प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - हम न मरैं, मरिहें संसारा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  - हम न मरैं, मरिहें संसारा

सुभाष मिश्र, प्रधान संपादक

संत कबीर ने बहुत पहले कहा था कि
हम न मरैं, मरिहें संसारा।
हम कूं मिला जियावनहारा।


कोरोना संक्रमण काल में किसी को वैक्सीन के रूप में तारणहार तो नहीं मिला है किन्तु बहुत सारे लोग ये मानकर चल रहे हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा। जो लोग कोरोना पॉजिटिव होकर मर रहे हैं, उनकी मौत का खौफ भी लोगों में नहीं है। किसी समय पंजाब में आतंकवादी घटना में, फिर कश्मीर में, फिर छत्तीसगढ़ की माओवादी घटना में मरने वालों की संख्या की ही तरह अब कोरोना में मरने वाले धीरे-धीरे आंकड़ों में तब्दील होते जा रहे हैं। हमारी भोथरी होती संवेदना, हमें इन आंकड़ों में ज्यादा विचलित नहीं करती। हर दिन स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोरोना अपटेड जारी होता है। जब संक्रमण के आंकड़े और मरने वाले कम होते हैं, तो हम बेपरवाह होकर सड़कों पर, बाजारों में निकल पड़ते हैं। जब आंकड़े बढऩे लगते हैं, थोड़ी हाय तौबा मचती है तो लॉकडाउन हो जाता है। हम थोड़ी देर के लिए घरों की, कॉलोनियों की चारदीवारी में सिमट जाते हैं। छत्तीसगढ़ में खासकर रायपुर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के बावजूद बाजार में दिखती भीड़, होटलों, क्लबों में आते लोगों को देखकर नहीं लगता कि ये डरे हुए हैं। लोग बिना मास्क के बेपरवाह होकर घर से निकल रहे हैं जैसे कि कोरोना खत्म हो गया हो। आज ही रायपुर में एक डॉक्टर की कोरोना से मौत हुई है और उनके वृद्घ माता-पिता पॉजिटिव पाये गये हैं।

सरकारी और संगठित क्षेत्र में कोरोना संक्रमण बढऩे से कामकाज को लेकर आदेश जारी होते हैं। कुछ नियम कड़ाई से लागू करने कहा जाता है। अभी हाल ही में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय और एचओडी भवन में कोरोना संक्रमण बढऩे और 9 लोगों की मृत्यु होने से सरकार को आदेश जारी करना पड़ा। इस आदेश में मंत्रालय सहित सभी नवा रायपुर और रायपुर स्थित विभागाध्यक्ष कार्यालयों के संचालन के लिए मुख्य सचिव ने गाईड लाईन जारी की जिसमें सेनेटाईजेशन, रोस्टर के हिसाब से एक तिहाई अधिकारी-कर्मचारी की उपस्थित, तीन दिन सोम-मंगल-बुधवार को स्वास्थ परीक्षण तथा एक सप्ताह कार्य करने के उपरांत 14 दिन आइसोलेशन में रहने के निर्देश हैं। बहुत से अफसर इस आदेश का पालन नहीं करके अपने स्टाफ को काम पर बुला रहे हैं। कलेक्टोरेट सहित ऐसे बहुत से कार्यालय जहां जनता की आवाजाही बढ़ी संख्या में बनी रहती है, उनके लिए इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसा लगता है कि कोरोना केवल मंत्रालय और एचओडी ऑफिस के लोगों को पहचानता है।

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण तेजी से बढऩे के कारण ऐसे अफसर भी है जिन्हें यह नहीं मालूम कि कोरोना का डर और पद देखकर या कार्यालय देखकर नहीं फैलता। यह नक्सलाइड क्षेत्र में सड़कों के नीचे बिछी हुई लैंडमाइंस की तरह है, जिसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता। जैसे ही किसी का पैर या गाड़ी लैंडमाइंस के नीचे आता है, ब्लास्ट हो सकता है। वैसा ही कोरोना का ब्लास्ट है। ऑफिस में काम से आने वाले कौन सा शख्स कोरोना पॉजिटिव है, ये किसी को नहीं पता। वे अधिकारी-कर्मचारी जो एक सप्ताह आफिस जाकर कोरोना संक्रमण की चैन तोडऩे के नाम पर 14 दिन घर में रहना चाहिए, वे आफिस से प्राप्त अवकाश के दौरान अपने घरो में बंद नहीं हैं। उन्हें छुट्टी का अहसास हो रहा है। वे बिंदास बाहर घुम रहे हैं। मानो कोरोना केवल ऑफिस जाने से ही फैलता है। सबके भीतर हम न मरिहैं, मरिहैं जग सारा की भावना तेजी से फैल रही है। इस भावना का क्या इलाज होगा, ये कहना मुश्किल है। फिलहाल कोरोना की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
इधर, छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है की कोविड-19 को देखते हुए रायपुर मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन प्लांट को अपडेट किया जाएगा। वहीं, प्रदेश के 9 मेडिकल कॉलेजों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होंगे। इसमें नए बनने वाले तीन मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं। साथ ही वेंटिलेटर की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी पूरे देश में ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर की मारामारी हो रही है।

दुनिया में करीब तीन करोड़ लोग कोरोना महामारी से संक्रमित हो चुके हैं। पिछले 24 घंटों में दुनिया में 3.02 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं और 5638 लोगों की जान चली गई है। वल्र्डमीटर के अनुसार, दुनियाभर में अब तक 2 करोड़ 86 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इसमें से 9 लाख 18 हजार लोगों ने अपनी जान गंवा दी है, तो वहीं 2 करोड़ 5 लाख से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं। पूरी दुनिया में 71 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं।

कोरोना से सबसे प्रभावित देश अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों में कोरोना मामले और मौत के आंकड़ों में कमी आई है। भारत ही एक मात्र देश है जहां कोरोना महामारी सबसे तेजी से बढ़ रही है। हालांकि कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में अमेरिका पहले पायदान पर है। यहां अब तक 66 लाख 35 हजार से ज्यादा लोग संक्रमण के शिकार हो चुके हैं। अमेरिका में पिछले 24 घंटों में 46 हजार से ज्यादा नए केस आए हैं। दुनिया में कोरोना मामलों में नंबर-2 स्थान पर पहुंच चुके भारत में हर दिन सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं।

कॉन्वलसेंट प्लाज्मा थैरेपी से कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों के इलाज में कोई खास मदद नहीं मिलती। साथ ही यह थैरेपी मृत्यु दर कम करने में भी कारगर साबित नहीं हो रही। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की एक रिसर्च में यह बात सामने आई है। इधर,  सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि 2024 तक भी इतनी वैक्सीन तैयार नहीं हो पाएगी कि संसार के सभी लोगों को खुराक मिल जाए।

कोरोना के प्रारंभिक काल में कोरोना संक्रमण से बचाव के कार्य में लगे लोगों को युद्ध की भाषा में योद्धा, वारियर्स कहा गया और कोरोना को जंग बताया गया। अब योद्धा इतने अधिक हो गये हैं या कहे अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटने वाले इतने ज्यादा हो गये हैं, कि अब पहले जैसा सम्मान, हेलीकॉप्टर से फूल उड़ाने की बात बेमानी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बात-बात पर रात 8 बजे प्रकट होकर राष्ट्र के नाम संदेश दे रहे थे, अब वे इस मामले में खामोश हो गए हैं। कोरोना के प्रति उनकी अनदेखी या इसके साथ जीने की आदत डालने का आलम यह है कि वे अब मोर के साथ, किताबों के साथ फोटो सेंशन करा रहे हैं। कोरोना पॉजिटिव होकर मरने वाले की अंतिम यात्रा में भी लोग गाईड लाईन की बात कहकर या संक्रमण के डर से शामिल नहीं हो रहे हैं। कौन-कौन मर रहा है, यह अखबार में निधन का कॉलम पढ़कर ही पता चलता है या कोई सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहा है, तब पता चलता है। मौत का शोक और डर दोनों ही समान जीवन से नदारद सा दिखाई दे रहा है। अस्पताल में कोई कोरोना संक्रमित है या नहीं यह भी अब ज्यादा चिंता की बात नहीं रह गई है।