रूप से एप्पल आईफोन पर लगाकर किया गया था।  
लाइवमिंट की इस रिपोर्ट के अनुसार, RCSAndroid स्पाइवेयर एक ऐप के माध्यम से फैला था, जो बिना किसी खतरे की घंटी बजाए Google Play Store पर प्रकाशित हो गया। इस ऐप को हैकिंग टीम नाम की इटली के मिलान की एक टेक्नोलॉजी कंपनी ने डिजाइन किया था। यह कंपनी, एनएसओ समूह की तरह, निगरानी सॉफ्टवेयर में सौदा करने और उन्हें सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बेचने का दावा करती है। 2015 में ट्रेंड माइक्रो के सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट के माध्यम से आरसीएसएस एंड्रॉइड को अब तक के सबसे पेशेवर रूप से विकसित और परिष्कृत एंड्रॉइड मैलवेयर में से एक के रूप में वर्गीकृत किया। सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने भी इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के जज की अगुवाई में जेपीसी जांच की मांग की है, साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। सीताराम येचुरी ने कहा कि पेगासस का स्पाइवेयर जो कंपनी चलाती है उसने स्पष्ट कहा है कि सिर्फ सरकारों के साथ सौदा करती है। ऐसे में सरकाकर को बताना चाहिए कि वो एग्रीमेंट क्या है और किस-किस पर जासूसी हो रही थी।   

भारत सरकार ने इस तरह की किसी भी जासूसी से इंकार करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, इस तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और फिर संसद में ये व्यवधान, इसे जोड़कर देखने की आवश्यकता है। यह एक विघटनकारी वैश्विक संगठन हैं जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करता है। ये अवरोधक भारत में राजनीतिक खिलाड़ी हैं जो नहीं चाहते कि भारत प्रगति करें। भारत के लोग इस घटना और संबंध को समझने में बहुत परिपक्व हैं। अमित शाह का यह कहना कि कुछ लोग भारत की प्रगति को पसंद नहीं करते। ये खिलाड़ी कौन हैं उनके नाम भी उजागर होने चाहिए। यहीं अमित शाह एक बार फिर अपने विरोधियों को राष्ट्रवाद के अचूक हाथियार से घायल करके देशद्रोही, राजद्रोही करार देने पर तो नहीं तुले हैं।

हाल ही में अपना 75वां जन्मदिन मनाने वाले राजेश जोशी की कविता है-
जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएंगे
कठघरे में खड़े कर दिये जाएँगे
जो विरोध में बोलेंगे
जो सच-सच बोलेंगे, मारे जाएँगे
बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि किसी की कमीज हो
उनकी कमीज से ज्यादा सफ़ेद
कमीज पर जिनके दाग नहीं होंगे, मारे जाएँगे
धकेल दिये जाएंगे कला की दुनिया से बाहर
जो चारण नहीं होंगे
जो गुण नहीं गाएंगे, मारे जाएँगे
धर्म की ध्वजा उठाने जो नहीं जाएँगे जुलूस में
गोलियां भून डालेंगी उन्हें, काफिर करार दिये जाएँगे
सबसे बड़ा अपराध है इस समय निहत्थे और निरपराधी होना
जो अपराधी नहीं होंगे, मारे जाएंगे।