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महामारी में बिजली के अलावा ज़िंदगियों को रोशन करता एनटीपीसी, लारा

महामारी में बिजली के अलावा ज़िंदगियों को रोशन करता एनटीपीसी, लारा


ऑन लाइन चिकित्सा सेवा “परामर्श” लांच
 

कोविड अनुरूप व्यवहार को आत्मसात कर हमने जनहानि नहीं होने दी - आलोक गुप्ता, सीजीएम  

रायगढ़, 17 मई । एनटीपीसी की लारा इकाई कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर से अपने नगर एवं संयंत्र परिसर के अलावा आसपास के गांवों में जागरूकता लाने के लिये अभियान चलाती आ रही  है।  गांवों में मास्क-सैनेटाइजर एवं मोबाइल हॉस्पिटल के माध्यम से चिकित्सा सेवा प्रदान करना एनटीपीसी की प्राथमिकताओं में से एक है। परियोजना प्रभावित गाँव छपोरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन निर्माण एवं चिकित्सकीय उपकरणों की उलब्धता एनटीपीसी लारा द्वारा कराई गई है। महामारी से जीवन रक्षा में यह प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ है। 


एनटीपीसी परिसर में कोरोना अनुरूप व्यवहार का कड़ाई से पालन किया जाता है।   एनटीपीसी के 71 कर्मियों के संक्रमित होने के बावजूद अभी तक कोई जनहानि नहीं हुई है। इसमें से 56 कर्मचारी ठीक हो चुके हैं एवं 15 कर्मचारी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। एनटीपीसी कर्मचारियों के अतिरिक्त उनके परिजन, सीआईएसएफ़ के जवान एवं एनटीपीसी से सम्बद्ध एजेंसियों के लगभग 132 अन्य कोरोना संक्रमित हुए जिनमें 105 स्वस्थ हो चुके हैं एवं 27 इलाजरत हैं। एनटीपीसी, लारा हॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा समय रहते  संक्रमित लोगों को जरूरी परामर्श दिया गया, उनकी नियमित मॉनिटरिंग  की गई और एहतियाती कदम उठाने को कहा गया। कुछ मामलों में स्थिति बिगड़ने के पूर्व ही मरीज को इलाज हेतु रायगढ़ अथवा रायपुर के अस्पतालों में भेजा गया और वे ठीक होकर वापस लौटे।

कोरोना महामारी के समय देश को बिजली देने के साथ ही एनटीपीसी लारा लोगों की जिंदगियों में रोशनी भी भर रहा है।

देश की बड़ी एनटीपीसी की इकाईयों में से एक रायगढ़ का लारा संयंत्र वर्तमान में अपनी दो यूनिट से 1,600 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। विद्युत उत्पादन अतिआवश्यक सेवाओं के अंतर्गत है अतः  317 एनटीपीसी कर्मचारियों के अतिरिक्त एजेंसियों  के कर्मचारी दिन-रात काम में लगे हैं। शासन के निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुये 50 प्रतिशत कर्मचारियों को  वर्क फ्रम होम प्रदान किया गया है एवं पालियों में कार्य संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में एनटीपीसी के 70 स्टेशन हैं।   इस दौरान कई स्टेशनों में एनटीपीसी कर्मियों की कोरोना संक्रमण में आने से मौत भी हुई है वहीं लारा में अभी तक ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इसका एक मात्र कारण है यहाँ  के समर्पित डाक्टरों एवं अन्य चिकित्सकर्मियों की टीम। 

 प्लांट के अंदर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) का कड़ाई से पालन किया जाता है। समस्त कार्यालय परिसर को हर तीन घंटे पर सेनेटाइज किया जाता है। कोरोना संक्रमितों को परिसर में ही अलग से महानदी भवन में रखा जाता है जहां सामान्य आवागमन निषेध है एवं मात्र चिकित्सकर्मी तथा भोजन पंहुचाने के लिये इंडियन काफी हाउस कर्मी पीपीई किट पहनकर प्रवेश करते है। महानदी भवन स्थित कोविड सेंटर में आवश्यकता पड़ने पर संक्रमितों को ऑक्सीज़न प्रदान करने की व्यवस्था भी उपलब्ध है।  

पांच डॉक्टर्स की टीम ने संभाला है मोर्चा

प्लांट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सरोज कुमार पुजारी के नेतृत्व में लारा टाउनशिप स्थित एनटीपीसी के अस्पताल में पांच डॉक्टरों की टीम तैनात है जो अलग-अलग शिफ्ट में सदैव उपलब्ध रहती है।  पैरामेडिकल स्टाफ इनकी सहायता हेतु सदैव तत्पर रहता है।  इसके अतिरिक्त 24*7 कोविड नियंत्रण कक्ष का संचालन भी किया जा रहा है।  इन्हीं की मेहनत का नतीजा है कि एनटीपीसी और उसके आसपास के इलाके में कोरोना का संक्रमण नियंत्रण में है। इनके हिस्से में कोविड टीका लगाना, कोरोना की जांच से लेकर ओपीडी परामर्श करना सम्मिलित है। ओडिशा से लगे रेंगालपाली बेरियर में यहीं के स्टाफ की ड्यूटी कोरोना टेस्टिंग में लगी है। 

प्लांट के अस्पताल के डॉक्टर अजय सिंह ठाकुर  बताते हैं: “कोरोना की दूसरी लहर के पूर्व ही हम चुनौतियों के लिये स्वयं को मानसिक रूप से तैयार कर चुके थे एवं हमारा प्रयास समय रहते उचित निर्णय लेने पर था। हम कोरोना की पहली लहर के समय से ही प्रोटोकाल का अक्षरशः पालन कर रहे हैं।  कोरोना संक्रमण की स्थिति में इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।“ 

आपदा ने हमें मजबूत बनाया

 यहाँ  के सीजीएम आलोक गुप्ता कहते हैं: “आपदा की इस घड़ी में पूरा एनटीपीसी परिवार एक साथ खड़ा है। सहकर्मी संक्रमित हुए उनके साथियों ने उनका मनोबल बढ़ाया एवं हर स्तर पर मदद की। प्रबंधन ने इस महामारी ने निबटने के लिए कोविड अनुरूप व्यवहार अपनाने पर ज़ोर दिया। एनटीपीसी चिकित्सालय की सक्रियता के कारण ही हमारे यहां कोरोना के कारण एक भी मृत्यु अभी तक नहीं हुई है एवं ज्यादातर संक्रमण के मामले गंभीर नहीं हुए। एक परिसर में सालभर से अधिक समय से रहना और एक दूसरे का साथ देने ने हमें और मजबूत बनाया है।  रायगढ़ जिला प्रशासन ने हमारा भरपूर सहयोग किया है। आशा है यह सहयोग हमें आगे भी मिलता रहेगा।“