Gujarat में एशियाई शेरों की आबादी बढ़ी

Gujarat में एशियाई शेरों की आबादी बढ़ी

जानवरों के साथ बर्बरता की खबरों के बीच एक राहत भरी खबर गुजरात के गिर से आई है. एशियाई शेरों का घर माने जाने वाले गिर अभयारण्य में शेरों की संख्या बढ़ गई है. बीते पांच सालों में भारत में दुर्लभ माने जाने वाले एशियाई शेरों की आबादी करीब 30 फीसदी बढ़ गई है. यहां हुए आधिकारिक सर्वे के मुताबिक गिर में एशियाई शेरों की संख्या 700 के करीब पहुंच गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई शेरों की आबादी को लेकर ट्वीट कर इसे "उत्कृष्ट उपलब्धि" बताया है. अफ्रीका में पाए जाने वाले शेर से एशियाई शेर कद में थोड़े छोटे होते हैं और यह सिर्फ गुजरात के गिर में पाए जाते हैं. मोदी ने ट्वीट कर लिखा, "गुजरात के गिर जंगल में रहने वाले शानदार एशियाई शेरों की आबादी करीब 29 फीसदी बढ़ी है. उनके रहने का दायरा भी 36 फीसदी बढ़ा है. गुजरात के लोग और वो सभी लोग बधाई के पात्र हैं जिनकी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल हुई है."

शेरों की गणना हर पांच साल में होती है और इस बार जून महीने में होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस की वजह से लगे प्रतिबंधों के कारण सर्वे पूरा नहीं हो पाया. इसके बजाय पिछले सप्ताह पूर्णिमा के दौरान एक अवलोकन सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें विशेषज्ञों के एक छोटे समूह के साथ 1400 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया.

गुजरात के प्रमुख वन्यजीव वार्डन श्यामलाल तिकदर ने एक रिपोर्ट में कहा, "एशियाई शेरों की संख्या वृद्धि दर 28.8 फीसदी के साथ 674 हो गई है." इससे पहले 2015 में शेरों की गणना की गई थी तब इनकी संख्या 523 थी, जबकि 2010 में गिर में 411 एशियाई शेर थे. साल 2000 में शेरों को विलुप्त होते जानवरों की सूची में डाला गया था. शेरों के शिकार और जंगल में इंसानी दखल से इनकी आबादी को लेकर संकट पैदा हो गया था.

गुजरात वन्यजीव बोर्ड की सदस्य प्रियव्रत गाडवी कहती हैं कि अनुमान काफी उत्साहजनक है और सटीक लगता है. उन्होंने कहा, "यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और आंकड़े उत्साहजनक हैं. इससे पता चलता है कि संरक्षण कार्यक्रम सफल रहा है." दक्षिणी अफ्रीका को छोड़कर गिर दुनिया का ऐसा इकलौता स्थान है, जहां शेरों को अपने प्राकृतिक आवास में रहते हुए देखा जा सकता है. बारिश के मौसम के बाद इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है.