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ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से होंगे निकाय चुनाव

 ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से होंगे निकाय चुनाव


रायपुर। छत्तीसगढ़ में होने वाले निकाय चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। इसमें अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल नहीं होगा। यह फैसला छत्तीसगढ़ सरकार की सब कैबिनेट कमेटी ने लिया। मंगलवार को यह अहम बैठक नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में हुई। इस बैठक में मंत्री शिव डहरिया, मो अकबर और रविंद्र चौबे शामिल हुए। मंत्रियों ने पत्रकारों को बताया कि यह फैसले स्थानीय सरकार को मजबूत करने के लिए, हुए हैं। इससे पार्षद ताकतवर होंगे। इस फैसले को अब कैबिनेट में रखा जाएगा उसके बाद अध्यादेश लाकर इसे पूरा कर लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक दो दिनों के भीतर या आने वाले सप्ताह में कैबिनेट की बैठक हो सकती है।
सरकार की उप समिति ने लिया ये फैसला
आपको बता दें कि आज नगरीय निकाय चुनाव उप समिति की बैठक हुई। इस बैठक में कैबिनेट मंत्री शिव डहरिया, मोहम्मद अकबर और रविन्द्र चौबे शामिल हुए। चर्चा के दौरान मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने कहा कि समिति ने निर्णय लिया है कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही नगरीय निकायों में चुनाव होंगे। पार्षद से ही महापौर का चुनाव होगा। ईवीएम की जगह मतपत्रों से चुनाव करवाया जाएगा इससे निर्वाचन व्यय में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि आरक्षण रोस्टर के आधार पर जो पात्र हैं वही मेयर बन सकता हैं।
भाजपा 16 अक्टूबर को करेगी धरना-प्रदर्शन
महापौर और अध्यक्ष का अप्रत्यक्ष तरीके से चुनाव कराने के सरकार के फैसला का विरोध शुरु हो गया है। फैसले के विरोध में भाजपा 16 अक्टूबर को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करेगी। मोतीबाग के पास आयोजित धरना-प्रदर्शन के पश्चात पार्टी नेता राज्यपाल अनुसूईया उइके को सरकार के इस फैसले के विरोध में ज्ञापन सौंपेंगे और उनसे अध्यादेश पर अपनी सहमती न प्रदान करने का आग्रह भी करेंगे।
नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस अपनी हार से डरी: कौशिक
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने निकाय चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर-अध्यक्ष चुनाव पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिश को लोकतांत्रिक मूल्यों से खिलवाड़ बताया है। कौशिक ने कहा कि ईवीएम के बजाय मतपत्र और महापौर-अध्यक्ष चुनाव पार्षदों से कराकर प्रदेश सरकार और कांग्रेस लोकतंत्र पर कब्जा करने का षड्यंत्र रच रही हैं। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि अपनी विफलताओं से घबराए और गत लोकसभा चुनाव के नतीजों में अपना सूपड़ा साफ होने से भयभीत कांग्रेस नेता और प्रदेश सरकार ने अपने कर्मों पर पर्दा डालने के लिए यह निर्णय लिया है।