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Kanker_Hospital : विधायकों के रिश्तेदारों की कमीशनखोरी से दवा खरीदी में भारी भ्रष्टाचार, कांकेर के सरकारी अस्पताल में भ्रष्टाचार चरम पर

Kanker_Hospital : विधायकों के रिश्तेदारों की कमीशनखोरी से दवा खरीदी में भारी भ्रष्टाचार, कांकेर के सरकारी अस्पताल में भ्रष्टाचार चरम पर

रायपुर. शासन की मंशानुरूप आगामी तीन सालों में प्रदेश को कुपोषण, एनीमिया मुक्त बनाये जाने को लेकर युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं साथ ही साथ प्रत्येक शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को त्वरित, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले, इसके लिये जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में और अधिक सुविधाएं बढ़ाने कार्य किये जा रहे हैं परंतु उत्तर बस्तर कांकेर में ठीक इसके विपरीत कार्य हो रहा है जहां चिकित्सक, एएनएम, नर्स की पदस्थापना जनचर्चा का विषय बनी हुई है वहीं शासन से प्राप्त होने वाली विभिन्न मदों की राशि यहां तक जीवनदीप समिति के माध्यम से भी जो निर्माण कार्य एवं खरीदी की गई है, उसमें भी लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं और यह सब कुछ राजनीतिक संरक्षण के चलते बेलगाम हुए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किया जा रहा है।
  
उत्तर बस्तर कांकेर एवं धमतरी जिले की सीमाओं के लगे रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ चिकित्सक, एएनएम, नर्स को ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से बुलाकर शहरी स्तर पर पदस्थ कर दिया गया है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कांकेर से दिया जा सकता है जहां संविदा वालों को रखने का प्रावधान है परंतु संविदा वालों को यहां न रखकर नियमित चिकित्सक, एएनएम, नर्सों को यहां पदस्थ कर दिया गया है। यहां पदस्थ नर्सों के वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर नर्स को टीकाकरण का प्रभार दिया गया है।

यही नहीं पिछले दिनों उत्तर बस्तर कांकेर में नर्स इत्यादि की भर्ती भी की जा रही है जिसमें भारी शिकायतें प्राप्त हो रही है। इसे लेकर उत्तर बस्तर कांकेर के अंतर्गत एक-दो शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। राजनीतिक एप्रोच के चलते यहां जो नियम विरूद्ध कार्य हो रहे हैं उसे लेकर उसकी गूंज धमतरी में भी सुनाई देती है। खबर है कि राजनीतिक एप्रोच के चलते दो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इस वजह से तमाम शिकायतों को दरकिनार कर जैसा नियमानुसार होना चाहिये, वैसा कार्य नहीं हो पा रहा है।
  
शासन द्वारा 2 अक्टूबर से प्रदेश के जिलों में त्वरित उपचार वेन की घोषणा की गई और उसे अमलीजामा पहनाया गया लेकिन उत्तर बस्तर कांकेर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक, एएनएम, नर्स को इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से बुलाकर शहरी स्तर पर दायित्व सौंप दिया गया है जिसके कारण दूरदराज में रहने वाले ग्रामीणों को त्वरित उपचार एवं शासन द्वारा मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से उन्हें वंचित होना पड़ रहा है जिसके कारण भीतरी क्षेत्र में निवासरत लोग मजबूर होकर धमतरी जिले के निजी नर्सिंग होम में आकर अपना ईलाज कराते हैं। इन सभी त्रुटियों को देखने का दायित्व निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों को है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारी की वजह से अधिकारी बेलगाम होकर उपरोक्त त्रुटियों को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते। इसी तरह शासन द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निर्माण कार्यों एवं स्वास्थ्य सुविधा मजबूत बनाये जाने को लेकर जो खरीदी की जा रही है उसमें बिल अधिक का बनाकर कम राशि में वस्तुएं खरीदे जाने का भी सनसनीखेज मामला सामने आया है।
  
मिली जानकारी के अनुसार यह भी पता चला है कि निर्माण कार्यों एवं खरीदी किये गये व्हाऊचर, बिलों के लिये एक नर्स को अधिकृत कर रखा गया है जिसके द्वारा उक्त तमाम बिलों में हस्ताक्षर किया जाता है। उसके एवज में यह नर्स भी कमीशन लेकर वह सब बिलों में हस्ताक्षर करती है। इसी तरह वरिष्ठ कार्यालय में पदस्थ तीन बाबू की तिकड़ी ऐसे बिलों में मिलने वाले कमीशन को आपस में बांट लेते हैं जिसके कारण कम लागत में निर्माणाधीन कार्य एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिये खरीदी गई विभिन्न वस्तुएं आम लोगों को लाभ पहुंचाने में नाकाम साबित हो रही है।

पीएचसी, सीएचसी में जब भी कोई जिला के अंदर आते हैं, वहां कुछ सामान खरीदने के लिये या जिस बिल्डिंग, भवन के लिये या स्वास्थ्य सुविधा देने के लिये पैसा आता है, वह बंदरबांट की तरह आपस में वितरित हो जाता है। इसे लेकर यदि इसकी सूक्ष्म जांच की जाती है तो उत्तर बस्तर कांकेर में व्याप्त लापरवाही पूरी तरह उजागर होगी। इसी जिले में पदस्थ एक चिकित्सक जो गांव में पदस्थ है, वह पिछले तीन साल से उक्त ग्राम में जाकर ड्यूटी नहीं करती है और पूरा तनख्वाह प्राप्त करती है जिसकी शिकायत भी पता चली है।

इस मामले को लेकर जब निर्वाचित जनप्रतिनिधि के पास कोई शिकायतकर्ता पहुंचता है तो उसकी उक्त शिकायत को दबा दिया जाता है। ऐसे लोगों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री से उत्तर बस्तर कांकेर में चल रही भर्राशाही के जांच की मांग की है। उल्लेखनीय रहे कि भानुप्रतापपुर सामुदायिक सेवा केंद्र में पिछले एक वर्ष से आपातकालीन सेवा में डॉक्टरों की उपस्थिति नहीं होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण ग्राम शालेय के कुछ ग्रामीण एक युवक को 108 वाहन की सहायता से भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां उसे आपातकालीन सेवा में रखा तो गया परंतु डॉक्टर घंटों बाद नहीं पहुंचे।