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डॉ. दिव्येंदु मजूमदार का मामला राज्यसभा सासंद सरोज पाण्डे तक पहुंचा, नियुक्ति से छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों में आक्रोश, डॉ.मजूमदार का स्थायी पता और प्रेक्टिश पर उठी उंगलियां

डॉ. दिव्येंदु मजूमदार का मामला राज्यसभा सासंद सरोज पाण्डे तक पहुंचा, नियुक्ति से छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों में आक्रोश, डॉ.मजूमदार का स्थायी पता और प्रेक्टिश पर उठी उंगलियां

रायपुर. राज्य सरकार की ओर से डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया में सदस्य नामित हुए डॉ. दिव्येंदु मजूमदार की नियुक्ति से छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों में आक्रोश है. इससे नाराज कुछ लोगों ने राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डे तक मामला पहुंचा दिया है. नईदिल्ली में आज उनसे एक दल ने डॉ.मजूमदार के तथाकथित फर्जीवाड़े को लेकर शिकायत की है तथा मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. दूसरी ओर पूरे मामले में छत्तीसगढ़ डेंटल कौंसिल की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है.

नियम के मुताबिक किसी राज्य का प्रेक्टिशनर डॉक्टर तब तक किसी अन्य राज्य में स्थायी निवास या प्रेक्टिश नही कर सकता जब तक कि वह अपने गृहराज्य की एनओसी लाकर नही देता. आश्चर्य कि डॉ.मजूमदार ने खुद को समता कालोनी निवासी बताया है जबकि उस पते पर कोई नही रहता. डीसीआई के नियमों के अनुसार अगर कोई डॉक्टर गलत जानकारी देता है या किसी भ्रष्ट मामले की लंबित जांच का हिस्सा है या फिर निवास का गलत पता देता है तो डेंटल कौंसिल आफ इण्डिया उसके रजिस्ट्रेशन के लिए मना कर सकती है.

इसके बावजूद छत्तीसगढ़ डेंटल कौंसिल ने डॉ.मजूमदार का रजिस्ट्रेशन कर लिया. जबकि डॉ.मजूमदार उपरोक्त तीनों ही तरीके से गलत जानकारी देते हुए खुद को छत्तीसगढ़ का निवासी बताया और सदस्य के तौर पर डेंटल कौंसिल आफ इण्डिया के लिए नामित हो गए. नियम के मुताबिक रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करने पर कि व्यक्ति निवास नहीं कर रहा है या मेडिकल प्रेक्टिस नहीं कर रहा है, राज्य के रजिस्टर में नाम जोड़ने से इंकार कर सकता है साथ ही आवेदन की वैधता को सत्यापित करने के लिए पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवा सकता है.

स्पष्ट है कि यदि डॉ.मजूमदार छत्तीसगढ़ के निवासी होना चाहते हैं या प्रेक्टिस करना चाहते हैं तो उन्हें पूर्व के गृहराज्य से अनापत्ति प्रमाण—पत्र प्रस्तुत करना चाहिए था. खुलासा यह भी है कि छत्तीसगढ़ सरकार की शरण में आने से पहले डॉ. दिव्येंदु मजूमदार ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सदस्य बनने की कोशिश की थी. पश्चिम बंगाल में कार्यकाल खत्म होने के बाद जब सरकार ने सरकारी मुलाजिम होने का हवाला देते हुए डॉ.मजूमदार को दुबारा कार्यकाल देने से इंकार कर दिया तो उन्होंने उत्तर प्रदेश की ओर रूख किया. मुरादाबाद के एक कॉलेज में खुद को टीचर बताते हुए सरकार को सदस्य बनाने का आवेदन दिया लेकिन 65 साल की उम्र पूरी करने के कारण उन्हें यहां भी निराशा ही हुई.

लेकिन डॉ. मजूमदार ने हार नही मानी बल्कि वे राजस्थान चले आए तथा जयपुर स्थित महात्मा गांधी डेंटल कालेज में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन किया और डीसीआई का सदस्य बनना चाहा परंतु सरकार ने रूचि नही दिखाई. उसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ का रूख किया और यहां सदस्य बनने में कामयाब हो गए. यानि डॉ. मजूमदार निवासी पश्चिम बंगाल के हैं, पढ़ाते जयपुर में हैं तथा सदस्य छत्तीसगढ़ राज्य से बन गए.

यहां के वरिष्ठ डॉक्टरों का दर्द है कि नई सरकार बनने के बाद उम्मीद थी कि छत्तीसगढ़ियों के साथ न्याय होगा परंतु डॉ. मजूमदार की नियुक्ति से निराशा हुई है. सवाल है कि क्या राज्य में अनुभवी डॉक्टरों की कमी है जो बाहर के लोगों को सदस्य बनाया जा रहा है. लोगों को आशंका है कि राज्य में प्राइवेट डेंटल कॉलेजों ने डॉ.मजूमदार की नियुक्ति में अहम रोल निभाया है. इसके पीछे तगड़े लेन—देन की भी पूरी संभावना है.