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कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी खुराक आपके लिए क्यों है जरूरी?

कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी खुराक आपके लिए क्यों है जरूरी?


दुनिया भर के अधिकतर देशों में कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। अधिकतर देशों में इसके लिए टीके की दो खुराकें दी जा रहीं हैं। अब शोधकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि पहली और दूसरी खुराक लगाने से शरीर में खासकर प्रतिरक्षा प्रणाली में किस तरह के बदलाव होंगे। यह हमें कोरोना से बचाने में कितने कारगर साबित होंगे।   


एक नए अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 के टीके (वैक्सीन) की दूसरी खुराक प्रतिरक्षा प्रणाली के एक हिस्से को शक्तिशाली बनाती 

है जो संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है। इसलिए शोध में कहा गया है कि कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी खुराक अवश्य लगानी चाहिए। यह शोध स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के जांचकर्ताओं की अगुवाई में किया गया है।  


पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर बाली पुलेंद्रन ने कहा कि टीकों से संक्रमण रोकने के असर के बावजूद, आरएनए के टीके वास्तव में कैसे काम करते हैं, इस बारे में बहुत कम जानकारी है। इसलिए हमने उनमें से एक पर उससे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर पड़ने वाले असर का पता लगाया।

शोधकर्ताओं ने वैक्सीन लगाने वाले व्यक्तियों के रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया। उन्होंने एंटीबॉडी की संख्या की गणना की, प्रतिरक्षा संबंधी प्रोटीन के स्तर को मापा गया। 2,42,479 अलग-अलग प्रतिरक्षा कोशिकाओं के प्रकार और स्थिति के जीनोम में हर एक जीन की विशेषता के बारे में पता लगाया गया।   


प्रोफेसर पुलेंद्रन ने कहा कि दुनिया का ध्यान हाल ही में कोविड-19 के टीकों पर है, विशेष रूप से नए आरएनए टीकों पर केंद्रित हुआ है।  


शोधकर्ता ने कहा यह पहली बार है जब आरएनए के टीके मनुष्यों को लगाए जा रहे हैं। हमें इस बात का कोई सुराग नहीं है कि वे किस तरह काम करते हैं। पर इस बात पर कोई शक नहीं है कि टीके कोविड​​-19 के खिलाफ 95 फीसदी तक सुरक्षा प्रदान करते हैं।  


परंपरागत रूप से नए टीकों के लिए मुख्य प्रतिरक्षा विज्ञान के आधार पर एंटीबॉडी को बेअसर करने की उनकी क्षमता है। बी कोशिकाएं नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं द्वारा निर्मित प्रोटीन, जो स्वयं एक वायरस से निपट सकते हैं और संक्रमित कोशिकाओं को रोक सकते हैं।

प्रोफेसर पुलेंद्रन की अगुवाई में हाल ही में एक टीके (वैक्सीन) के अध्ययन में सबसे पहले कोशिकाओं के उप समूह को पहचाना गया। इन कोशिकाओं में आम तौर पर प्रचुर मात्रा में कोशिकाओं का एक छोटा उपसमूह पाया गया जिसे मोनोसाइट्स कहा जाता है, जो संक्रमण को दूर हटाने वाले जीन हैं। एक वास्तविक कोविड-19 संक्रमण के मुकाबले में ये मुश्किल से हिलते हैं। लेकिन टीके ने उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित किया।

मोनोसाइट्स का यह विशेष समूह, जो कुदरती रूप से शरीर का हिस्सा है, टीकाकरण से पहले सभी परिसंचारी रक्त कोशिकाओं का केवल 0.01 फीसदी था। लेकिन दूसरे टीके के बाद, उनकी संख्या 100 गुना बढ़ गई थी और सभी रक्त कोशिकाओं का कुल 1 फीसदी हो गया था। इसके अलावा, उनका स्वभाव कम उत्तेजक लेकिन अधिक तीव्र एंटीवायरल बन गया। प्रोफेसर पुलेंद्रन ने कहा कि वे अलग-अलग फैलने वाले संक्रमणों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हैं।