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रेत माफियाओं ने खोद डाला सोन नदी, हो रहा है पर्यावरण का भारी क्षरण

रेत माफियाओं ने खोद डाला सोन नदी, हो रहा है पर्यावरण का भारी क्षरण

चांपा, 25 दिसंबर। यूं तो किसी भी नदी के सीना को छलनी कर बेस कीमती  रेत का दुरुपयोग करना प्रशासनिक हलके के लिए कोई बड़ी बात नहीं होती है लेकिन जब यही रेत का अवैध परिवहन लगातार नदी के छाती रूपी तट से लगातार दोहन होता रहा तो जरा अंदाजा लगाइए उस नदी के सहित आसपास के पर्यावरण पर कितना घोर नुकसान होता होगा। 

इसी बात का जीता जागता उदाहरण हम यहां पर कुछ तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं जहां ग्राम उमरेली में कभी कल कल करते बह रही सोन नदी आज इतना बदहाल हो चुका है कि सच में यहां सोन नदी बह रही है इस बात का यकीन दिलाने के लिए किसी भी जागरूक व्यक्ति को कसम खाकर कहना पड़ेगा कि हां ग्राम उमरेली में सोन नदी बह रही थी,,,,,?

नदी नाला एवं तलाब हमारे रोजमर्रा दिनचर्या के लिए एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और नदी तो प्राकृतिक रूप से हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और जब इस प्राकृतिक जल स्रोत का  दुरुपयोग होने लगे तो इसका प्राकृतिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इसका ज्वलंत उदाहरण हम चांपा से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम उमरेली में जाकर देख सकते हैं सौभाग्य से ग्राम उमरेली में सोन नदी का कभी एक शानदार अस्तित्व हुआ करता था लेकिन आज यह सोन नदी अपने अस्तित्व के मायने को चरितार्थ करने के लिए मानो गंभीर जद्दोजहद कर रहा है सोन नदी के आसपास में आबाद रेत माफियाओं ने इस प्राकृतिक जल स्रोत के छाती रूपी तट को इतना छलनी कर दिया है कि आज बड़ी ही मुश्किल से एक ट्रैक्टर रेत निकल पाएगा कहने को तो यह सोन नदी कुछ साल पहले तक इतना आबाद हुआ करता था कि यहां आस-पास के समूचे ग्राम वासियों का बड़े मजे के साथ निस्तार हो जाता था, लेकिन आज इस सोन नदी में न रेत है और ना पानी चारों तरफ केवल बदहाली और लूट खसोट का ज्वलंत उदाहरण इस नदी के तट पर देखा जा सकता है। तट पर उग आए जंगल झाड़ियों के  लिए  पानी की कमी के कारणों से प्राकृतिक पेड़ पौधों को पानी  देने की नौबत दिखाई पड़ रही है, और यही कारण है कि यह संपन्नता से लबालब यह नदी आज बूंद बूंद पानी के लिए तरसता दिखाई पड़ रहा है। रेत माफियाओं ने इस नदी के प्राकृतिक संतुलन का इतना चीर हरण किया है इतिहास में दर्ज चीर हरण भी फीका दिखाई पड़ रहा है  आज यह नदी अपने तार-तार हो चुके सीना को देखकर बदहाली का आंसू बहा रहा होगा ऐसा नहीं कि ग्राम उमरेली में कल कल करते सोन नदी पर रेत माफियाओं  ने किसी एक दिन में बुरी नजर डालने से इतना जर्जर हालात हो गया हो नहीं बल्कि यह सालों से हो रही रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन का नतीजा है कि आज यह नदी स्वयं के आचमन करने के लिए आज एक लोटा भर पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और रेत का तो अब कहीं कोई नामोनिशान नहीं रहा तो इसका जिम्मेदार हम रेत माफियाओं को कहें या फिर प्रशासन ही इतना कमजोर है कि उसने रेत माफियाओं को यह कह दिया हो ,,,,,मानो लूट सके तो लूट ले,,,,,