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कड़कनाथ मुर्गा पालन में 5 लाख से ज्यादा का भ्रष्टाचार, दाना सप्लाई का पैसा डकार गए अधिकारी, आदिवासी बाजार से खरीदकर पाल रहे कड़कनाथ को

कड़कनाथ मुर्गा पालन में 5 लाख से ज्यादा का भ्रष्टाचार, दाना सप्लाई का पैसा डकार गए अधिकारी, आदिवासी बाजार से खरीदकर पाल रहे कड़कनाथ को

मुकेश श्रीवास

दन्तेवाड़ा. कड़कनाथ मुर्गा पालन में 5 लाख से ज्यादा का भ्रष्टाचार सामने आया है. आदिवासी हितग्राहियों ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों पर कुक्कुट पालन हेतु दिए जाने वाले दाने का पैसा डकारने का आरोप लगाया है.

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार आदिवासी हितग्राहियों को शासकीय योजना (डीएमएफ मद )से प्रत्येक हितग्राही को 5 लाख 60 हजार की स्वीकृति दी गई थी जिसमे 1000 चूजे तथा लगभग 197 बैग कुटकुट आहार समलित था जिसे 69 बैग के अनुपात में तीन किश्तों में हितग्राही को देना था जिसमे 330 चूजे भी प्रति किश्त में साथ में दिए जाने थे. इन चूजों को पालने के लिए व्यवस्था करने का प्रावधान भी योजना में था.


आदिवासी हितग्राहीयो ने आरोप लगाया है कि उन्हें निर्धारित आहार से आधा दाना ही पशु विभाग से दिया गया जोकि 50 हजार से ऊपर का प्रत्येक कड़कनाथ कुटकुट पालन केंद्र का था. आदिवासी हितग्राही आरोप लगा रहे हैं कि उनका दाना विभाग के चालाक अधिकारी खा गये क्योकि डीएमएफ मद से 5 लाख 60 हजार की स्वीकृति थी, उसकी राशि उप संचालक पशु विभाग को मिल चुकी  है लेकिन आदिवासी हितग्राही को दाना कभी तक नही मिला. दाने के भाव में हम मजबूरन बाजारों से महंगे दाने से कुटकुट पालन करने को बाध्य हुए.

हितग्राहियों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि प्रत्येक हितग्राही के हक का दाना उन्हें योजना के तहत लगभग 2,87 620 रुपये का कुटकुट आहार तीन चरणों मे मिलना था. उसमें हमे पहले चरण में ही 69 बैग की जगह केवल 30 से 35 बैग कुटकुट आहार दिया गया, वो भी उपसंचालक कार्यालय के चक्कर पर चक्कर लगाने के बाद. अत: शासन को गंभीरता के साथ दन्तेवाड़ा जिले के देशव्यापी चर्चित कड़कनाथ मुर्गी पालन योजना की तह तक जाना चाहिए ताकि भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसी जा सके तथा इस पर एक जांच समिति बैठाने की मांग की गई है. ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सकते तथा आदिवासियों के साथ न्याय.