breaking news New

हनीट्रैप किसानो के लिए फायदेमंद : हाथी - मनुष्य का टकराव रोकने ‘री हैब’ परियोजना की शुरुआत

हनीट्रैप किसानो के लिए फायदेमंद : हाथी - मनुष्य का टकराव रोकने ‘री हैब’ परियोजना की शुरुआत

नयी दिल्ली। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने कर्नाटक के जंगलों में हाथी - मनुष्य का टकराव रोकने के लिए मधुमक्खी बाड़ बनाने की परियोजना ‘री हैब’ की शुरुआत की है जिसमें मधुमक्खियाें की बस्तियां प्रमुख भूमिका निभायेंगी।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्याेग मंत्रालय के सूत्रों ने यहां बताया कि आयोग ने देश में मानव-हाथी टकराव को कम करने के लिए ‘मधुमक्खी-बाड़’ बनाने की एक अनूठी परियोजना को शुरू की है। परियोजना में ‘री-हैब’ का उद्देश्य शहद वाली मधुमक्खियों का इस्तेमाल करके मानव बस्तियों में हाथियों के हमलों को विफल करना है और इस प्रकार से मनुष्य और हाथी दोनों के जीवन की हानि को कम से कम करना है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने 15 मार्च को कर्नाटक के कोडागु जिले के चेलूर गांव के आसपास चार स्थानों पर यह परियोजना प्रायोगिक तौर पर शुरू की। ये सभी स्थान नागरहोल नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के बाहरी इलाकों में स्थित हैं। इस परियोजना की कुल लागत सिर्फ 15 लाख रुपये है।
‘री-हैब’ आयोग के राष्ट्रीय शहद मिशन के तहत एक उप-मिशन है। चूंकि शहद मिशन मधुवाटिका स्थापित करके मधुमक्खियों की संख्या बढ़ाने, शहद उत्पादन और मधुमक्खी पालकों की आय बढ़ाने का एक कार्यक्रम है, तो ‘री-हैब’ हाथियों के हमले को रोकने के लिए मधुमक्खी के बक्से को बाड़ के रूप में उपयोग करता है।
सूत्रों ने बताया कि हाथियों के प्रवेश मार्ग को मानव बस्तियों के लिए अवरुद्ध करने के वास्ते सभी चार स्थानों पर मधुमक्खियों के 15-20 बॉक्स स्थापित किए हैं। बक्से एक तार के साथ जुड़े हुए हैं ताकि जब हाथी गुजरने का प्रयास करें तो मधुमक्खियों के बक्से में हलचल हाे जाए। मधुमक्खी के कुछ बक्सों को जमीन पर रखा गया है और साथ ही हाथियों के मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए पेड़ों से लटकाया गया है। हाथियों पर मधुमक्खियों के प्रभाव और इन क्षेत्रों में उनके व्यवहार को रिकॉर्ड करने के लिए कई स्थानों पर ‘नाइट विजन’ कैमरे लगाए गए हैं।