breaking news New

48 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति का जम्मू-कश्मीर प्रशासन का निर्णय बेहद कठोर :तारिगामी

48 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति का जम्मू-कश्मीर प्रशासन का निर्णय बेहद कठोर :तारिगामी

श्रीनगर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता यूसुफ तारिगामी ने शुक्रवार को कहा कि 48 वर्ष की आयु अथवा 22 साल तक की सेवा के बाद सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त किये जाने का जम्मू-कश्मीर प्रशासन का फैसला बहुत कठोर है और यह लाखों कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।

तारिगामी ने आरोप लगाया कि प्रशासन का यह निर्णय कर्मचारियों को दबाव में रखने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होना निश्चित है। यह सरकार और नौकरशाहों के लिए अपने मातहत काम करने वाले कर्मचारियों को दबाने के लिए एक हथियार की तरह काम करेगा। कर्मचारियों के सिर पर अनश्चितता की तलवार लटका दी गई है।

उन्होंने कहा,“ कर्मचारियों पर शासन करने के लिए पहले से ही बहुत कानून हैं। इस तरह के कठोर कानून लाने की क्या जरूरत है? इस कानून का एकमात्र उद्देश्य सरकार और प्रबंधन की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ यूनियन की आवाज काे बंद करना है।”

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी शासित कईं राज्यों में श्रम कानून समाप्त करके मजदूरों के कईं अधिकार खत्म कर दिये हैं।श्री तारिगामी ने कहा,“ भाजपा सरकार ने पहले ही कईं भाजपा शासित राज्यों में, श्रम कानूनों को निलंबित करके श्रमिकों के कई अधिकार समाप्त कर दिये हैं। मानसून सत्र के अंत में संसद में पारित किए गए तीन श्रम कानून देश के श्रमिक वर्ग पर गंभीर प्रहार है।”

उन्होंने कहा,“ केंद्र सरकार आक्रामक तरीके से प्रो-कॉर्पोरेट और एंटी-वर्किंग क्लास नव-उदारवादी सुधारों के कार्यान्वयन के साथ आगे बढ़ रही है। बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग, पदों के निर्माण पर प्रतिबंध, लगभग सात लाख रिक्तियों को नहीं भरना , सरकार के विभिन्न कार्यों के लिए निगम का रुख, केंद्र सरकार के विभिन्न प्रतिष्ठानों को बंद करना या विलय करना आदि सरकार के कदम घोर कर्मचारी विरोधी हैं।

उन्होंने कहा “ सरकार के इन कदमों से सभी रैंक के कर्मचारियों में गुस्सा और असंतोष गहरा गया है। देश की ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी महासंघों के विभिन्न प्लेटफार्मों ने अपनी मांगों के लिए 26 नवंबर को आम हड़ताल करने का निर्णय लिया है। हम देश की ट्रेड यूनियन से अपील करते हैं कि 48 वर्ष की आयु में अथवा 22 साल की सेवा के बाद सेवा निवृत्ति के जम्मू-कश्मीर प्रशासन के फैसले को भी मांगों की सूची में शामिल करें।”