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कविता ही पोस्टर है - अरुण काठोटे

कविता ही पोस्टर है - अरुण काठोटे


अरुण काठोटे एक दृष्टि संपन्न रंगकर्मी, कलाकार हैं। वे अपने रंगों और हृदय संयोजन से न केवल नाट्यों को स्टेज पर जीवंत बनाते हैं, बल्कि वे स्थिर चित्रों और रेखाओं को गतिशीलता प्रदान कर कविता को नया आयाम देते हैं। ऐसे दौरे में जब कलाकारों ने कविता, चित्र में रुचि नहीं ली। वहीं परिवर्तनकर्मी कलाकारों ने इस तरफ बहुत काम किया है। अरुण काठोटे ऐसे ही परिवर्तनकर्मी कलाकार हैं। वे विगत कई वर्षों से कविताओं को पोस्टर के माध्यम से व्यक्त करते हैं। 1980 के आसपास रायपुर के जयस्तंभ चौक के समीप प्रति सप्ताह 'कविता चौराहे ' पर शीर्षक से प्रदर्शित कविताओं का विस्तार पूरे देश में हुआ। अरुण काठोटे 'कविता ही पोस्टर है' के जरिये इस सिलसिले को जारी रखे हुए हैं।