प्रधान संपादक सुभाष मिश्र बता रहे हैं कि -भूपेश सरकार का सही समय पर सही निर्णय

 प्रधान संपादक सुभाष मिश्र बता रहे हैं कि -भूपेश सरकार का सही समय पर सही निर्णय

कोरोना संक्रमणकाल में सही समय पर सही निर्णय लेकर अपने राज्य छत्तीसगढ़ को कोरोना से बहुत हद तक बचाने वाले मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल हमेशा याद किये जाएंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी युवावस्था से ही बहुत तेज तर्रार और आक्रमक छवि वाले नेता के रूप में  जाने जाते हैं। वे एक योद्धा की तरह हर मुसीबत, संघर्ष के समय डटे रहते हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति में कभी कांग्रेस का गढ़ समझे जाने वाले छत्तीसगढ़ में 2003 के बाद से कांग्रेस सत्ता में बाहर थी, जो भूपेश बघेल के नेतृत्व में अप्रत्याशित बहुमत से वापस आई। हमेशा केंद्र से लडऩे की मूढ़ में दिखाई देने वाले भूपेश बघेल ने कोरोना काल में जो समझदारी दिखाई, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जो सुझाव दिये, जिन्हें बाद में केंद्र सरकार ने लागू किये , ऐसी बातों से भूपेश बघेल  की एक नई छवि सामने आई । सही समय सही निर्णय लेने वाले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सुझबूझ और निर्णय क्षमता के कारण ही आज छत्तीसगढ़ कोरोना संक्रमण के मामले में बाकी राज्यों की तुलना में सुरक्षित है। जनता से सीधे जुड़कर उनकी प्रतिक्रिया, हालात जानकर निर्णय लेने वाले भूपेश बघेल  ने केंद्र के आदेश से तीन-चार दिन पहले ही छत्तीसगढ़ की सीमाओं को सील करके अपने राज्य में वो सारे जरूरी कदम उठा लिये थे जिसकी वजह से आज उनकी प्रशंसा हो रही है। उन्होंने केंद्र से किसी प्रकार का टकराव करने के बजाय वहां से जारी गाईड लाइन का पालन किया।

वैश्विक बीमारी कोविड 19 से निपटने के लिये अलग-अलग देशों, राज्यों और जिलों से लेकर ग्राम स्तर पर बनाई गई रणनीति और लिये गये फैसलों के परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है। जब भारत के बहुत से राज्य कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव से अपने को बचा नहीं पा रहे हैं और नागरिक सुविधाओं और जनजीवन को लेकर भारी असंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है, ऐसे में देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में से छत्तीसगढ़ वह राज्य है जिसने अपनी नीति निर्णय और कार्यों से कोरोना का पैनिक नहीं होने दिया। जब देश को तबलिगी जमात के नाम पर डराया जा रहा था, तब भी छत्तीसगढ़ शांत था। जब देश में गौमाता के नाम पर मॉब लिंचिंग की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा था, तब भी छत्तीसगढ़ शांत था। नागरिकता बिल पर साफ़ रूख रखने वाले छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री कांग्रेस मुख्यमंत्रियों में अपनी अलग इमेज रखते हैं ।छत्तीसगढ़ के नागरिक और यहां की सरकार अपने सबले बढिय़ा छत्तीसगढिय़ा स्वभाव के अनुरूप शांत भाव से ऐसे काम कर रही थी, जो बताते हैं कि यहां के लोग यहां की सरकार की प्राथमिकता जमीनी हकीकत को देख समझकर ऐसे कदम उठाने की है जिससे हमारा अमन चैन भाईचारा बना रहे। छत्तीसगढ़ में ना तो हड़बड़ाकर कोई निर्णय लिया गया ना ही बेफिजुल  की तालाबंदी ही की गई। जहां जरूरी था, वहां सख्ती बरती गई। जहां जरूरी नहीं था वहां जीवन को समान्य गति से चलने दिया गया। खेतीबाड़ी का काम हो या मनरेगा की मजदूरी, ये सभी तालाबंदी के दौरान भी जारी रहे। अपने राज्य में किसी को भूखा नहीं सोने देंगे के संकल्प के चलते छत्तीसगढ़ के 56 लाख परिवारों को दो महीने का राशन नि:शुल्क दिया गया। जिनके पास राशन कार्ड नहीं थे, उन्हें भी एक माह का राशन दिया गया। 20 लाख से अधिक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए 5750 करोड़ की नगद राशि की पहली किस्त दी गई। मुख्यमंत्री द्वारा राज्य आपदा प्रबधन प्राधिकरण की बैठक बुलाकर तत्काल ऐसे निर्णय लिये गये जिससे राज्य में कोरोना के संक्रमण को रोका जा सके। 15 मार्च को लंदन से लौटी एक युवती में कोरोना के लक्षण पाये जाने के बाद से ही पूरे राज्य में सतर्कता के उपाय किये गये। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में 19 मार्च 2020 से धारा 144 लागू कर दी गई। सरकार ने स्कूल-कालेज, विश्वविद्यालय को ऐतिहायत के तौर पर बंद कर गिया। साथ ही सरकारी और अद्र्ध सरकारी संस्थानों को भी बंद कर दिया गया। संक्रमित क्षेत्र को  कंटेनटमेंट  जोन घोषित करके पूरी तरह प्रतिबंधित कर सेनेटाईज करने की कार्यवाही की गई। रायपुर के एम्स अस्पताल को कोविड 19 के उपचार का केंद्र बनाकर उपचार और परीक्षण की माकूल व्यवस्था की गई। एम्स के निर्देशक डॉ. नितीन नागरकर की देखरेख में यहां के चिकित्सकों और स्टाफ ने बहुत ही बढिय़ा काम किया। एम्स में भर्ती सभी मरीज यहां से स्वस्थ होकर अपने घरों को लौटे।

जब कोरोना ने देश में दस्तक दी तभी से छत्तीसगढ़ में इसकी रोकथाम के उपाय होने लगे। 27 जनवरी को सभी जिलों में रैपिड रिस्पांस टीम गठित कर 26 जनवरी से एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग प्रारंभ कर दी गई। देश के सबसे पहले राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ ने 21 मार्च से ही सभी राज्यों को छूने वाली अपनी सीमाओं को सील कर दिया। सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये छत्तीसगढ़ में चैत्र नवरात्रि को होने वाला डोंगरगढञ मां बम्लेश्वरी देवी का मेला भी रोक दिया। नागरिकों में कोरोना को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं फैले इस बात को देखते हुए छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने 8 मार्च से रोज शाम बुलेटिन प्रसारित किया। नोवेल कोरोना वायरस कोविड 19 के संक्रमण कोरोना ने मुख्यमंत्री सहायता कोष से 24 करोड़ 50 लाख रुपये दिये गये। रायपुर एम्स के अलावा जगदलपुर, बिलासपुर, रायगढ़ में भी कोरोना जांच लैब, स्थापित करने की कार्यवाही की गई। रायपुर विमान तल के पास माना में 60 बिस्तरों का आइसोलेशन अस्पताल की व्यवस्था कर वहां 70 प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ को रखा गया। सरकारी अमले के अलावा अन्य लोगों की संभावित आवश्यकता को देखते हुये नागरिकों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों को चिन्हित कर कोरोना वाल्टिंयर्स बनाये। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाईड आदि का डाटा बेस तैयार कर उनकी सेवाएं भी कोरोना वालंटियर्स के रूप में ली गई । 

श्रम कानून का कड़ाई से पालन करवाते हुये और मानवीयता के नाम पर उद्योग समूहों से, निजी संस्थानों, कारखानों, अस्पताल, मॉल, रेस्टारेंट आदि के नियोजकों से अपने श्रमिकों, स्टाफ की छटनी नहीं करने और जरूरत पडऩे पर सार्वजनिक अवकाश देने कहा गया। प्रवासी मजदूरों के गांव में आने से कोरोना का संक्रमण नहीं फैंले इस बात को लेकर पंचायतों को सक्रिय कर गांव-गांव में मुनादी कराई गई। ग्राम सचिव और मितानीन को सावधान करने की जवाबदेही सौंपी गई।

छत्तीसगढ़ में कोरोना काल खंड में प्रारंभ से ही सरकार ने लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान होने से बचाया। सब्जी बाजार से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें लोगों को आसानी से उपलब्ध हुई कोरोना के शुरुआती दो महीनों में छत्तीसगढ़ का ग्रामीण जनजीवन इससे पूरी तरह अछूता रहा और वहां खेती बाड़ी के सभी काम बाकी दिनों की तरह जारी रहे। सही समय पर सरकारी दफ्तरों को बंद करने का निर्णय लिए जाने से सरकारी कर्मचारी अपने आपको सुरक्षित महसूस करते रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी आंगनबाड़ी कार्यकताओं ने घर-घर जाकर रेडी टू ईट बांटा। स्कूल शिक्षा विभाग ने आन लाईन पढ़ाई के लिये शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को अच्छी तरह से प्रोत्साहित करके प्रायवेट स्कूलों को फीस वसूलने से रोका। कोचिंग के लिये कोटा गये बच्चों को सुरक्षित लाकर क्वारंटीन केंद्र में रखाकर माता-पिता को सौंपा गया। ऐसे प्रवासी मजदूर से बाहर से आ रहे थे या बाहर के थे, उन्हें हरसंभव मदद की गई। 53 ट्रेनों के माध्यम से 71,712 श्रमिकों को सुरक्षित भेजा गया। छत्तीसगढ़ के 2 लाख 31 हजार श्रमिकों को श्रमिक ट्रेनों के जरिये वापस बुलाया गया। सरकारी अमले के अलावा स्वयं सेवी संगठनों ने भी इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार ने घरेलू बिजली दर में कोई परिवर्तन नहीं किया साथ ही अस्पतालों, राईसमिलों को ऊजा प्रभार में छूट दी। छत्तीसगढ़ में कृषि और उससे संबंधित कार्यों के लिये रिजर्व बैंक से मिली सराहना को बरकरार रखते हुये अप्रैल महीने में 1 करोड़ 23 लाख मानव दिवसों का सृजन मनरेगा में किया। अकेले अप्रैल में मनरेगा के नये पुराने कार्यों के लिये 548 करोड़ 41 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान करते हुये सामग्री क्रय के लिये 210 करोड़ रुपये का राशि जारी की। बाजार में लिक्वडिरी बनी रहे, मजदूर की क्रय राशि कम न हो इस बात का छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष ध्यान रखा है। इसके विपरीत राज्य की सीमाओं पर स्पष्ट निर्देश और निर्णय और जिम्मेदारी लेने से बचते अधिकारियों के कारण बहुत से लोग परेशान हुए, उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा। इस मानवीय त्रासदी में संवेदनशीलता दिखाने के बजाए कुछ कलेक्टरों ने कानून का राज कायम करने की कोशिश की। यहां कहीं कोरेण्टाइन सेंटर बनाये गये, उनमें से कई जगह बहुत सी लापरवाही दिखाई दी। बड़े अधिकारियों ने इस कार्य में कोई रूचि नहीं दिखाई ना ही मानिटरिंग किया। राज्य स्तर पर हेल्प लाईन और सेंट्रल कोविद कंट्रोल रूम भी उस तरह सक्रिय नहीं दिखा जिसकी अपेक्षा वहां से की जाती है।

अनलॉक वन में जब अधिकारी राज्यों ने लगभग सारे प्रतिबंध हटाकर अपनी सीमाएं खोल दी है, छत्तीसगढ़ ने ऐतिहात के रूप में अपनी सीमाओं को सील रखा है। यहां तक की जिलों की सीमाओं को भी नहीं खोला गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अतिरेक में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है, जिससे कोरोना को फैलने का मौका मिले। छत्तीसगढ़ में आप जब तक कोरोना से संक्रमित नहीं हो सकते जब तक की आप स्वयं ना चाहें या सावधानी न बरते। सरकार ने अपनी ओर से हरसंभव प्रयास किये हैं, अब बारी नागरिकों की है।