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छत्तीसगढ़ में फिल्म सिटी बनाने का कोई औचित्य नहीं : जयंत देशमुख

छत्तीसगढ़ में फिल्म सिटी बनाने का कोई औचित्य नहीं : जयंत देशमुख

रायपुर, 20 नवंबर। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने महानगरों की तर्ज पर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने की घोषणा की थी जिसके लिए संस्कृति विभाग एवं इससे जुड़े  व्यक्तियों की एक टीम अन्य जगहों की फिल्म सिटी मुंबई , हैदराबाद , नासिक जैसी जगह  के अध्य्यन के लिए गठित की गई थी। इस टीम में प्रदेश के नामी डायरेक्टर जयंत देशमुख को समन्वयक बनाया गया था। लेकिन कुछ कारणवश यह दौरा स्थगित कर दिया गया जिसके बाद अब तक इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की गई है।

फिल्मों एवं रंगमंच दोनों ही क्षेत्र की विशेष जानकारी रखने वाले जयंत देशमुख जो मुंबई फिल्म सिटी में  भी अपना लोहा मनवा चुके हैं, उनका कहना है की छत्तीसगढ़ में फिल्म सिटी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। जहाँ प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध न हो वहां फिल्म सिटी का निर्माण करना एक हद तक सार्थक मन जा सकता है लेकिन छत्तीसगढ़ में पहले ही प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ प्रकृति की जो वास्तविक सुंदरता है वो किसी बनवाती सुंदरता से कहीं अधिक है। छत्तीसगढ़  सिनेमा के सिनारिओ की बात करें तो कुछ समय पहले तक  छत्तीसगढ़ भाषा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। लेकिन अब धीरे धीरे छत्तीसगढ़ में फिल्मों को बढ़ावा मिल रहा है। एक तरफ जहाँ छत्तीसगढ़ पहले ही प्राकृतिक सौंदर्यता से आच्छादित है ऐसे में फिल्म सिटी का निर्माण करने से बेहतर होता कि यहाँ प्रशिक्षण केंद्र बनाये जाएँ ताकि यहाँ के कलाकारों को प्रदेश में ही प्रशिक्षण मिल सके।


आज दुनिया कहाँ से कहाँ पहुंच गई है। नयी नयी तकनीकें आ गई। थिएटर में भले ही कम तकनीकें इस्तेमाल की जाती है लेकिन थिएटर में अभिनय करना मुश्किल होता है। वहीँ फिल्मों में कई सारी तकनीकें इस्लेमाल की जाती है। और इन सब तकनीकों की जानकारी के आभाव में छत्तीसगढ़ में अच्छी फ़िल्में कम बनती है। अगर यहाँ फिल्म सिटी की बजाये प्रशिक्षण केंद्र बनाये जाएँ तो स्थानीय कलाकारों को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन यहाँ फिल्म सिटी बनाने की जो मंशा थी उसकी भ्रूण हत्या की गई है। फिल्म सिटी बनाये ना बनाए ये अलग बात है लेकिन  कम से कम एक बार अन्य जगहों की फिल्म सिटी का अध्ययन कर लेना चाहिए। राजधानी में किसी एक जगह पर बैठ कर अन्य जगहों की तुलना नहीं की जा सकती जब तक वहां जाकर उसे देख ना लें।

मुक्तिबोध राष्ट्रीय नाट्य समारोह के सिलसिले में जयंत देशमुख रायपुर प्रवास पर थे। इसी दौरान सिनेमा और रंगमंच के विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने अपने विचार साझा किये। इस चर्चा में आलोक चटर्जी, सुभाष मिश्र और रंगमंच से जुड़े व्यक्ति शामिल हुए थे।