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सोशल मीडिया पर असंसदीय व नफरत की भाषा का इस्तेमाल न करना भी राष्ट्रभक्ति एवम् देश सेवा ही है : डीआईजी रतन लाल डांगी

सोशल मीडिया पर असंसदीय  व नफरत की भाषा का इस्तेमाल न करना भी राष्ट्रभक्ति एवम् देश सेवा ही है : डीआईजी रतन लाल डांगी


भिलाई। सोशल मीडिया एक प्लेटफार्म है एक दूसरे से जुड़ने का,एक दूसरे से कुछ सीखने का,एक दूसरे के दुःख मे,परेशानी में,मुसीबत में उनका साथ देने का ,हौसला बढ़ाने के लिए है न कि किसी जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र के नाम पर नफरत फैलाने, उसकी आलोचना करने,किसी को नीचा दिखाने ,लोगों को हिंसा करने के लिए उकसाने के लिए किया जा रहा है । डीआईजी रतन लाल डांगी ने कहा  कि आजकल देखने में आ रहा है कि कई लोग न केवल युवा बल्कि उम्र मे अपने आपको अनुभवी कहने वाले भी सोशल मिडिया का उपयोग केवल नफरत फैलाने, हिंसा फैलाने, अपने जाति,संप्रदाय को अन्य से उच्च एवम् दूसरे को निम्न साबित करने में लगे हुए इससे न केवल स्वयं का बल्कि देश व मानवता के दुश्मन बन भी रहे है।

उन्होंने युवाओ  से अपील किये है कि हम सबको इस दुनिया में मानवता का भला करने व  दूसरे की मदद करने से देश व् प्रदेश को  शांति बना रहेगा। डीआईजी रतन लाल डांगी का कहना है कि दुनिया में इंसानों के बीच बैर,भेद भाव पैदा कराने,द्वैष फैलाने, नफरत फैलाने, जैसी कदम नहीं उठाना चाहिए। तथा एक दूसरे के साथ सहयोग करके ,प्यार से,सबको अपना ही समझने से ही इंसानियत के लिए कुछ कर पाएंगे। 

लोग जानबूझकर या किसी के बहकावे में आकर, जाति, धर्म, संप्रदाय, देवी देवताओं, महापुरुषों को लेकर  असंसदीय शब्दों का प्रयोग करके न केवल अपने संस्कारों का परिचय देते हैं बल्कि अपने लिए कानूनी कार्यवाही को भी आमंत्रित कर लेते हैं।ऐसे युवा  कानूनी कार्रवाई में पड़कर अपना भविष्य भी खराब कर रहे हैं।जिनके बहकावे में या प्रभाव में आकर ऐसा करते है वो केवल आपका इस्तेमाल कर रहे हैं।किसी के बहकावे में आकर किसी की भावनाओं को ठेस ना पहुंचाए । हम सब  एक देश के नागरिक है,संविधान ने सभी नागरिकों को एक जैसा माना है, वो भेदभाव नहीं करता तो आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? इस प्रकार के विभाजन ने भारत का पहले ही इतना नुकसान कर दिया हैं कि उसकी भरपाई मे अभी भी कई सालों लग जाएंगे।

हम सब भारतीय है।इसे महान बनाने में योगदान दिजिए न कि कमजोर करने में।