breaking news New

इंटरमिटेंट फास्टिंग फॉलो करने जा रहे हैं तो जान लें ये बातें

इंटरमिटेंट फास्टिंग फॉलो करने जा रहे हैं तो जान लें ये बातें

वजन घटाने के लिए लोगों में इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) काफी पॉपुलर है। वजन घटाने के अलावा यह कोलेस्ट्रॉल को घटाने में भी मदद करती है। मगर, इस डाइट को फॉलो करते समय आपको बहुत-सी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। चलिए आपको बताते हैं इस डाइट को फॉलो करने से पहले व बाद में आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग?
इंटरमिटेंट फास्टिंग एक ऐसा डाइट प्लान है, जिसमें लंबे समय तक भूखे रहकर मील स्किप करना होता है। साथ ही किस समय भोजन करना है और किस समय नहीं, ये पहले से तय होता है। कुछ लोग 12 घंटे के अंदर ही अपने मील्स ले लेते हैं तो कुछ 14 से 18 घंटे तक कुछ नहीं खाते है। इस फास्टिंग के दौरान डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स कम और प्रोटीन व फाइबर अधिक लेना होता है। इससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

दिल के रोगों का खतरा भी कम करती यह डाइट
रिसर्च के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग भी लोगों को काफी पसंद आ रही हैं। यह डाइट वजन घटाने से लेकर हार्ट डिसीज तक का खतरा कम करती हैं, जिसकी वजह से यह डाइट काफी फेमस हो रही है। इसमें आप सिर्फ 6-8 घंटे के दौरान ही कुछ खाते हैं यानि रोजाना 16 से 18 घंटे तक कुछ भी नहीं खाते हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग से जुड़ी जरूरी बातें...

हर दिन 16 घंटे उपवास करें

-हर दिन 14-16 घंटे उपवास और 8 से 10 घंटे ही आप खाना खा सकते हैं।
-8 से 10 घंटों के बीच 2 या 3 से ज्यादा मील्स नहीं ले सकते।
- फॉस्टिंग के दौरान पानी, कॉफी व लौ कैलोरी ड्रिंक पी सकते हैं। इससे भूख को कम करने में मदद मिलती है।
-हफ्ते के 5 दिनों में आप खाना आम दिनों की तरह खा सकते हैं लेकिन 2 दिनों तक सिर्फ 500-600 तक कैलोरी लेनी होगी।
-इसमें महिलाएं 500 और पुरुष 600 कैलोरी ले सकते हैं।

अब जानते हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग से आपको क्या-क्या फायदे मिलते है...
. वजन व बैली फैट घटाने में काफी फायदेमंद है।
. पाचन को बेहतर बनाने और पेट की समस्याओं से राहत मिलती है।
. यह डाइट जो सेल्स अच्छे से काम नहीं कर रहीं उन सेल्स को खत्म करने और अच्छी सेल्स को रेजुवनेट करने के लिए भी करना चाहिए।
. इससे आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ती है, जिससे आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं।
. रिसर्च के मुताबिक, इस डाइट से कैंसर का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।