breaking news New

Research: Hepatitis की दवा Corona से बचाव में कारगर

Research: Hepatitis की दवा Corona से बचाव में कारगर

कोरोना वायरस से जंग के बीच बीते कुछ दिनों में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को कई कामयाबियां हासिल हुई है। एक ओर इसकी कई वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के दौरान बेहतर परिणाम दे रही है, वहीं दूसरी ओर इसके इलाज के लिए डेक्सामेथासोन, फेपिराविर जैसी कई दवाएं भी सामने आई हैं। अब एक नई रिसर्च में पता चला है कि हेपेटाइटिस की दवा कोरोना से बचाव करने में कारगर है। यह रिसर्च हरियाणा के रोहतक पीजीआई के शोधकर्ताओं ने की है। इसी संस्थान में भारतीय वैक्सीन कोवाक्सिन का ह्यूमन ट्रायल भी चल रहा है। फिलहाल जानते हैं हेपेटाइटिस की दवा संबंधी इस नई रिसर्च के बारे में। 

दुनियाभर के कई देशों में भी हेपेटाइटिस की दवा कोरोना संक्रमण से बचाव में मददगार साबित हुई है। काला पीलिया यानी हेपेटाइटिस की दवा लेने वाले मरीजों को कोरोना वायरस संक्रमित नहीं कर पाया। संस्थान के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग और नेशनल वायरल हेपेटाइटिस सेंट्रल प्रोग्राम के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर में करीब 1500 मरीजों पर यह रिसर्च की गई है।


गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग प्रमुख और सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि इस रिसर्च के दौरान करीब पांच माह तक हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज कराने वालों में से 1500 मरीजों को चिह्नित कर मार्च से जुलाई महीने तक उनकी हेल्थ मॉनिटरिंग की गई। उनका दावा है कि हेपेटाइटिस  की दवा कोविड-19 से बचाव में कारगर है।  शोधकर्ताओं का दावा है कि हेपेटाइटिस की दवा लेने वाले 1500 मरीजों को न ही कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण नजर आए और न ही वे कोरोना संक्रमित हुए। डॉ. प्रवीण मल्होत्रा के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अगर इसका बड़े स्तर पर ट्रायल कराया जाए तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

बताया गया कि काला पीलिया के इलाज के लिए लेडिपसविर और डसाबूविर के साथ सोफासबूबिर का कॉम्बिनेशन दिया जाता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि कोरोना के मरीजों का इलाज करने के लिए यह कॉम्बिनेशन रेमेडेसिविर की तुलना में ज्यादा बेहतर है। खबरों के मुताबिक, कोरोना के मरीजों पर इसका ट्रायल करने की तैयारी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि रोहतक पीजीआई, इंटॉक्स प्राइवेट लिमिटेड और काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंस्ट्रीयल रिसर्च नेशनल केमिकल लेबोरेट्री के साथ मिलकर बड़े स्तर पर इसका ट्रायल करेगा। इसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी भारतीय औषधि महानियंत्रक को प्रस्ताव भेजा गया है।