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भारत में वायु प्रदूषण मानसिक बीमारी का सबसे खतरनाक कारण है

भारत में वायु प्रदूषण मानसिक बीमारी का सबसे खतरनाक कारण है


पूरा विश्व इस परेशानी से जूझ रहा है, जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों में सबसे ज्यादा मानसिक बीमारिया हैं। जलवायु परिवर्तन आज एक ग्लोबल प्रोब्लम बन चुकी है। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि हमारे बच्चे अब जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। अचानक किसा भी बात पर गुस्सा करना,चिड़चिड़हाट और दुखी हो जाना यह सब मानसिक बीमारियों की तरफ ही संकेत करती हैं। बच्चों में अवसाद या डिप्रेशन जैसी बीमारियां प्रदूषित शहरों में ज्यादा फैल रहीं हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि जलवायु परिवर्तन का बच्चों के मस्तिष्क पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तनआबादी की बढ़ोतरीजमीन के इस्तेमाल के बदलते तरीके और नवनीकरण की स्थितियां एक साथ मिलकर मलेरिया और डेंगू जैसी कई बीमारियों के प्रकोप में इजाफा करेंगी, और इसका सर्वाधिक शिकार बच्चे होंगे। यदि दुनिया में इसी तरह प्रकृति  जल और वायु के मुद्दों को लेकर लोकचेतना को नहीं बढ़ाया गया तो, हम अपने ही बच्चों इन खतरनाक बीमारियों से बचा नहीं पाएंगे। जिससे सबसे बच्चे ज्यादा पीड़ित होते हैं, दिमागी बुखार और मौसमी इंफेक्शन कहीं न कहीं जलवायु परिवर्तन का ही असर है। एकदम से किसी मौसम में फैलने वाले इंफेक्शन किसी खास टेंप्रेचर में ही फैलते हैं। जिस तरह से हम पृथ्वी का दोहन कर रहे हैं,इससे यह सारी बीमारियां और फैलेंगी और हर बार यह नए रूप में आएंगी। जल-संक्रमण से होने वाली अन्य बीमारियों की तादाद में भी बढ़ोतरी होगी, डायरिया के ज्यादातर मामलों में मूल कारण साफ-सफाई की कमी और स्वच्छ पेयजल का अभाव है.अगर जलवायु परिवर्तन के फलस्वरुप विश्व का तापमान  बढ़ गया तो, साफ पेयजल की समस्या आ सकती है, इससे डायरिया और जल के संक्रमण से होने वाली बीमारियों का प्रकोप तेज होगा।