धरती के सितारों को फलक तक ले जाते हैं संजय मिश्रा

धरती के सितारों को फलक तक ले जाते हैं संजय मिश्रा

अरुणाचल प्रदेश के बच्चों के गुरु होंगे संजय , देंगे बैडमिंटन के ज्ञान

विद्याभूषण दुबे "अक्षत"

बैडमिंटन के क्षेत्र में संजय मिश्रा एक ऐसा नाम जो अपनी पूरी जिंदगी खेल को समर्पित कर चुके हैं । जो भिलाई स्टील प्लांट की अपनी सरकारी नौकरी त्यागकर बच्चों में छुपी प्रतिभा को तराशने का काम कर रहे हैं। विगत कुछ वर्षों में अनेक प्रतिभाओं को  गुमनामी की गलियों से निकालकर राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय तक उनका नाम दर्ज कराने में अहम भूमिका श्री मिश्रा ने निभाई है।

श्री मिश्रा वर्तमान में इंडिया बैडमिंटन टीम जूनियर के चीफ कोच हैं। हालफिलहाल श्री मिश्रा से खेल की बारीकियों को समझने वाले मालविका बंसोड़ और आकर्षी कश्यप दो ऐसे नाम है जो डेनमार्क में आयोजित उबेर कप में भारत की ओर से खेलने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।


मूलतः भिलाई निवासी संजय मिश्रा के मार्गदर्शन में छग के सैकड़ों बच्चों ने अपने जीवन में पहली बार बैडमिंटन रैकेट पकड़ना सीखा है। आज आलम ये है कि श्री मिश्रा की बदौलत बैडमिंटन जगत में छग की विशिष्ट पहचान बन चुकी है। श्री मिश्रा से कोचिंग लिए कई बच्चे नेशनल, इंटरनेशनल स्तर पर देश प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

भारतीय टीम में उबेर कप के लिए चयनित मालविका बंसोड़, आकर्षि कश्यप सहित वेंकट गौरव, मनीष गुप्ता, हिमांशु वर्मा, हीरल चौहान, पवन मालिक, अजय दयाल, जी. बी. वर्गिस, प्रियंका सराफ, अभिषेक सिंह, हर्षल भोयल, अस्मित श्रीवास्तव, रौनक चौहान, जिनेश सुराना, आदित्य दास, दिपाली गुप्ता, तनु चंद्रा, वंशिका श्रीवास्तव, एस. अनंत ये वो चंद खिलाड़ियों के नाम है जिन्होंने संजय मिश्रा से बैडमिंटन खेलना सीख कर भारत के भीतर कई राज्यों में और विदेशी मैदानों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। 

मालविका मूलतः नागपुर की है परंतु विगत दो वर्षों से रायपुर में श्री मिश्रा से प्रशिक्षण ले रही हैं। ये भी सच है कि कोरोना काल खत्म होने के बाद सब कुछ अच्छा रहा तो वह दिन दूर नहीं जब श्री मिश्रा अरुणाचल प्रदेश के बच्चों को भी प्रशिक्षण देते हुए हम सभी को दिखाई देंगे । ये वो तमाम परिस्थितियां स्पष्ट करती है कि संजय मिश्रा पूरे देश के खिलाड़ियों के दिलों में बसते हैं। उबेर कप के लिए चयनित नागपुर की मालविका बंसोड़ श्री मिश्रा से विगत दो वर्षों से प्रशिक्षण ले रही हैं । जबकि भिलाई की आकर्षी कश्यप भी बरसों तक श्री मिश्रा के क्षत्र छाया में ही प्रशिक्षण लेते रही है ।


छग राज्य के 25 से भी अधिक खिलाड़ियों को फर्श से अर्श तक तक पहुचाने वाले संजय मिश्रा का जन्म मैहर और कटनी के बीच स्थित कैमोर शहर में 9 मई 1968 को हुआ। पिता आर के मिश्रा एसीसी सीमेंट कंपनी में कार्यरत थे । 10 वीं तक की शिक्षा कैमोर से पूरी करने के बाद 11 वीं बोर्ड की पढ़ाई करने के लिए जबलपुर आ गए । 11 वीं उत्तीण करने के वर्ष 1986 में भिलाई इस्पात संयंत्र में नौकरी लग गई। तीन बहनों के अकेले भाई संजय का विवाह डॉ गीता मिश्रा से 21 जनवरी 1998 को हुआ । श्री मिश्रा के दो बच्चे संचिता और संगीत मिश्रा है ,संगीत भी अपने पिता संजय के नक्शेकदम पर आगे बढ़ रहा है।

संजय मिश्रा बैडमिंटन के आसमान में एक ऐसा चमकता सितारा हैं जो अपनी चमक से धरती के सितारों को आसमान की ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।