breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-मियां बीवी राजी तो भी रोकेगा काजी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-मियां बीवी राजी तो भी रोकेगा काजी


कहावत है कि जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी, लेकिन अब ये कहावत गलत साबित होने जा रही है। देश के कुछ राज्यों में लव जिहाद के नाम पर जो कानून बनाए जा रहे हैं उसमें अलग-अलग धर्मों के युवक-युवती को विवाह के लिए दो माह पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी जिसके बाद वह विवाह कर सकते हैं। बगैर अनुमति विवाह करने वाले जोड़े को छह माह से लेकर तीन साल तक की सजा और दस हजार रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।

उत्तरप्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश लागू कर दिया है। वह बरेली जो अपने बाजार में झुमका गिरने के कारण अब तक जाना जाता था अब लव जिहाद की पहली गिरफ्तारी के कारण चर्चा में है। नये कानून की पहली गिरफ्तारी इसी जिले से हुई है।

लव जिहाद के नाम पर इसी तरह से मध्यप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, गुजरात में भी कानून बनने जा रहा है। कांग्रेस शासित राज्य प्रेम विवाह के मामले में थोड़े उदार हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा के उन नेताओं के बारे में पूछा है जिन्होंने अंतर धर्म में शादी की है। उन्होंने कहा है कि क्या इस शादी को वे लव जिहाद की श्रेणी में रखेंगे।

उत्तर प्रदेश में अभी ही लागू हुए इस कानून के तहत लव जिहाद के आरोप में बरेली के थाना देवरनिया में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी पर जबरन धर्मांतरण करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 के तहत मिथ्या, झूठ, जबरन, प्रभाव दिखाकर, धमकाकर, लालच देकर, विवाह के नाम पर या धोखे से किया या कराया गयाधर्म परिवर्तन अपराध की श्रेणी में आएगा। इस कानून के मुताबिक, धर्म परिवर्तन कराने या करने के मामलों में अगर एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन नहीं किया गया तो इसका सबूत देने की जिम्मेदारी आरोपी शख्स की होगी। यदि कोई केवल शादी के लिए लड़की का धर्म परिवर्तन करता है या कराता है तो ऐसे में उस शादी शून्य माना जाएगा। इसका मतलब हुआ कि ये कि ऐसीशादी कानून की नजर में अवैध होगी।

वहीं मध्य प्रदेश में भी ऐसे ही एक मामले में पुलिस ने एक युवक की गिरफ्तारी की है। मामला शहडोल का है, जहां एक मुस्लिम पति ने हिंदू पत्नी की उर्दू और अरबी न सीखने पर पिटाई की। रोज-रोज की मारपीट से तंग आकर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पूरी दुनिया में सामाजिक व्यवस्था के संचालन और संतति को, परिवार को आगे के लिए जिस विवाह नामक संस्था को बनाया गया है वह देशकाल, समाज और जातियों में अलग-अलग तरीके से प्रचलन में है। हिन्दुस्तान में ज्यादातर विवाह माता-पिता की मर्जी से होते हैं। अब धीरे-धीरे इसमें वर-वधु यानी लड़के-लड़की की मर्जी, पसंद को भी थोड़ी बहुत स्वीकृति मिलने लगी है बशर्तें कि वह विवाह सजातीय हो, मान्य परपंराओं के अनुरुप हो। अभी भी विजातीय विवाह, दूसरे धर्म, समुदाय में विवाह को सहज सामाजिक मान्यता नहीं है। प्रेम करने से जाति नहीं जाती, विवाह करने से जाती है। यही वजह है कि बहुत से लड़के प्रेम को अपनी मर्जी से करते हैं पर शादी मां-बाप की मर्जी से दहेज के साथ करके अपनी जाति परंपरा की रक्षा करते हैं।

अभी तक की हमारी सारी प्रेम कहानियों में चाहे वह लैला-मजनू की हो, शिरी फरहाद , हीर-रांझा की हो या किसी आधुनिक प्रेमी जोड़े की ही क्यों न हो सामाजिक स्वीकृति नहीं मिली है। प्रेम में विरह, त्याग, बलिदान और चुप्पी अभी भी मानक बने हुए हैं। पहले के सिनेमाई गानों में भी यही स्वर प्रमुखता से उभरा है जहां नायक बमुश्किल तमाम बाधाओं को पार करके फिल्म के अंत में नायिका को पाता है। बदलते समाज के साथ उसके मूल्य उसकी फिल्में और उसके गाने भीबदले और प्रेमी युगल बजरंगियों की परवाह किये बगैर गाने लगे अब चाहे मां रूठे या बाबा यारामैंने तो हां कर ली...। या फिर खुल्लम-खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों इस दुनिया से नहीं डरेंगे हमदोनों।

टेक्नालॉजी और रोजगार के अवसर ने दहेज प्रथा और अपने समाज में अच्छे लड़के लड़कियों के अभाव ने सजातीय विवाह को सहकर्मि विवाह में तब्दील करने में बड़ी भूमिका निभाई। अब लोग अपने जैसे जॉब वाली लड़की-लड़के से विवाह को ज्यादा तवज्जो देते हैं। हमारे सिनेमा ने इस जातपात, धर्म की कथित बेडिय़ों को तोड़कर इस तरह के विवाह की स्वीकारता को बढ़ावा दिया है। समाज में आने खुलेपन और शिक्षा के कारण आई जागरुकता के चलते अंतरजातीय विवाहका चलन बढ़ा है। अब जब एक बार फिर से देश की कट्टरपंथी ताकते मजबूत हुई है, वे धर्म औरजाति के नाम पर एक दूसरे पर दोषारोपण कर, एक दूसरे को घेरने का कोई अवसर नहीं छोडऩा चाहती। अंतरजातीय और अंतर धर्म विवाह ऐसे लोगों के लिए सबसे कारगर हथियार है। देश-दुनिया और समाज में कुछ अपराधिक किस्म के लोग होते हैं, कुछ धार्मिक कट्टरपंथी होते हैं, जिन्हें शायद यह पाठ पढ़ाया जाता होगा कि वे दूसरे धर्म की लड़की से विवाह करके अपने धर्म को बढ़ा रहे हैं। ऐसे विवाह के जरिये ईश्वर, अल्लाह, गॉड की सेवा कर रहे हो किन्तु ऐसे सरफिरे बहुत कम हंै। धर्मातंरण के और बहुत से तौरतरीके हैं , जिन पर अलग से बात हो सकती है ।देश में इससमय ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि लोग और कुछ नहीं कर रहे हैं केवल लव जिहाद में लगे हुए हैं। यह प्रेम का नहीं नफरत फैलाने का समय है।
लव जिहाद रोकने के नाम पर अलग-अलग राज्यों में बन रहे इस तरह के कानूनों को लेकर वरिष्ठएडवोकेट, प्रशांत भूषण का कहना है कि यह कानून संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है। हमारा संविधान किसी भी धर्म के दो वयस्क युवक युवती को आपसी रजामंदी से विवाह करने की अनुमति देता है। धर्म या जाति के आधार पर इसमें बंदिश नहीं लगाई जा सकती। यह कानून संविधान में किसी व्यक्ति को मिले मूल अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

आईपीएस की धारा 493 में पहले से ही यह प्रावधान है कि अगर विवाह करने के लिए किसी तरह का प्रलोभन दिया जाता है, दबाव डाला जाता है या कोई अन्य अवैध रास्ता अपनाया जाता है तोयह दंडनीय अपराध है, इसके लिए दस साल तक की कैद की सजा हो सकती है, अवैध तरीके से या जबरन कराए गए धर्म परिवर्तन के खिलाफ भी आईपीसी में स्पष्ट प्रावधान है, ऐसे में फिर से एक कानून लाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। कानून के दूसरे जानकार भी कहते हैं कि इस नएकानून का कोई औचित्य समझ में नहीं आता है। जितने भी अपराध की बात इस अध्यादेश केमसौदे में की गई है, उन सबके खिलाफ पहले ही कानून हैं और कठोर दंड के प्रावधान हैं। आप पहले से मौजूद कानूनों पर अमल तो करा नहीं पा रहे हैं, अनावश्यक तौर पर नए कानून लाकर सिर्फ भ्रमित किया जा रहा है। समाज में व्याप्त भ्रम, नफरत और एक दूसरे के प्रति अविश्वास राजनीतिक दलों को अपनी रोटी सेंकने में बहुत मदद करता है।

हमारे नेताओं को लव जिहाद जैसी घटना में भी पकिस्तान और वहां की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. का हाथ दिखने लगा है। मध्यप्रदेश के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने इस तरह काआरोप लगाते हुए कहा है कि धर्म बदलकर हिन्दू बहन बेटियों को प्रलोभन देकर उनका फोटोलेन, ब्लैकमेलिंग करना, ये लव अकेला नहीं है, जेहाद भी है। यहां सवाल यह भी है कि सोशल मीडिया के दौर में जब खुद लड़के-लड़कियां अपनी फोटो पोस्ट कर रहे हैं, सेल्फी डाल रहे हैं, फ्रेंड्स बना रहे हैं, तब उन्हें बरगलाने के लिए किसी खास धर्म की जरुरत है। क्या इस तरह के फ्राड कोई जाति ,धर्म विशेष के लोग कर रहे हों ऐसा नहीं है। इस तरह के फ्राड के किस्से आये दिनसार्वजनिक होते हैं। जिसमें सभी धर्म, जाति के लोग शामिल होते हैं। फ्राड और धोखाधड़ी पर किसी धर्म विशेष का कॉपीराइट नहीं है। लव जिहाद के नाम पर लाये जा रहे ये बिल कहीं प्रताडऩा के नये औजार न बन जायें ये सभी को देखना होगा। इस तरह प्यार करने वालों को किसी खास एंगल से देखना और लव जिहाद के नाम पर कार्यवाही करना किसी खास एजेंडे की ओर इशारा करता है।