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World_Heart_Day : अमरीका में हार्ट अटैक बुढ़ापे में, भारत में जवानी में आता है : हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत चंदेल

World_Heart_Day : अमरीका में हार्ट अटैक बुढ़ापे में, भारत में जवानी में आता है : हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत चंदेल
आशिका कुजूर


आज विश्व हृदय दिवस है. प्रदेश के सुप्रसिदध ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ निशांत चंदेल बता रहे हैं कि हृदय रोग और उससे बचने के लिए किस तरह की सतर्कता बरती जानी चाहिए.  

ह्रदय रोग क्या है और ये कैसे होता है ?
ह्रदय से संबधित परेशानियां ही आगे चलकर बीमारी का रूप धारण कर लेती हैं। ये दो प्रकार की होती है- एक होती है कंजनाइटल जो जन्मजात ह्रदय रोग होता है और दूसरा एक्वायर्ड जो बाद में समय के साथ दिनचर्या के आधार पर ह्रदय को प्रभावित करती है। कंजनाइटल हार्ट डीसीस जो होती है उसमे ज्यादातर ह्रदय में छेद या हार्ट में कनेक्शन सही न हो तो जब बच्चे पैदा होते हैं तब उनका रंग नीला होता है या सांस लेने में तकलीफ रहती है। एक्वायर्ड हार्ट डीसीस जोकि सामान्य रूप से होती है. इसे दो भागो में बाँटा गया है. पहला इन्फेक्टिव हार्ट डीसीस जिसमें वॉल्व ख़राब होते हैं दूसरा कोरोनरी हार्ट डीसीस जो सीधे दिनचर्या से सम्बंधित है। इसमें ज्यादा अडिक्शन, खान—पान में लापरवाही, ज्यादा तनाव होना इत्यादि। इससे ह्रदय की नसों में जो रक्त का संचार होता है, वो प्रभावित होता है जिससे हार्ट अटैक जैसी समस्याएं आती हैं।

ह्रदय रोग किन वर्ग के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है ?
ये बिमारी हमारे देश में काफी बढ़ रही है. ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जहाँ शिक्षा और जागरूकता की कमी है, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। दूसरी जिसे शहरी बीमारी कह सकते हैं जो अब धीरे धीरे गावों को भी प्रभावित कर रही है। कोरोनरी हार्ट डीसीस जो ज्यादातर दिनचर्या जैसे देर रात तक जागना, ज्यादा तनाव, खानपान की आदतें जैसे सिगरेट, तम्बाकू, शराब का ज्यादा मात्रा में सेवन ह्रदय को प्रभावित करता है।

किस उम्र में ह्रदय से सम्बंधित बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है ?
भारतीय मूल के लोगों में जो कोरोनरी आर्टरी होती है, वो वेस्टर्न और यूरोपीयन और अमेरिकन लोगों से छोटी होती है इसलिए यहाँ हार्ट अटैक की समस्याएं कम उम्र से ही देखने को मिल जाती है। अमेरिका में जहाँ हार्ट अटैक 60 -70 की उम्र में आते हैं वहीँ हमारे देश में ये समस्याएं 40 -50 की उम्र से ही शुरू हो जाती हैं।

गर युवाओं की बात करें तो आजकल की जो लाइफस्टाइल है, इससे उनके ह्रदय पर क्या असर पड़ता है?
जो कोरोनरी आर्टरी डीसीस है वो युवाओं में ही ज्यादा देखने को मिलती है और अगर अपने अनुभव से कहूं तो आज जितने भी मरीज जिनका बाईपास करते हैं एंजिओप्लास्टिक किया जाता है, उनमें से 60% मरीज युवा ही होते हैं। बदलती लाइफस्टाइल की वजह से युवावस्था में ही ऐसी बीमारियां बढ़ने लगी हैं।



ह्रदय रोग पहचानने के लिए किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए ?

चाहे कॉरोनरी आर्टरी डीसीस हो या वोल्वरी या पीर कंजनाइटल डीसीस हो इनके लक्षण लगभग सामान लगते हैं। जैसे बहुत जल्दी थकान महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ होना, चलते चलते थक जाना और बैठ जाने पर आराम मिलना ये प्रारम्भिक चरण में होता है। दूसरे चरण में नहाने और शौच जाने क्रियाओं में भी थकान महसूस होती है। तीसरे चरण में लेटने पर सांस लेने में तकलीफ होती है, खांसी होने लगती है, सांस फूलने लगता है। ये सभी हार्ट फ़ैल लक्षण हैं. जैसे जैसे हार्ट फ़ैल होने लगता है ये सभी परेशानियां बढ़ने लगती हैं।

ह्रदय संबंधी रोग से बचने के लिए क्या—क्या उपाय हैं और इसके इलाज़ के लिए क्या क्या तकनीक उपलब्ध हैं ?
बिमारियों से बचने के लिए सबसे अच्छा उपाय प्रकृति है। खानपान ठीक रखना चाहिए. तला भुना खाना काम खाएं, फ़ास्ट फ़ूड की आदत न डालें , बुरी आदतें जैसे सिगरेट पीना बंद कर देना चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए। यदि जन्मजात बीमारी है तो उसे अपनी दिनचर्या में सावधानियां बरतकर ठीक किया जा सकता है। खासकर 40 की उम्र के बाद डाइबिटीस, कोलेस्ट्रॉल ,थाइरोइड, इको  इत्यादि का चेकअप कराते रहना चाहिए। जिन लोगों को बुरी चीजों की लत है, उन्हें कम उम्र में ही ये सभी चेकअप करा लेना चाहिए। जॉब की वजह से जिनकी दिनचर्या प्रभावित रहती है उन्हें 30 -35 की उम्र में ही चेकअप करा लेना चाहिए। अगर बीमारी हो, इलाज़ का ख्याल आ रहा हो तो रायपुर में भी ऐसी एडवांस्ड टेक्निक्स हैं जिनसे ह्रदय रोग का इलाज़ संभव हो पाया है। अब ओपन हार्ट सर्जरी की सुविधाएँ भी प्रदेश में ही उपलब्ध हैं।

हृदयम बाकी अस्पताल से अलग कैसे है ?
पूरे प्रदेश में ह्रदय से सम्बंधित बीमारी के लिए कुछ ही अस्पताल हैं। जिनमें से एक हृदयम (श्री संकल्प अस्पताल में कार्डियक के लिए स्पेशल यूनिट) है जहाँ पूरी तरह से एडवांस तकनीक उपलब्ध हैं। देश के सबसे बेहतरीन कैथलैब में से एक है हृदयम। जब इसे शुरू किया गया था भारत में सिर्फ 3 कैथलैब थे। अच्छे कैथलैब होने की जरुरत की आवश्यकता इसलिए होती है क्योकि इलाज़ के लिए बेहतर टेस्ट रिजल्ट्स होने जरुरी होते हैं जिसमें बीमारी से सम्बंधित ज्यादा से ज्यादा जानकारी जल्दी मिल सके ताकि ज्यादा अच्छे से इलाज़ करना संभव हो। एडवांस कैथलैब होने का फायदा ये है कि कौन से मरीज को एंजिओप्लास्टिक की जरुरत है, किसे बाईपास की जरुरत है इसका कैलकुलेशन आसानी से किया जा सकता है, अच्छी तकनीक उपलब्ध हैं। ओपन हार्ट सर्जरी करने के लिए भी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। जहाँ अन्य अस्पताल में वॉल्व रिप्लेस किया जाता है वहीँ हृदयम में वॉल्व रिपेयर किया जाता है। अब तक 100 से ज्यादा मरीजों के वॉल्व रिपेयर किये जा चुकें हैं। कम से कम चीरा कर बाईपास किया जाना संभव है।