प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-मौत पर बिछती राजनीतिक बिसात और सरकारी एजेंसियां

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-मौत पर बिछती राजनीतिक बिसात और सरकारी एजेंसियां


राजनीति शतरंज की मानिंद है। यहां पर किसी भी अवसर को चाहे फिर वह किसी होनहार प्रतिभावान अभिनेता की मौत का ही मामला क्यों ना हो राजनीतिक बिसात बिछाने में किसी भी पार्टी को, खासकर के केन्द्र में काबिज सरकार को कोई गुरेज नहीं है। व्हाया बिहार सरकार उद्धव ठाकरे की नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को घेरने की तैयारी में है और इन सबके लिए सीबीआई जांच को माध्यम बनाया गया है। इसके पहले भी राजस्थान सरकार को अस्थिर करने के लिए अशोक गहलोत से जुड़े लोगों के खिलाफ ताबड़तोड़ इन्कम टैक्स के छापे डाले गये। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के दौरान भी यही हुआ। बसपा सुप्रीमो तो सीबीआई और इन्कम टैक्स के डर से वही बोलती है, जो केन्द्र सरकार चाहती है। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल को घेरने के लिए भी ईडी और इन्कम टैक्स की छापेमारी हुई।

छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल सहित बहुत से राज्यों ने अपने यहां सीबीआई की कार्यवाही को प्रतिबंधित कर रखा है। महाराष्ट्र में भी लगभग टकराहट की स्थिति बनी हुई है। बिहार की नीतिश कुमार सरकार द्वारा एक दिन पहले सुशांत सिंह राजपूत के पिता के आवेदन को आधार बनाकर सीबीआई जांच की अनुमति मांगी और केन्द्र सरकार ने बिना विलंब अनुमति भी दे दी। महाराष्ट्र बीजेपी के नेता नारायण राणे जो पहले शिवसेना में रह चुके हैं, उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत और दिशा की मौत को राजनीतिक रंग देते हुए सोशल मीडिया पर, महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाया है। इस मामले में फिल्म अभिनेता सूरज पंचोली के यहां जिस पार्टी और उसके बाद दिशा सालियन के साथ रेप की बात नारायण राणे कर रहे हैं उसका खंडन सूरज पंचोली ने किया है। मुंबई फिल्म नगरी में नेपेटिज्म की बहस जिसमें बाहर से आने वाले अभिनेता-अभिनेत्री की उपेक्षा, उन्हें फिल्मों से निकालने का खेल चलता है, उस पर भी अच्छी खासी गंभीर चर्चा शुरू हो गई थी, जो इस नये विवाद के बाद लगभग ठंडी पड़ गई है।

सुशांत सिंह राजपूत की जांच के बहाने केन्द्र सरकार के इशारे पर सीबीआई महाराष्ट्र सरकार को खासकर के ठाकरे परिवार को घेरने की तैयारी में है। सुशांत की आत्महत्या के मामले में सीबीआई एफआरआई दर्ज कर सकती है। एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई बिहार पुलिस से केस के दस्तावेज हासिल कर सकती है। इसी केस से जुड़ी दिशा सालियन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उठे सवाल के जवाब भी खोजे जा रहे हैं।
सरकार चाहे जिसकी हो, बहुत बार उन पर सीबीआई, ईडी, इन्कम टैक्स, राज्यपाल के जरिये परेशान करने के आरोप लगते रहे हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कामकाज में अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण सीबीआई की अपने स्वामी की आवाज़ में बंद तोता बोलने (caged parrot speaking in its masters voice) की आलोचना कर चुकी है। सीबीआई का इस्तेमाल अक्सर सरकार द्वारा गलत कामों को कवर करने, गठबंधन के सहयोगियों को काबू में रखने के लिए किया जाता है। सीबीआई के बढ़ते दुरूपयोग और उसकी कार्यवाही के कारण उसकी विश्वसनीयता में कमी आई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में मामलों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति को वापस लेने का फैसला किया। भूपेश बघेल की अगुवाई वाली सरकार ने डीएसपीई अधिनियम 1946 की धारा 6 के उद्देश्य के संदर्भ में अपना सहमति पत्र रद्द कर दिया है। सीबीआई पुलिस शक्तियों वाली एक राष्ट्रीय एजेंसी है। इसका प्राथमिक क्षेत्राधिकार दिल्ली और केंद्रशासित प्रदेशों तक ही सीमित है। आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल ने सीबीआई से अपने क्षेत्र के भीतर काम करने के लिए अपनी सामान्य सहमति वापस ले ली है। इसकी शुरूआत सिक्किम में नरबहादुर भंडारी की सरकार के समय हुई। उन्होंने धारा 6 के तहत सीबीआई को अपने राज्य में प्रतिबंधित किया।
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। बिहार सरकार की सिफारिश के तहत केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इस मामले में सीबीआई जांच का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। तुषार मेहता के तर्क सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक प्रतिभाशाली कलाकार संदिग्ध हालात में मारा गया। यह हाईप्रोफाइल सिनेमा की दुनिया का मामला है। सबके अपने विचार हैं लेकिन सच सामने आना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना की एफआईआर में दर्ज बातें जांच का हिस्सा है या नहीं, हम नहीं जानते लेकिन जांच के लिए मुंबई गई बिहार सरकार के एक आईपीएस अफसर को रोक दिया जाता है। ऐसी बातें अच्छा संकेत नहीं देती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सुनिश्चित करे कि वह प्रोफेशनल तरीके से काम करे। महाराष्ट्र सरकार ने बिहार से आये अधिकारी विपिन कुमार को क्वारेंटीन कर लिया था जिस पर बिहार सरकार ने आपत्ति की।

वहीं दूसरी ओर भारत सरकार की एक और एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को समन भेजकर शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया है। प्रवर्तन निदेशालय ने सुशांत सिंह राजपूत मौत के सिलसिले में मनी लॉन्ड्रिंग का एक मामला दर्ज किया है। ईडी सुशांत राजपूत के पैसे और उनके बैंक खातों के कथित दुरुपयोग के आरोपों की जांच कर रही है। दिवंगत अभिनेता के पिता केके सिंह ने पटना शहर के राजीव नगर थाना में आईपीसी की धारा 306, 341, 342, 380, 406 और 420 के तहत उक्त प्राथमिकी दर्ज कराई है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में हो गई थी। इस मामले में मुंबई पुलिस की जांच से सुशांत का परिवार संतुष्ट नहीं है। महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा था कि इस केस में सड़क छाप पॉलिटिक्स हो रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले के जरिए परिवार सहित उनके ऊपर कीचड़ उछाला जा रहा है। आदित्य के इस जवाब पर अब कंगना रनौत ने पलटवार किया है। कंगना ने ट्वीट करते हुए लिखा, देखिए डर्टी पॉलिटिक्स की बात कौन कर रहा है। आपके पिता जी को सीएम की कुर्सी कैसे मिली, यह अपने आप में डर्टी पॉलिटिक्स है। आदित्य ठाकरे ने कहा, 'मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। बॉलीवुड मुंबई का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। बहुत से लोगों का जीवन इस पर निर्भर करता है। हां, मेरे भी इस इंडस्ट्री के साथ बहुत से संपर्क हैं लेकिन वो कोई अपराध नहीं है।

बिहार में आने वाले समय में चुनाव होना है। केन्द्र सरकार को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बहाने बिहार सरकार के जरिये एक भावनात्मक मुद्दा मिल गया है। महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार केन्द्र सरकार की आंखों में अपने बनने के दिन में खटक रही है। राजस्थान में किसी तरह सरकार गिर जाए इसके पूरे इंतजाम किये जा रहे हैं। दरअसल केन्द्र सरकार कांग्रेस मुक्त भारत के अपने अभियान के लिए केन्द्र की जिन संस्थाओं का उपयोग कर रही है वह आने वाले समय में बहुत ही घातक होंगे। ब्यूरोक्रेसी यदि इस खेल का हिस्सा बन गई तो आने वाले दिनों में वह यह खेल किसी के साथ भी खेलेगी। देश में बहुत सारे जरूरी मुद्दे हैं बहुत से प्रकरण लंबित पड़े हैं, जिनके बारे में इस तरह की तत्परता कहीं दिखाई नहीं देती। जब तक राजनीतिक पार्टियों को किसी घटना-दुर्घटना समस्या या समाधान में अपना हित दिखाई नहीं देता तब तक वह मुद्दा, भले ही जनता के लिए ज्वलंत हो, नेताओं के लिए गौण है।