कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः पर-निर्भर जीवन

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः पर-निर्भर जीवन


जीवन पर-निर्भर है

निर्भर है पृथ्वी पर

जल पर निर्भर है

निर्भर है अग्नि पर

आकाश पर निर्भर है

निर्भर है हवा पर

सृष्टि की लोकसभा पर निर्भर है

निर्भर नहीं स्वार्थ पर

परमार्थ पर निर्भर है


आत्मा केवल साक्षी है

इस पर-निर्भर का

न्याय और अन्याय से परे

सबमें रमता है

धर्म इसी के धारण पर निर्भर है

कर्म इसी के कारण पर निर्भर है


आत्म तिरंगा नहीं

जहाँ चाहें फहरा दें

जो मन में आये चेहरा दें

प्रजातंत्र को


वह रंगहीन सब उसमें बसे हुए हैं

हर कोई जीता-मरता है

उसमें कोई बाज़ार नहीं भरता है