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बदलते परिवेश में स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही हो सकती है ख़तरनाक

बदलते परिवेश में स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही हो सकती है ख़तरनाक

स्वास्थ्य परिचर्चा फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नेहा अग्रवाल से 

आशिका कुजूर

वर्तमान में जहाँ काम का बोझ बढ़ता जा रहा है और जिस तरह से दिनचर्या में परिवर्तन हो रहा है उससे कई तरह की बीमारियों ने शरीर में घर कर लिया है। देर रात तक काम करना और सुबह देर से उठना, दिनभर भागदौड़ करना, ज्यादातर समय फास्टफूड खाना, इस तरह की जीवनशैली को लोगों ने अपना तो लिया है लेकिन इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता है कि भविष्य में इससे क्या क्या परेशानियाँ हो सकती हैं। आज की इस कड़ी में लोटस थेरेपी सेंटर की भौतिक चिकित्सा विशेषज्ञ (फिजियोथेरेपिस्ट) डॉ नेहा अग्रवाल से जानेंगे की स्वास्थ्य से सम्बंधित क्या क्या समस्याएं होती हैं और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सवाल - लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब – “अर्ली टू बेड, अर्ली टू राइज” मतलब जीवनशैली ऐसी बनानी चाहिए जिसमे सुबह जल्दी उठ कर कुछ व्यायाम या योग करना चाहिए। खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर की तली भूनी चीजें इग्नोर करना चाहिए. सोने का समय सुनिश्चित कर लेना चाहिए। खाना खाने के एक घंटे बाद ही सोना चाहिए। सोने के लिए अच्छा समय रात 10 बजे माना जाता है।

सवाल – वर्तमान जीवनशैली की वजह से महिलाओं में क्या-क्या परेशानियां देखने को मिलती हैं?

जवाब – जिन महिलाओं की जीवनशैली ऐसी होती है उनमें कैल्शियम की मात्रा कम देखने को मिलती है। शरीर में हल्का दर्द रहता है, लेकिन अक्सर महिलाएं इसे हलके में लेती हैं। ज्यादातर महिलाओं में मुख्यतः दो प्रकार की बीमारियाँ देखने को मिलती हैं, एक ऑस्ट्रोपोरोसिस और दूसरा ऑस्ट्रोऔर्थोरैसिस की समस्याएं हैं। इसका मुख्य कारण है कि महिलाएं अपने आहार और स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाती हैं। ऐसी समस्याएं न हो इसके लिए महिलाओं को खुद के लिए कुछ समय देना चाहिए और आवश्यक रूप व्यायाम करना चाहिए, साथ ही खान पान पर भी ध्यान देना चाहिए ।

सवाल - पुरुषों में किस तरह की परेशानियाँ देखने को मिलती हैं?

जवाब – लम्बे समय तक एक ही जगह पर बैठ कर काम करने से उनके कंधे और कमर में दर्द होता है। रीढ़ की हड्डियों से सम्बंधित परेशानियाँ होती हैं. गर्दन में अकडन भी होती है। आजकल यह समस्या लगभग हर तीसरे पुरुष के साथ है जो देर तक कंप्यूटर पर बैठ कर काम करते हैं।

सवाल – बच्चों में फिजियो से सम्बंधित क्या क्या परेशानियाँ होती हैं ?

जवाब – बच्चे जब पैदा होते हैं, कई बार गर्दन ठीक से नहीं संभाल पाते हैं, ओक्सिजन डेफिसिएंसी होती है। बच्चों में औटोसिस्म, डाउन सिंड्रोम, सेरिबल पाल्सी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।

सवाल – लक्षणों की पहचान कैसे कर सकते हैं ?

जवाब – पूरे शरीर में दर्द रहता है खासकर कमर और जोड़ो में दर्द होता है। शुरूवाती दिनों में इन सब बातों पर ध्यान नहीं देने से धीरे धीरे यह गंभीर रूप धारण कर लेते हैं। ऐसे दर्द को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योकिं आगे चल कर छोटी छोटी समस्याएं ही विकराल रूप धारण कर लेती हैं।

सवाल – ऐसी कौन सी परेशानियाँ हैं जो आगे चल कर ज्यादा बढ़ जाती हैं ? इनके कैसे बचा जा सकता है ?

जवाब – कमर में हल्का दर्द आगे चल कर पैरों तक पहुँचने लगता है जिससे पैरों में दर्द के साथ झुनझुनाहट भी होने लगती है। लगातार गर्दन में अकडन होती है और यह धीरे धीरे कंधे की ओर भी बढ़ने लगता है। ये सब समस्याएं ना हो उसके लिए योग और व्यायाम आवश्यक है। प्रतिदिन 2-3 किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। व्यस्त दिनचर्या में से हो सके तो सुबह एक घंटा समय अपने शरीर के स्वास्थ्य के लिए जरूर देना चाहिए।

सवाल – फिजियोथेरेपिस्ट की आवश्यकता क्यों होती है ?

जवाब – मनुष्य शरीर एक रहस्य की तरह है जिसके बारे में हर किसी को जानकारी नहीं होती है। इसके लिए विशेष अध्यन की आवश्यकता होती है. इसलिए जब भी कोई भौतिक परेशानियाँ होती हैं तब स्वयं उनका इलाज़ न कर जानकार व्यक्ति की सलाह लेनी चाहिए। मांसपेशियां हो या जोड़ो में दर्द हो, फिजियोथेरेपी के द्वारा वैज्ञानिक तरीके से इलाज़ किया जाता है। कई बार सर्जरी तक की नौबत आ जाती है. इसलिए डॉ की सलाह बहुत ही जरुरी होती है। विशेष रूप से कमर दर्द और घुटने के दर्द के मरीजों को एक बार फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेनी ही चाहिए। हर तरह की समस्याओं में फिजियोथेरेपिस्ट की सहायता ली जाती है।

सवाल – फिजियोथेरेपी के लिए क्या क्या तकनीकें उपलब्ध हैं ?

जवाब – पहले इलाज के लिए सिर्फ मशीन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन समय के अनुरूप अब मैन्युअल तकनीकें भी इस्तेमाल की जा रही हैं। इलाज के लिए मोबलाइजेशन करते हैं, पी एन ऍफ़ तकनीक इस्तेमाल करते हैं, न्यूरो डेवलपमेंट थेरपी भी अब काफी प्रचलित हो रही है। कई समस्याओं में इलेक्ट्रोथेरेपी भी बहुत ही कारगर साबित होती है। ये कह सकते हैं कि थेरेपी के द्वारा अब हर तरह की समस्याओं के लिए समाधान निकाला जा सकता है।

 सवाल – शहरों में फिजियोथेरेपी को लेकर कैसा रुझान है ?

जवाब – ज्यादा नहीं लेकिन शहरों में अब लोग जागरूक हो रहें हैं और फिजियो से सम्बंधित समस्याओं के लिए डॉ की सलाह लेने लगे हैं। अच्छा लगता है जब कोई लम्बे समय से किसी समस्या से जूझ रहे हों और विशेषज्ञ की सलाह लेकर तंदुरुस्त होते हैं और चलने फिरने लगते हैं। खासकर गर्भावस्था में महिलाएं फिजियोथेरेपिस्ट के पास जरुर जाती हैं, जिससे की वे खान पान और व्यायाम के द्वारा स्वस्थ रह सकें और स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकें। फिजियोथेरेपिस्ट केवल रास्ता दिखा सकते हैं, मरीज को सावधानियां स्वयं बरतनी पड़ती है।