कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः आगे राम-नाम चलत...

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः आगे राम-नाम चलत...


शब्द-घन छाये


नाम-नीर की बूँद झरी

हम रूप-रंग रस पाये

शब्द-घन छाये


नाम-नदी में रंग बरसे

हम तन-मन खूब रँगाये

शब्द-घन छाये


नाम-नेह की देह धरे

पुलकित लोचन भर आये

शब्द-घन छाये


अँसुवा झर-झर गगन उड़े

बादल बन फिर गहराये

शब्द-घन छाये



नाम-रूप रंग राम रँगे

ध्रुव राम-नाम गुन गाये

शब्द-घन छाये


आगे राम-नाम चलत...


आगे राम-नाम चलत पीछे रघुरैया


अगुनन में सगुन सगुन

सगुनन में अगुन अगुन

करमन में करुन करुन

रमत हैं रमैया


साँसन में गान-तान

बातन में भाव-भान

नरतन में एक प्रान

नाच के नचैया


भुवनन को धारे राम

ध्रुवनन को तारे राम

तन-मन-धन वारे राम

मनन के हरैया