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दर्द.ए.गौमाता : सड़क दुर्घटना में 300 से ज्यादा गायों ने जान गंवाई, गांव से शहर की सड़कों तक खतरे में गौमाता, पशु मालिकों पर कड़ी कार्यवाही की जरूरत,

दर्द.ए.गौमाता : सड़क दुर्घटना में 300 से ज्यादा गायों ने जान गंवाई, गांव से शहर की सड़कों तक खतरे में गौमाता, पशु मालिकों पर कड़ी कार्यवाही की जरूरत,
  • आशिका कुजूर

    रायपुर. प्रदेश में सरकार द्वारा लागू की गई चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना की चर्चा लगातार बनी हुई है। गावों में यह प्रोजेक्ट युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। गौठानों को 'गरुवा' कार्यक्रम के तहत बेहतर रूप से विकसित किया जा रहा है। लेकिन शहरों में इसके ठीक विपरीत दशा देखने को मिलती है। सड़कों पर मवेशियों का कब्ज़ा होने की वजह से आये दिन दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। शहरों की सड़कों में हर जगह मवेशी आवारा घूमते नज़र आते हैं। लगातार दुर्घटनाओं के शिकायत के बावजूद प्रशासन की ओर से इस परेशानी का समाधान होता नज़र नहीं आ रहा. अनुमान है कि पिछले तीन महीने में सड़क दुर्घटना में 300 से ज्यादा गायों ने अपनी जान गंवाई है.

    बात करें प्रदेश में घटित दुर्घटनाओं की तो महासमुंद जिले में  पिछले एक महीने में ही हुए एन एच 53 सड़क हादसे में 20 मवेशियों की मौत हुई। जानकारी के मुताबिक इन दुर्घटनाओं को अंजाम देने वाले की भी जानकारी नहीं है क्योकि ज्यादातर घटनाएं अज्ञात ट्रकों द्वारा हुई है। वहीँ धमतरी जिले के सड़क हादसों में 10 लोगों की मौतें हुई थी. कल रात अज्ञात वाहन ने बेमेतरा में 3 गायों को बेदर्दी से कुचल दिया जिसमें से 2 गायों की वहीं पर मृत्यु हो गई और एक गाय अभी तक तड़प रही है. इसकी मुख्य वजह है सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा होना. धमतरी कमिश्नर आशीष टिकरिहा ने घटना को देखते हुए कहा था कि प्रशासन सड़कों की व्यवस्था दुरुस्त करने में लगा है लेकिन इसके बावजूद वहां समस्याएं बनी हुई हैं।



आज से तीन दिन पहले ही धरसीवां रोड में कार पलटने से 8 गायों की मौत हुई है। कार का ड्राइवर नशे में था जिसकी वजह से यह हादसा हुआ था। बिलासपुर में मवेशियों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के बारें में तो पूरा प्रदेश ही जानता है जिसके लिए वहां की ट्रैफिक पुलिस ने सड़कों पर बैठने वाले मवेशियों के सींगों में रेडियम लगाना शुरू किया है ताकि रात में होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आ सके। अक्सर सड़क हादसे मवेशियों के बीच सड़क पर आने के चलते घटित हो चुके हैं। युवकों समेत अधेड़ आयु के लोग घायल होने समेत जान भी गंवा चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन को यह समस्या बड़ी नहीं जान पड़ रही। इस कारण यह कहने में कतई गुरेज नहीं है कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है।

वहीँ बालोद जिले में भी आर बी एस बस ड्राइवर ने सड़क पर बैठी गाय पर ही गाडी चढ़ा दी। और जब दुर्घटना के बाद पशु चिकित्सालय फ़ोन किया गया तो वहां से कोई भी नहीं आया। जिसके बाद वहां एक युवक के द्वारा गाय को अस्पताल पहुंचाया गया।

सीसीटीवी वाहन चालकों के लिए, गायों के लिए नही
वाहन चालकों पर नजर रखने के लिए तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी और सीसीटीवी कैमरे तक हैं, लेकिन आम लोगों के लिए खतरा बन रहे मवेशियों को सड़कों पर रोकने और वहां से हटाने कोई नहीं है। टू-व्हीलर चालक किसी मवेशी से टकराकर घायल हो जाए या उसकी मौत हो जाए इससे किसी को कोई फर्क नड़ी पड़ता। हादसे का कारण बने मवेशियों को सड़कों से दूर करने कोई कारगर कदम नहीं उठाए जाते। शहर के बीच मवेशियों के कारण जाम लगना अब आम बात है। इस समस्या का समाधान भी किसी के पास नहीं है, लेकिन लोग अगर जागरूक होकर काम करें तो, इसका हल भी निकल सकता है। यदि कोई वाहन चालक बीच सड़क में मवेशी को देखता है तो थोड़ा समय रूककर उसे वहां से हटा दें, तो शायद दूसरे वाहन चालकों को परेशानी नहीं होगी।

पशु मालिकों पर हो कार्रवाई
ऐसा नहीं है कि शहर की सड़कों पर लावारिस पशु ही घूम रहे हैं। हैरत की बात यह है कि शहर के आसपास बसे गांवों के चंद लोग भी अपने पालतू पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं। इससे उनके पशु सुबह से शाम तक सड़कों पर वाहन चालकों व अन्य आमजन की जान का खतरा बन घूमते रहते हैं। उनके मालिक देर शाम अपने पशुओं को साथ ले जाते हैं। यह किस्सा लगभग रोज का है। बारिश के मौसम में सैकड़ों की संख्या में आवारा पशु सड़कों पर डेरा डाल लेते हैं जिसके कारण आवागमन बाधित होति ही है साथ ही दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। आए दिन वाहन चालक पशुओं को बचाने के चक्कर में घायल हो रहे हैं। बारिश के दौरान जानवरों को मच्छर अधिक काटते हैं इन मच्छरों से बचने के लिए जानवर सड़कों पर बैठ जाते हैं जब पास से वाहन गुजरता है तो गुजरने वाले वाहन की हवा से मच्छर उड़ जाते हैं इस कारण बड़ी संख्या में आवारा मवेशी सड़कों पर जमा हो जाती है।

हरिशंकर परसाई ने कहा था कि बाकि देशों में गाय देने के लिए होती, और हमारे देश में गाय दंगा करने के लिए होती है। बात करें जशपुर जिले कि तो वहां महीने भर से गाय बैल का मुद्दा अब राजनैतिक मुद्दा बन गया है। कहीं गौ हत्या की वजह से धार्मिक मनमुटाव होता है, तो सांसद धरना प्रदर्शन में बैठ जाती हैं। तो कहीं मवेशियों कि वजह से फसल बर्बाद होने पर आपसी झगड़ा थाने पहुँच जाता है। और फिर उसे भी गौ तस्करी का मामला बता कर आरोप लगाया जाता है यह हिंदुत्व की भावनाओं को ठेस पंहुचा रहा है। राजनीतिक पार्टियां भी अपनी रोटियां सेकने के लिए मुद्दे को और बढ़ा देती हैं।

आवारा गायों की राजधानी बना रायपुर
अब बात हो राजधानी कि तो यहाँ किसी भी सड़क पर चलें जाएँ हर 200-300 मीटर की दूरी पर मवेशियों के दर्शन हो ही जायेंगे। रिंग रोड,शंकर नगर, पंडरी, कालीबाड़ी , जी इ रोड, गुढ़ियारी, खमतराई ,धमतरी रोड, विधान सभा रोड हो या नया रायपुर रोड, मवेशियों की तादाद बढ़ती जा रही है जिससे होने वाली सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं। इन सभी क्षेत्त्रों में हर वक़्त वाहनों की आवाजाही रहती है। जानकारी के अनुसार निगम ने जोन स्टार पर मवेशियों का सर्वे कराया जिससे यह बात सामने आई थी कि सभी आठों जोन के अन्तर्गत 70 वार्डों में लगभग 3900 मवेशी हैं जिनमे से लगभग 40 प्रतिशत मवेशियों के मालिक हैं और बाकि 60 प्रतिशत आवारा घूमते हैं। इनमे सांड भी शामिल हैं।

सड़कों पर भैंसे क्यों नही मिलती
जिस देश में गायों की पूजा की जाती है, गाय को माता का दर्जा दिया जाता है वहीँ गायों की इतनी उपेक्षा होना सोचने पर मजबूर कर देता है। गाय और भैंस में तुलना करें तो गाय का दूध ज्यादा पौस्टिक होता है और भैंस का दूध ज्यादा महंगा मिलता है।  इसके बावजूद सड़कों पर गाय दिखती है, भैंस नहीं। जब सड़क दुर्घटना में मवेशियों की मौत होती है तो हर कोई मालिक होने का दावा आपत्ति करने करने लगता है जिससे मुवावज़ा मिल सके। लेकिन वहीँ जब सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं की देख रेख करने की बात होती है तो लोग पशुधन के स्वामित्व से इंकार कर देते हैं। 
  
जहाँ पूरे प्रदेश में मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाएं बढ़ रही है तो वही प्रशासन ने चुप्पी साधी है। बात करें आकड़ों कि तो 67% सड़क दुर्घटनाएं सुबह 9 बजे से 9 बजे के बीच होती हैं। जिसमें 18-34 वर्ष के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं । 78% दुर्घटनाओं के लिए ड्राइवरों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, 3% दुर्घटनाएं नागरिक निकायों की उपेक्षा के कारण होती हैं। और अब इन सब के बीच मोटर विहिकल एक्ट में जुर्माने में हुई वृद्धि को लेकर लोगों में आक्रोश फूट रहा है। जहाँ सड़कों पर चलना तक सुरक्षित नहीं है वहां इतना ज्यादा जुर्माना भरने के लिए कोई तैयार नहीं होता है।  लोगों ने एक्ट का समर्थन तो किया है लेकिन जब चालान की गाज गिरती है तब गुस्से में आकर कभी पुलिस वाले को ही पीटने लग जाते हैं तो कभी गाडी को ही आग लगा देते हैं।

राजगढ़ कलेक्टर की अनोखी पहल, गाय को खुला छोड़ा तो होगी 6 महीने की जेल
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की कलेक्टर निधि निवेदिता ने गायों को लेकर एक अनोखी पहल की है. कलेक्टर निधि ने सड़कों पर घूम रही बेसहारा गायों और उनके कारण हो रही दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए  जिले की सीमा में धारा 144 लागू कर दी है. इसके तहत यदि कोई भी पशु मालिक अपने पशुओं को खुले में छोड़ता है, रास्तों पर छोड़ता है, या फिर यातायात बाधित करता है तो उनके खिलाफ धारा 144 के तहत 6 माह की सजा सुनाई जा सकती है.
आदेश में क्या है?
कोई भी व्यक्ति अपने मवेशी-गायों को सड़क पर खुला नहीं छोड़ेगा.
कोई भी पशुपालक अपने निजी पालतू पशुओं को सड़क पर नहीं छोड़ेगा.
पशुओं का अवैध रूप से परिवहन नहीं किया जाएगा.
पशु मालिक अपने पशु को चराते समय यातायात अवरूद्ध नहीं करेगा.
सार्वजनिक स्थल पर भी अपने पशुओं को नहीं छोड़ेगा.
अगर आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ धारा 188 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी.
इसमें 6 महीने की सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है.
इसका उलंग्घन करने पर लागू होने वाले अपराध –
किसी हाथी, ऊंट, घोड़े, आदि चाहे उसका कुछ भी मूल्य हो, या पचास रुपए या अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीवजन्तु का वध या विकलांग करने द्वारा कुचेष्टा। सजा - पांच वर्ष कारावास, या आर्थिक दण्ड, या दोनों। यह अपराध जमानती, संज्ञेय है तथा प्रथम श्रेणी के न्यायधीश द्वारा विचारणीय है। यह अपराध ढोर / जानवर के स्वामी द्वारा समझौता करने योग्य है।