प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-समरथ को नहीं दोष गोंसाई

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-समरथ को नहीं दोष गोंसाई


छत्तीसगढ़ में बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण जहां रायपुर राजधानी सहित कुछ शहरों को सघन लॉकडाउन लगाकर सब्जी-भाजी की बिक्री सहित लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर सबको घर में रहने की समझाईश, हिदायत और सड़क पर बेवजह घूमने वालों को दंडित किया गया। वहीं एक ऐसा वर्ग भी था, जो अपने पद, पावर, पैसा, संपर्क और ढिलाई की वजह से सारे नियम-कानून को धता बताकर आपदा में अवसर तलाश रहा था। रायपुर के चर्चित क्वींन क्लब में जन्मदिन की पार्टी, छेड़छाड़, मारपीट और गोलीबारी की घटना ने इस लॉकडाउन की सच्चाई बता दी। वहीं दूसरी ओर जिले की स्वास्थ्य अधिकारी का अपने सहयोगियों के साथ केक काटने का फोटो भी चर्चा में रहा। दरअसल, गोस्वामी तुलसीदास ने बहुत पहले ही लिख दिया है कि समरथ को नहिं दोष गोसाई।


समाज का समर्थ वर्ग बहुत सारे नियम-कानून को नहीं मानता। प्रभु वर्ग के पास ऐसे तालों की चाबी होती है, जो उनकी कथित आजादी को बंधित करते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते होने वाले लॉकडाउन ने लोगों की जीवनचर्या, आजादी को प्रभावित किया है। पिछले छह माह से लोग संक्रमण के डर से मजबूरी में ही सही अपने घर में, शहर में सिमटकर रहे गए हंै। ऐसे समय में भी कुछ लोग ऐसे थे, जो अपने लिए मौज-मस्ती का स्पेस ढूंढ रहे थे। कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई से महाबलेश्वर पिकनिक मनाने जाने वाला वधावन परिवार हो या फिर रायपुर के क्वींस क्लब में बर्थडे पार्टी मनाने वाले लोग। सभी की मानसिकता एक जैसी है। सैर सपाटे के शौकीन बड़े लोगों की वजह से ही कोरोना की आमद हमारे देश में हुई है। जो लोग हमेशा यस सुनने के आदी होते हैं, उन्हें किसी भी बात पर ना पसंद नहीं आती। ऐसे ज्यादातर लोग बहुत समर्थ होते हैं।
मशहूर मॉडल जेसिका लाल की 29 अप्रैल, 1999 की रात दिल्ली के टैमरिंड कोर्ट रेस्टारेंट में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वजह जेसिका ने मनु शर्मा को शराब परोसने से मना कर दिया था। तिहाड़ जेल में करीब 17 वर्ष से बंद मनु शर्मा को रिहा कर दिया गया है।

नेताओं, मंत्री, अफसर नव धनाढ्यों की संताने नये दौर के दबंग हैं। वो हर जगह इजी एक्सेस चाहते हैं। यह जरूरी नहीं कि सत्ता का केंद्र बड़ा हो। सरपंच जो पंचायती राज व्यवस्था में पंचायत का मुखिया होता है, वह भी अपने पॉवर का उपयोग कुछ इस तरह करता है। कांकेर के एक गांव में कोरोना से बचने के नियमों का पालन ना करते हुए सरपंच का परिवार पिकनिक मना रहा था। गांव के लोगों ने इसकी शिकायत करते हुए कलेक्टर के नाम एसडीएम पखांजूर को ज्ञापन सौंपा। गांव में लॉकडाउन करने की मांग की। ज्ञापन में उल्लेख है कि पंचायत के आश्रित ग्राम पीवी 132 में दो लोगों को कोरोना पाया गया था। ऐसे बहुत से मामले हैं जहां लोग किसी भी तरह के नियम-कायदे को नहीं मानना चाहते। रायपुर के  वीआईपी रोड स्थित क्वींस क्लब में शराब परोसने और उसमें गोली चलने का मामला राजधानी रायपुर में सुर्खियों में बना हुआ है। इस क्लब में एक बर्थडे पार्टी का आयोजन था। इसी दौरान कुछ युवकों और युवतियों में विवाद हुआ तथा गोली चल गई। इसके पहले जमकर शराबखोरी का दौर भी चला।

पुलिस ने इस घटना के बाद क्वींस क्लब गोलीकांड में 14 लोगों पर लॉकडाउन के उल्लंघन मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। सवाल यहां यह भी है कि जब एक जिले से दूसरे जिले तक आने-जाने के लिए ई-पास जरूरी था, सब चीजें बंद थी तब दुर्ग से लड़कियां जन्मदिन की पार्टी मनाने रायपुर कैसे आई? रायपुर में लॉकडाउन के बाद शराब कैसे मिली।
इस तरह का दृश्य देश में अलग-अलग दिखाई दिया। चंडीगढ़ में लॉकडाउन के दौरान शहर के एक अकाली नेता के बेटे ने अपने जन्मदिन पर दोस्तों को पूल पार्टी दी। पार्टी का समय भी शाम को ही रखा गया और वहां कुछ दोस्त बुलाने की बजाय भीड़ एकत्र कर लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाने के साथ शराब भी परोसी गई।

पार्टी की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर पुलिस के अधिकारी गांव झमट के मून वॉक रेस्तरां में पहुंच गए। पुलिस ने वहां से 54 युवकों को काबू में किया। पुलिस ने अकाली दल के नेता सुरजीत सिंह पम्मा के बेटे सिमरन ओबराय के साथ-साथ अन्य लोगों के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, एक्साइज एक्ट का मामला दर्ज किया है। मध्यप्रदेश में 23 जुलाई को लॉकडाउन में पार्टी मनाते 26 लड़के और 7 लड़कियां पकड़ी गई थी। बर्थडे खुद को मॉडल बताने वाले नावेद का था। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तब वो गुप्ती से 7 तरह के केक काटते मिला। इसी तरह 9 अगस्त को भोपाल में बैरगढ़ इलाके में टोटल लॉकडाउन के दौरान एक रेस्त्रां में चल रही पार्टी पर पुलिस ने छापा मारा था, जहां लगभग 50 लोग पार्टी कर रहे थे, जिन्हें हिरासत में लिया गया है। आरोपितों में ज्यादातर व्यापारी वर्ग के लोग थे। पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल, सेकुलर बद्ध के प्रमुख एचडी देवगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमार स्वामी की शादी में बड़ी संख्या में लोग कोरोना वायरस के चलते देश भर में लागू तमाम तरह की पाबंदियों के बीच हुई इस शादी के दौरान लॉकडाउन और सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ती दिखी। 

आर्थिक उदारीकरण के बाद से देश में नवधनाढ्यों की एक नई पीढ़ी तैयार हुई है। समाज में धन की महत्ता बढ़ी है। बहुत सारे लोग अपने धनबल के जरिये वो सब हासिल करना चाहते हैं। युवा पीढ़ी के बहुत से लोगों का आदर्श वे लोग हैं, जो किसी भी तरह से समरथ यानी बाहुबली हो गये हैं। यह बाहुबल राजनीति, पैसा और ग्लैमर के जरिये हासिल किया जाता है। सामान्यत: यह देखने में आता है कि गरीब आदमी जिसने कोई छोटा-मोटा अपराध किया है या निरअपराध है, वह अपने लिए निर्धारित सजा से ज्यादा समय जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में गुजार देता है। वहीं पैसे और पहुंच वाले लोग वकीलों के माध्यम से तुरंत अपनी जमानत करवा लेते हैं। बैंकों में जरूरतमंद चक्कर लगाते रहे हैं और करोड़ों, अरबों रुपए लेकर लोग देश के बाहर चले जाते हैं। अस्पतालों में इलाज के लिए लोग लाईन लगाकर बैठे रहते हैं, वहीं दूसरी ओर जिनके पास पद, पैसा, ताकत है, वे अपना इलाज करवा लेते हैं। यही हाल शिक्षा का है। प्रतिभावान विद्यार्थी अच्छे संस्थान में एडमिशन के लिए तरसते हैं और कुछ लोग डोनेशन के बूते पर अपना एडमिशन करवा लेते हैं। हमारे समाज में पूंजी के बढ़ते प्रभाव और गलत आचरण करने वालों को मिलने वाली सामाजिक स्वीकृति के चलते ऐसे लोगों के हौसले बढ़ते हैं जो किसी प्रकार के नियम कानून, रुकावट को स्वीकार नहीं करते। जिसकी जितनी परचेसिंग पावर है, वह उतना समरथ है। यदि आप में खरीदने का सामथ्र्य है तो आपके लिए बिकने को विधायक, सांसद से लेकर मीडिया तक तैयार है।

रायपुर के क्वींस क्लब की घटना तो सिर्फ इसकी एक बानगी मात्र है। गोस्वामी तुलसीदास को याद करिए और सब कहते रहिए समरथ को नहिं दोष गोसार्ई।