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आज GST काउंसिल की बैठक, उद्योग जगत को रेट कट की उम्मीद, ऑटो सेक्टर पर नजर

आज GST काउंसिल की बैठक, उद्योग जगत को रेट कट की उम्मीद, ऑटो सेक्टर पर नजर

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था की सुस्त पड़ती रफ्तार के बीच आज गोवा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की अहम बैठक होने जा रही है. यह काउंसिल की 37वीं बैठक होगी और इसमें कई वस्तुओं पर रेट कट की उम्मीद इंडस्ट्री को है. इस बैठक में बिस्किट, माचिस और होटल इंडस्ट्री को राहत मिल सकती है, लेकिन ऑटो सेक्टर को राहत मिलना मुश्किल लग रहा है.
जीएसटी कटौती की मांग
इस जीएसटी काउंसिल की बैठक में ऑटोमोबाइल, बिस्किट, माचिस, आउटडोर कैटरिंग सेगमेंट के GST रेट में बदलाव की बात एजेंडे में रखी गई है. लेकिन कहा जा रहा है कि केवल होटल इंडस्ट्री को इस बैठक में राहत मिल सकती है. जबकि ऑटो इंडस्ट्री कारों पर लगने वाले 28 फीसदी जीएसटी को घटाकर 18 फीसदी करने की मांग कर रही है, इंडस्ट्री की इस मांग पर कई राज्य सरकारें ही सहमत नहीं दिख रही हैं. इसके अलावा तरह माचिस उद्योग को भी दो तरह की जीएसटी दरों से मुश्किलें हो रही हैं और काउंसिल राहत की उम्मीद है.
ऑटो सेक्टर को राहत की कम संभावना
जीएसटी काउंसिल की फिटमेंट कमेटी का मानना है कि ऑटो सेक्टर में रेट कटौती से GST कलेक्शन पर असर पड़ेगा. क्योंकि इस सेक्टर से सालाना 50 से 60 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन होता है. वहीं सूत्रों की मानें तो जीएसटी परिषद की समायोजन समिति राजस्व की कड़ी स्थिति का हवाला देते हुए बिस्कुट से लेकर कार उद्योग की जीएसटी में कटौती की मांग खारिज कर दी है.
होटल इंडस्ट्री को मिल सकती है राहत
हालांकि होटल इंडस्ट्री को जीएसटी में राहत मिल सकती है. अभी 7500 रुपये प्रति नाइट स्टे से ज्यादा चार्ज करने वाले लग्जरी होटल पर 28 फीसदी का जीएसटी लगता है. सूत्रों के मुताबिक टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी के आह्वान को देखते हुए 10 से 12 हजार रुपये प्रति नाइट स्टे तक चार्ज करने वाले होटलों के लिए जीएसटी रेट घटाकर 18 फीसदी किया जा सकता है. इसी तरह आउटडोर कैटरर्स पर अभी 18 फीसदी टैक्स लगता है, उन्हें भी राहत मिल सकती है.
उम्मीद से कम GST कलेक्शन
फिटमेंट समिति के मुताबिक अगस्त, 2019 में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 98,202 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 93,960 करोड़ की तुलना में 4.51 प्रतिशत अधिक था. यह जीएसटी संग्रह स्तर हालांकि साल-दर-साल आधार पर अधिक था, फिर भी सरकार की उम्मीद के मुताबिक एक लाख करोड़ रुपये से कम था.