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बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे क्लीनिक और लैब

बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे क्लीनिक और लैब

कवर्धा, 14 सितंबर। जिले में बगैर रजिस्ट्रेशन के 564 निजी क्लीनिक और लैब संचालित हैं। इन पर कार्रवाई के लिए सूची तैयार हो चुकी है। सभी बीएमओ को लिस्ट भेज दी गई है। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, ड्रग कंट्रोलर, राजस्व समेत 5 विभागों की संयुक्त टीम इन पर कार्रवाई करेगी।
सूची के मुताबिक पंडरिया ब्लॉक में सर्वाधिक 289 झोलाछाप और बगैर रजिस्ट्रेशन के दवाखाने हैं। इनकी डिग्री न तो मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है और न ही क्लीनिक चलाने के लिए नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन है। जुलाई 2019 में नगर पंचायत पंडरिया और पांडातराई में बगैर रजिस्ट्रेशन के संचालित 5 निजी क्लीनिक और 1 लैब पर कार्रवाई की गई थी। लैब को सील किया गया था, वहीं निजी क्लीनिक को नोटिस दिए थे। ग्रामीण क्षेत्रों में इन झोलाछाप को बसाने के लिए हमारा सिस्टम ही जिम्मेदार है। क्योंकि शासन सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ, एमबीबीएस डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ नहीं दे पा रही है। इसलिए अंचल के मरीज इन बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित क्लीनिक में इलाज कराने मजबूर हैं, जहां उन्हें अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। अस्पताल और क्लीनिक में प्रशिक्षित नर्स व सहायक स्टाफ होना चाहिए। पुरुष-महिला के अलग-अलग वार्ड, गंभीर बीमारियों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे के भीतर देने की व्यवस्था व अन्य सुविधाओं का होना अनिवार्य है। एक्ट के उल्लंघन पर सजा तय पर्ची या क्लीनिक के बोर्ड पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लिखना एक्ट का उल्लंघन है। इस तरह की पहली गलती मिलने पर 500 से 50 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है। बीएएमएस डिग्रीधारी को नाम के आगे आयुर्वेदाचार्य लिखना। चिकित्सा शिक्षा संस्थान नियंत्रण अधिनियम े1973, 7(ग) के तहत डॉक्टर शब्द का उपयोग रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही कर सकता है। उल्लंघन पर 3 साल कैद व 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है।