breaking news New

थिएटर सबसे बड़ी चुनौती है पर यही हमें जीने की कला भी सिखाती है- सुभाष मिश्र

थिएटर सबसे बड़ी चुनौती है पर यही हमें जीने की कला भी सिखाती है- सुभाष मिश्र

   नवीन कन्या महाविद्यालय द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सात दिवसीय कार्यशाला 

रायपुर, 14 सितंबर। डॉक्टर राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय मठपारा रायपुर साहित्य समिति द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी के प्रमुख नाटक, समीक्षा एवं अभिनय शीर्षक पर सात दिवसीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि श्री सुभाष मिश्र छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी के अध्यक्ष एवं रंग रचना की रचनाकार श्रीमती रचना मिश्र ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों का सम्मान भी किया गया। तदुपरांत नाटककार भारतेंदु हरिश्चंद्र की सर्वाधिक लोकप्रिय मौलिक नाटक अंधेर नगरी की समीक्षा और शानदार प्रस्तुति बीएससी अंतिम वर्ष की छात्राओं ने दी. इन छात्राओं के ग्रुप का नाम भारतेंदु हरिश्चंद्र था जिसके प्रतिभागी- कृति उपाध्याय, प्रतीक्षा शर्मा, योगिता देवांगन, पूनम यादव, वंदना पटेल होमेश्वरी, खुशबू, झरना सोनकर, दिव्या भारती एवं प्रिया खटवानी थे. 

कार्यक्रम की संयोजक डॉक्टर गौरी अग्रवाल (हिंदी विभाग) ने कहा कि 6 अंकों में विभाजित यह बेजोड़ रचना विवेकहीन एवं निरंकुश शासन व्यवस्था पर तीखा प्रहार करती है. प्रभारी प्राचार्य डॉ विनोद कुमार जोशी ने कहा कि ऐसी कायर्शाला से छात्राओं की प्रतिभा हमारे सामने आती है और उनका हुनर बोलता है. कायर्शाला में 70 प्रतिभागी उपस्थित थे. 

मुख्य अतिथि श्री सुभाष मिश्रा जी ने कहा कि नाटक हमारे जीवन को गहरी रूप से प्रभावित करती है आज की युवा पीढ़ी ड्राइंग रूम में रिमोट के इशारे पर टीवी सिनेमा इंटरनेट पर अपने जीवन की तलाश में राह भटक गई है उसे थिएटर के माध्यम से सही मार्ग दिखाना आज सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने युवा पीढ़ी को आह्वान करते हुए कहा की यद्यपि थिएटर सबसे बड़ी चुनौती है पर यही हमें जीने की कला भी सिखाती है. यहां जाति धर्म वर्ग वर्ण ऊंच-नीच का भेदभाव समाप्त हो जाता है और केवल रह जाता है रिश्ता इंसानियत का जिसकी आवश्यकता आज परिवार समाज और देश को है. 

श्री सुभाष मिश्र एवं रचना मिश्र ने छात्राओं से नाटक के विषय में चर्चा की। उनसे सवाल-जवाब भी किए। छात्राओं को नाटक के पात्र आदि के बारे में बताया। इस अवसर पर श्री सुभाष मिश्र ने कहा- भारतेंदु हरिश्चंद्र की लोकप्रिय नाटक अंधेर नगरी आज भी सामयिक है। ये निर्देशक के ऊपर निर्भर करता है कि वे नाटक को आज के समय के साथ किस तरह से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक एक सामूहिक कला है- इसमें सबको साथ होना पड़ता है, इसमें कोई बड़ा-छोटा नहीं होता है। नाटक में सबको अपने स्क्रिप्ट याद रखने होते हैं, भूमिका याद रखनी होती, कब किसको आना  है, और जाना है ये याद रखना पड़ता है। उन्होंने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी आने वाले समय में जनमंच पर कॉलेज प्रतियोगिता कराएगी। इसमें कॉलेजों को आमंत्रित किया जाएगा कि वे इसमें सम्मिलित होकर नाट्य प्रस्तुति दें। मुख्यअतिथि ने छात्राओं को 10 नाटक की स्क्रिप्ट भी दी, और  कहा कि ये नाटक आप कर सकते हैं। अगर इसमें आपको गाइडेन्स की जरूरत होगी तो हम आपकी मदद करेंगे। 

स्वर की साधक ने शास्त्रीय राग में जगत जननी शारदे गाकर दर्शक दीर्घा को मंत्र मुग्ध कर दिया. समिति के सदस्य डॉक्टर रूपा सलहोत्रा डॉक्टर ज्योति मिश्रा एवं प्राध्यापक अतुल द्विवेदी का अभूतपूर्व योगदान रहा.