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हरियाली तीज में आपका सौंदर्य

हरियाली तीज में आपका सौंदर्य

 शहनाज हुसैन

सावन के महीने में धरती जब चारों ओर हरी चादर  ओढ़ लेती है उस समय  आस्था ,सौन्दर्य  और प्रेम का उत्सव हरियाली तीज। श्रावणी तीज  का पावन पर्व मनाया जाता है / पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज  के रूप में भी मनाते हैं। इस वर्ष तृतीया तिथि का शुभ महूरत 22 जुलाई 1921 बजे शुरू होगा  जबकि तृतीया तिथि का महूरत  23 जुलाई को 1702 तक रहेगा। हरियाली तीज का मुख्य उत्सव 23 जुलाई  बृहस्पति बार के  दिन  मनाया जायेगा । यह त्यौहार मुख्यता उत्तर भारत के  हिन्दी बैल्ट  के  राजस्थान , हरियाणा , उत्तर प्रदेश , बिहार ,झारखण्ड और छत्तीसगढ़ राज्यों में मुख्य रूप से मनाया जाता है जबकि  अन्य राज्यों में बसे इन राज्यों के प्रवासी भी इसे धूम धाम से मनाते हैं।
 गर्मियों के मौसम के बाद महिलाएं  वर्षा ऋतु का तीज उत्सव मनाकर स्वागत करती हैं, हरियाली  तीज उत्तर भारत की  महिलाओं का धार्मिक त्यौहार ही नहीं बल्कि प्राकृतिक उत्सव मानाने का खास दिन  माना जाता है जब महिलाएं दुल्हन की तरह सजती और संवरती हैं। तीज  मेहंदी , लहरिया ,झूले,   चूड़ियों   और श्रृंगार का पावन पर्व माना  जाता है। बरसात  के मौसम में धरती माँ   द्वारा  औड़ी  गई  हरियाली की चादर में मनाये जाने बाले इस त्यौहार में सुहागिन महिलायें  हाथों पर हरी मेहँदी लगाकर  प्रकृति से जुड़ने की अनुभूति  करती हैं। तीज    में  सहेलियां  सामूहिक रूप से  झूला झूलती हैं  तथा इसमें गीत संगीत , तीज मिलन , सामूहिक भोज और मिष्ठानों का  आदान प्रदान  सामाजिक समरसता को सुदृढ़  बनाता है। इस दिन विवाहित  हिन्दू महिलाएं अपने सुहाग की लम्बी  उम्र के लिए  एक दिन निर्जला ब्रत रखती हैं  जबकि कुंवारी कन्याएँ मनचाहे  बर   की प्राप्ति  के लिए दिन भर व्रत रखती हैं।


सावन  की फुहारों में मनाये जाने बाले इस पवित्र पर्व  पर महिलायें प्रेम की फुहारों से अपने परिवार की खुशहाली  तथा  वंश वृद्धि की कामना करती हैं । यह त्यौहार राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित उत्तरी राज्यों में काफी धूम-धाम से मनाया जाया जाता है। हरियाल  तीज में महिलायें ब्रत रखती हैं तथा झूला झूलती हैं। हर साल सावन के महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीय  तिथि को मनाये जाने बाले इस उत्सव  को श्रावणी तीज या कजरी तीज भी कहते हैं।
 इस त्यौहार में विवाहित महिलाऐं भगवान  शिव और माँ  पार्वती की आराधना और  उपवास रखकर अपने पति के चिरआयू तथा समृद्धि की कामना करती है। इस त्यौहार में महिलाएं मेंहदी, चूड़ियां, बिंदी तथा सुन्दर परिधानों से सुसज्जित होती है तथा सौंदर्य इस त्यौहार का मार्मन्त अंग है। हालाँकि महिलाओं की ख्वाहिश हमेशा से सुन्दर दिखने की रहती है लेकिन हरे रंग की चादर ओढे प्राकृतिक बाताबरण में मेकअप के दौरान कुछ उपायों को अपना कर आप न केवल सुन्दर बल्कि सवसे अलग भी दिख सकती हैं। इस त्यौहार में कुछ प्राकृति आर्युवेदिक प्रसाधनों का प्रयोग करने से आपके सौंदर्य को चार चांद लग सकते है।