breaking news New

Follow_Up : कृषि विभाग में 13 करोड़ का घोटाला : 34 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी

Follow_Up : कृषि विभाग में 13 करोड़ का घोटाला : 34 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी
  • कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी घोटाला में 34 अधिकारी जांच के घेरे में

    विधानसभा में उठ चुका है मामला, छह अधिकारी हो चुके हैं रिटायर


चमन प्रकाश केयर

रायपुर.  कृषि विभाग में हुए करोड़ों के कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी घोटाला में 34 अधिकारियों के खिलाफ जांच लगभग पूरी हो चुकी है तथा एक सप्ताह के भीतर दोषी अधिकारियों की कुंडली बनाकर शासन को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी.

कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने करीब दो महीने पहले कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव को सभी भ्रष्ट 34 अधिकारीयों को शो काज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे लेकिन फाइल को दबा दिया गया और कोई कार्रवाई नही की जा सकी. दरअसल राव आगामी 31 अक्टूबर को रिटायर हो जाएंगे, इसलिए वे कार्रवाई करने से बच रहे हैं तथा कोई रिस्क नही लेना चाहते.

पूरे प्रकरण में करीब 34 अधिकारी कर्मचारी हैं जिनके खिलाफ जाँच चल रही है और इसमें करीब छह अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं. मामले की जाँच कर रहे कृषि विभाग के अपर संचालक ए बी. आसना ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जाँच चल रही है और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी. इसके आगे की कार्यवाही शासन स्तर पर जो दोषी अधिकारी रहेंगे, उन पर की जाएगी। कृषि विभाग में हुई आर्थिक गड़बड़ी के खिलाफ महालेखाकार ने दोषियों पर कार्यवाही की अनुशंसा करते हुए कहा था कि जिला कार्यालयों द्वारा दर अनुबंधकारियों को क्रय आदेश पारदर्शी तरीके से देना चाहिए एवं जो कर्मचारी इस आदेश का पालन करने में विफल हुए हैं, उनके विरूद्ध उचित कार्यवाही की जाये परंतु अधिकारियों को उलटा बचाया जाता रहा.

महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में कृषि विभाग में भंडार क्रय नियम के विपरीत 18 करोड़ के गड़बड़झाले की कहानी सामने लाई थी. आश्चर्य कि मामले की जांच भी बैठी मगर आज तक उसकी रिपोर्ट पेश नही हो सकी. दोहरा आश्चर्य यह कि करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों को सजा देने के बजाय उलटा मलाईदार पदों पर बिठा दिया गया है. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2015—16 में विभाग के अधिकारियों ने भंडार क्रय नियम का उल्लंघन करते हुए 18 करोड़ की खरीदी की. इसके तहत एनएफएसएम, हरित क्रांति एवं आरकेवीवाय योजना में 50 प्रतिशत अनुदान पर सूक्ष्म तत्व—वीडीसाइड—कीटनाशक रसायन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा किया है.

इस खुलासे के बाद अधिकारियों के नाम फंसने लगे तो तत्कालीन कृषि संचालक एम.एस. केरकेटटा ने उन्हें बचाते हुए फाइल दबा दी. आश्चर्य कि फिलहाल सुनील कुजूर जो मुख्य सचिव हैं, वे ही उस समय तत्कालीन अपर मुख्य सचिव थे. उन्होंने ही शो काज नोटिस जारी कर संचालक से जवाब भी मांगा मगर कोई जवाब नही मिला बल्कि उन्हें पदोन्नति मिल गई. उधर, कृषि विभाग के ओएसडी और संयुक्त संचालक विनोद वर्मा ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविदयालय के कुलसचिव को पत्र लिखकर जांच समिति बनाने की बात कही जबकि यह उनके अधिकार में नही था. इसके पीछे वर्मा की मंशा खुद को क्लीन चिट दिलाने की थी.

मामला आगे बढ़ा तो कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव ने उन्हे कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा था. इस मामले में मंत्री ने स्वीकार किया था कि 13 करोड़ के घोटाले में 30 से ज्यादा अफसरों ने मिलजुलकर वारा—न्यारा किया.इस पर जाँच में दोषी पाए जाने बाद  कृषि  संयुक्त संचालक विनोद वर्मा फ़िलहाल निलंबित कर दिया गया है। वही कृषि उत्पादन सचिव केडीपी राव ने बताया कि कई कृषि विभाग के कई सारे मामलों की जाँच की जा रही है. इसमें कृषि संचालक टामन सिंह सोनवानी से बात करके जानकारी ले सकते हो, इतना कहकर फ़ोन कट कर दिए. इसके बाद जब हमने टामन सिंह सोनवानी के नंबर पर कॉल और मेसेज किये तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

जाँच में यह जानकारी सामने आयी है कि जिन अधिकारीयों ने राजनांदगांव, जशपुर और जगदलपुर की कम्पनियों से खाद—बीज नहीं खरीदने की जानकारी विभाग को दी थी, परंतु जांच में खरीदी करना पाया गया और अधिकारियो ने विभाग में झूटी जानकारी देकर करोडो रूपये के वारे—न्यारे किए हैं. इसकी जाँच उद्यानिकी संचालक डॉ. प्रभाकर सिंह कर रहे हैं.