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लव-कुश एक अमर साहित्य को संगीत यामिनी सुरधारा परिवार की ओर से श्रद्धांजलि

लव-कुश एक अमर साहित्य को संगीत यामिनी सुरधारा परिवार की ओर से श्रद्धांजलि

रायपुर।  छत्तीसगढ़ी तथा हिंदी भाषा साहित्य के महान धरोहर जिनका पूरा जीवन ही परमार्थिक कार्य के माध्यम से परम सत्ता को समर्पित रहा, जिन्होंने अपने अनेकों अनमोल रचनाओं के माध्यम से समाज को जीवन की क्षणभंगुरता का ज्ञान करा जीवन जीने की कला सिखाई। ऐसे महान विभूति पूज्य पंडित लवकुश जी महाराज के द्वारा रचित कुछ रचनाओं का शहर के फ़नकारों के द्वारा गान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वृंदावन हॉल में किया गया था।

संस्थान के प्रमुख भागवताचार्य पंडित युगल शर्मा ने बताया कि पंडित जी की अनेकों रचनाएं 60 एवं 70 के दशक में रेडियो एवं दूरदर्शन में प्रसारित हुई थी और अत्यंत लोकप्रिय रही।उनके रचनाएं जीवन की क्षणभंगुरता का दर्शन कराती थी। उनकी कालजयी रचनाओं में प्रमुख रूप से "खुद से खुद की मुलाकात" रही। जिसमें उन्होंने पुरुषार्थ को ही सफलता की प्रमुख आधारशिला बताई।

कार्यक्रम का आरंभ सुप्रसिद्ध साहित्यकार नर्मदा नरम जी ने अपने उद्बोधन के माध्यम से किया और पंडित जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 1965 में जब पूरा प्रदेश सूखा का मार झेल रहा था तब पंडित जी के समर्पण नामक शीर्षक से भजन बनाया" हार के आया द्वार तिहारे विनती सुनो मेरी नान्यद दुलारे " जिसकी स्वलिखित प्रति ही इतनी बिकी की 10000 रुपये कलेक्ट हो गए और वो सारे पैसे उन्होंने अकालग्रस्त लोगों में बांट दिया।



भगवताचार्य पंडित युगल किशोर जी ने उनकी बहुप्रतिस्ठित गीत "अड़बड़ लाहो लेथे तोर बिलवा बेटा दाई" को गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तत्पच्यात भजन गायक विवेक शर्मा ने पंडित लवकुश की मार्मिक रचना शबरी जी पर आधारित रही रही रद्दा ल जोहत हावव  गीत गाकर सबको भाउक कर दिया।

नरिंदर पाल ने मां पर आधारित तू चली गई मुझे छोड़कर तथा शास्त्रीय संगीत की बंदिश गाई,शारदा समुद्रे ने लोकप्रिय गीत जो पंडित जी ने 1962 में लिखा था तुलसी के बिरवा गाकर शमा बांध दिया ।दिनेश शर्मा ने पंडित जी की कालजयी कटाक्ष  तथा अनिरुद्ध जी ने सवैया का पाठ किया। अनुराग शर्मा एवं रवि कुमार ने भी उनकी प्रसिद्ध रचना को गाकर सबको आनंदित किया।संगत में प्रमुख रूप से नीलेश शर्मा,अरविंद नायक ,सिराज,अमन भाऊ तथा बंसोड़ जी थे।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पद्मश्री भारती बंधु,चक्रधर सम्मान से सम्मानित मदन चौहान, कुश महराज,रामेश्वर शर्मा तथा केहरी जी थे साथ ही साथ वरिष्ठ पत्रकार संदीप अखिल,अनिरुद्ध दुबे जी भी उपस्थित रहे।जिनका संगीत यामिनी परिवार की ओर से स्वागत किया गया। सैकड़ो की संख्या में अंतिम प्रस्तुति तक उपस्थित रहे।