breaking news New

धारा 377 और निजता के अधिकार पर परिचर्चा, एलजीबीटी समुदाय ने दिखाई एकजुटता

धारा 377 और निजता के अधिकार पर परिचर्चा, एलजीबीटी समुदाय ने दिखाई एकजुटता

रायपुर, 9 सितंबर। राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सभागृह में रविवार दोपहर आईपीसी की धारा 377 और  निजता के अधिकार  पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय  के  निर्णय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम हमसफर ट्रस्ट मुंबई,  छत्तीसगढ़ मितवा संघर्ष समिति,  तथा क्वीरगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में  राहुल सिंह, डिप्टी डायरेक्टर संस्कृति विभाग उपस्थित थे। वही हाईकोर्ट के अधिवक्ता रविंद्र जैन तथा एमडी मानिकपुरी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।  विशेष वक्ता के रूप में हमसफर ट्रस्ट के मनोज जी,  अंजली तथा नीलोफर, विद्या राजपूत और  काउंसलेट सना तमके उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि राहुल सिंह ने कहा  कि हमें किसी को धर्म, जाति, रंग,  और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए तथा सभी को बराबरी का हक देना चाहिए।

हाईकोर्ट के एडवोकेट रविंद्र जैन ने कहा कि धारा 377 एक अमानवीय कानून था। इस धारा के हटने से एलजीबीटी समुदाय को बहुत राहत मिली है। उन्होंने कहा कि हमें ज्यादा से ज्यादा धारा 377  के विषय जागरूकता बढ़ानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ मितवा संकल्प समिति के अध्यक्ष विद्या राजपूत ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन पुलिस विभाग द्वारा धारा 377 के दुरुपयोग को रोकने के लिए गाइडलाइन जारी कर दिया गया है। 

सिद्धांत कुमार बेहरा ने बताया कि  एलजीबीटी समुदाय के प्रति जागरूकता के लिए वह जगह-जगह कार्यक्रम कर रहे हैं। इस दौरान हमसफर ट्रस्ट के नीलोफर और अंजलि ने अपने साथ में परेशानियों को भी बताया। इस दौरान खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के समुदाय के छात्र आसिफ ने भरतनाट्यम में प्रस्तुति देकर सभी लोगों को मुग्ध कर दिया। इसी तरह विक्टर फ्रांसिस ने भी नृत्य अपनी प्रस्तुति दी। अक्षय मानकर ने अपने कॉलेज के दिनों में होने वाले भेदभाव  के बारे में लोगों को बताया। 

वेद ने बताया कि लोग ट्रांसमैन के साथ किस तरीके से भेदभाव करते। हमसफर ट्रस्ट के मनोज ने वर्तमान में आए नए कानून और गाइडलाइंस के बारे में लोगों को बताया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सम्मानीय अतिथियों को प्रतीक चिन्ह  भेंट किया गया। बता दें की अब लोग इस विषय पर खुलकर बातचीत करते हैं और अपनी पहचान भी समाज के सामने स्वीकार करने लगे हैं, क्योंकि धारा 377 हटने के बाद  समुदाय को  विशेष अधिकार प्राप्त हुए हैं । वर्षगांठ समारोह की इस कड़ी में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समुदाय के लोग उपस्थित थे।