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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -कोरोना की वैक्सीन कोई ओलंपिक की दौड़ नहीं

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -कोरोना की वैक्सीन कोई ओलंपिक की दौड़ नहीं


इलाज की दुनिया के अपने नियम कायदे होते हैं। इनमें जऱा सी भी हड़बड़ी से बड़ी गड़बड़ी हो सकती है। कोई भी डॉक्टर को आपने ये कहते नहीं सुना होगा कि हमने अपने अस्पताल में हार्ट अटैक को सबसे पहले ठीक कर दिया। हार्ट अटैक के इलाज के अपने प्रोटोकोल होते हैं जैसे 72 घण्टे की सघन देखरेख, मरीज की हालत, उसके शरीर द्वारा दवाओं की प्रतिक्रिया आदि। इसी तरह का अनुशासन अन्य बीमरियों के उपचार के दौरान भी अपनाया जाता है।
कहने का मतलब यह है कि कोरोना का टीकाकरण भी कोई सरकारी योजना नहीं है बल्कि मर्ज के इलाज का हिस्सा है। इसलिए इस अभियान में दो देशों के आंकड़े या दुनिया में अव्वल रहने की चाहत रखना बड़ा ही घातक कदम है। मीडिया के कुछ अति उत्साही लोग कोरोना के टीकाकरण में भारत को अग्रणी बता रहे हैं। कहा गया कि 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि दुनिया में लगभग 60 देश ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या 3 करोड़ से कम है। इस तरह कि ये बेतुकी तुलना क्यों की जा रही है। हमें अपने देश का 132 करोड़ की आबादी को टीका लगाना है जबकि अभी केवल 3 लाख से अधिक टीके लगे हैं वो भी स्वास्थ्य कर्मियों को। टीकाकरण में दो देशों का तुलनात्मक अध्ययन करना ही है तो बराबर की जनसंख्या वाले देशों से करना होगा। निसन्देह बड़ी जनसंख्या के टीकाकरण में भारत को अनुभवी और सफल देशों में जाना जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं से लेकर शिशुओं के 9 माह के सतत टीकाकरण अभियान का नियमित नेटवर्क हमारे यहां स्थापित है। पल्स पोलियो जैसे महाटीकाकरण अभियान को हमने सफल बनाया है। लेकिन कहीं कोरोना के टीकाकरण में विश्वगुरु बनने के चक्कर में हम प्रक्रिया, सुरक्षा और प्रोटोकॉल में चूक न कर जाएं। मान्यवर, ये दवाई और सुरक्षा का अभियान है, कोई इवेंट नहीं, और इसे इवेंट बनाने की कोशिश से बचिए जनाब।
करोना वायरस से बचाव के लिए इस बीच सोमवार 16 जनवरी से शुरू हुए देशव्यापी कोरोना वैक्सीन टीकाकरण को लेकर फ्रंट लाईन कार्यकर्ताओं में जिस तरह का उत्साह होना चाहिए, वह दिखाई नहीं दे रहा है, लोग वैक्सीन को लेकर अनावश्यक बात कर रहे हैं। अभी तक प्रथम दौर में 25 राज्यों के 381305 लोगों को टीका लगा है। कुल तीन करोड़ लोगों को टीका लगना है। अभी तक तय संख्या का 56.96 फीसदी लोगों ने ही टीका लगवाया है। लोग टीके को लेकर अनावश्यक डरे हुए हैं या भयाक्रांत है। हमारे देश के नेताओं, सेलिब्रिटी को विदेशी नेताओं की तरह आगे आकर पहले टीके लगवाना चाहिए।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडन, बेंजामिन नेतन्याहू और जोको विडोडो तक, दुनियाभर के नेता आगे बढ़ कर कोविड का टीका लगवा रहे हैं, पर भारतीय नेता इस मुहीम में शामिल नहीं हुए। यहां तक की सेलिब्रिटीज़ भी वैक्सीन लगाते नजर नहीं आ रहे। दोनों को आगे बढ़ कर टीका लगवाना चाहिए ताकि इससे जनता का विश्वास बढ़े।
इसी बीच भारत बायोटेक ने एक चेतावनी जारी कर किन्हे टीका लगाना चाहिए, किन्ह नहीं यह बताया है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक कोविड टीके को लेकर लोगों को आगाह किया है। भारत बायोटेक ने कहा कि अगर किसी की इम्यूनिटी कमजोर है या पहले से कोई गंभीर बीमारी की दवाएं ले रहे हैं, तो ऐसे लोग फिलहाल कोविड कोवैक्सीन न लगवाएं। भारत बायोटेक ने एक फैक्टशीट जारी कर बताया है कि किन लोगों को कोवैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए।
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग कोवैक्सीन न लगवाएं, किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं लोग, गंभीर बीमारियों की दवाओं के सेवन करने वाले लोग ,    एलर्जी, बुखार, ब्लीडिंग डिसऑर्डर से ग्रसित लोग, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी वर्जित, जिन्होंने कोई दूसरी वैक्सीन ली हो।
भारत बायोटेक ने फैक्टशीट के माध्यम से ऐसे लोगों को कोवैक्सीन का टीका नहीं लगवाने की सलाह दी है, जिन्हें कुछ समय से एलर्जी, बुखार, ब्लीडिंग डिसऑर्डर की शिकायत रही हो, साथ ही जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या दवाई ले रहे हैं या फिर जिसका प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर हो सकता है। कोवैक्सीन का टीका गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी वर्जित है।
टीकाकरण को लेकर अलगृ-अलग भ्रांति, डर के महौल के बीच कोरोना टीकाकरण के पहले दिन 1.65 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन लगी। देशभर में शनिवार को 3,351 सत्र स्थलों पर 1.65 लाख से अधिक लाभार्थियों का कोविड-19 टीकाकरण किया गया और अब तक टीका लगाये जाने के बाद किसी को अस्पताल में भर्ती किये जाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कुल 3,351 सत्र आयोजित किये गये जहां 1,65,714 लोगों को टीका लगाया गया। टीकाकरण सत्रों को आयोजित करने में 16,755 कर्मी शामिल थे। जिन 11 राज्यों और केंद्रशासित में कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों टीके लगाये गये वे असम, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश हैं। इसी तरह आर्म्ड फोर्स के करीब 3500 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों जिनमें 3,129 सेना से थे, उन्हें टीकाकरण अभियान के पहले दिन वैक्सीन लगाई गई।
वैक्सीन डिप्लोमेसी के तहत भारत सद्भावना के तौर पर पड़ोसी देशों को नि:शुल्क कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराएगा। जिस चीन के वुहान से यह वायरस फैला है, वह वैक्सीन खरीदने दूसरे देशों को लोन देने की बात कह रहा है। चीन की इस हरकत को देखकर कहना पड़ रहा है कि तुम्हीं ने दर्द दिया है, तुम्ही दवा देना।
कोरोना ने कम समय में जितनी चर्चित और हर जुबां पर सुना जाने वाला नाम हो गया है, शायद ही कोई इससे दूसरा हो। पहले लोग कोरोना के बारे में ठीक से जानते भी नहीं थे, लेकिन आज इस बारे में लगभग सभी को पता है। यह अपने आप में इतिहास ही है कि इतनी जल्दी किसी रोग के टीके का न केवल निर्माण हुआ है, बल्कि वह देश के लगभग हर जिले में पहुंच भी गया है। पहले चरण में टीके का खर्च पूरी तरह से केंद्र सरकार उठा रही है, तो कोई आश्चर्य नहीं। अभी भी कुछ विपक्षी पार्टियों के नेताओं को टीके की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं हो रहा है। इस अभियान को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा भी करना है। इस चरण में रह जाने वाली त्रुटियों से सीखना चाहिए। रिकॉर्ड समय में कोरोना वैक्सीन तैयार हुई हैं, इसलिए किसी-किसी पर उनके दुष्प्रभाव दिखाई पड़ सकते हैं। इतिहास गवाह है, ज्यादातर टीकों के निर्माण में दशकों लगे हैं, लेकिन कोरोना ने हमें उतना समय नहीं दिया। किसी पर कोरोना का बहुत घातक असर होता है और किसी पर बहुत मामूली। टीका लेने के तत्काल बाद ही नहीं, बल्कि उसके प्रभाव के पुष्ट होने तक हर एक टीका प्राप्त व्यक्ति की खबर या निगरानी जरूरी है।
 यह इसलिए भी जरुरी है कि कोरोनावायरस का टीका लगवाने के एक दिन बाद यहां 46 वर्षीय स्वास्थ्यकर्मी की मौत हो गई। शव परीक्षण रिपोर्ट में मौत का कारण 'ह्रदय और फेफड़ों संबंधी रोगÓ बताया गया है। परिवार का आरोप है कि उनकी मौत टीकाकरण के कारण हुई तथा उन्हें बुखार एवं खासी के अलावा स्वास्थ्य संबंधी और कोई परेशानी नहीं थी।
कोरोना वैक्सीन था इंजेक्शन आने के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सक, सफाईकर्मियों, स्वास्थ कार्याकर्ताओं को सबसे पहले टीकाकरण को लेकर समाज में व्याप्त भय, भ्रांति और बयानबाजियों के चलते रायपुर के एम्स में 100 में से 40, मेडीकल कालेज में 100 में से 62 और जिला चिकित्सालय में 100 में से 45 लोग टीकाकरण के लिए आयें। टीकाकरण के लिए 9278 स्वास्थ कर्तियों का पंजीयन किया गया जिसमें से 3998 लोग अनुपस्थित रहें। जों रिस्पोन्स टिकाकरण को मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल रहा है। इस संबंध में सरकार को चाहिए की वह नयें सिरे से जनजागरण करें और जो लोग स्वैच्छिक तरह से आगे आकर टीका लगवाने तैयार है उन्हे टीका लगाना चाहिए। चूंकि हमारे देश की अबादी इतनी अधिक है की यदि हमने पहले चरण में ही इस पर ध्यान नहीं दिया तो यह हमारी बाकी योजनाओं की तरह ही शत-प्रतिशत लक्ष्य से दूर न रह जायें। जिस तरह पोलियों टीकाकरण को लेकर अभियान चलाया गया था, उसी तरह के अभियान की जरूरत कोरेना टीकाकरण के लिए है।