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इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर बेहद सख्त रुख अपना सकते हैं मैक्रों

इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर बेहद सख्त रुख अपना सकते हैं  मैक्रों

फ्रांस जहां इस्लामिक कट्टरपंथ पर लगाम लगाने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ, टर्की फ्रांस पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहा है.  पैगंबर का कार्टून दिखाने को लेकर टीचर की सिर काटकर हत्या कर दी गई थी

 मैक्रों ने हालिया बयान में हमलावर को इस्लामिस्ट करार दिया था और कहा था कि पैगबंर मोहम्मद के कार्टून को लेकर वो पीछे हटने वाले नहीं है. स्कूली टीचर की हत्या की घटना के बाद से ही फ्रांस में इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर बहस और तेज हो गई है.फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अरबी भाषा में ट्वीट किया, हम कभी घुटने नहीं टेकेंगे. हम शांति कायम करने के लिए सभी तरह के मतभेदों का सम्मान करते हैं. हम नफरत फैलाने वाले भाषणों को स्वीकार नहीं करेंगे.

इस्लाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच टर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दवान ने फ्रांस के राष्ट्रपति को मेंटल हेल्थ ट्रीटमेंट लेने की सलाह दी. इस टिप्पणी से नाराज होकर फ्रांस ने टर्की से अपने राजदूत को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया. 

 एर्दवान ने ये भी कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि साल 2022 के चुनाव में मैक्रों जीत पाएंगे.एर्दवान ने आगे कहा, आप (मैक्रों) लगातार मुझे निशाना बना रहे हैं लेकिन इससे आपको कुछ हासिल नहीं होने वाला है. फ्रांस में चुनाव होंगे और हम आपकी किस्मत देखेंगे. मुझे नहीं लगता है कि आप ज्यादा दिन सत्ता में रहने वाले हैं. आपने फ्रांस के लिए कोई उपलब्धि हासिल नहीं की और आपको कम से कम अपने लिए कोई उपलब्धि अर्जित करनी चाहिए.

मैक्रों और एर्दवान दोनों की ही अपनी घरेलू राजनीति की मजबूरियां हैं. मैक्रों पर इस बात को साबित करने का दबाव है कि वो विपक्षी पार्टियों की तरह इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर बेहद सख्त रुख अपना सकते हैं. 

एर्दवान के ऊपर भी राजनीतिक दबाव है और वह खुद को इस्लामिक दुनिया में सुन्नी आंदोलन के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. कश्मीर का मुद्दा हो या अजरबैजान का, टर्की खुद को इस्लामिक दुनिया का मसीहा साबित करने की कोशिश करता रहता है. एर्दवान के कम्युनिकेशन चीफ फहरतीन आल्तन ने ट्विटर पर लिखा, फ्रांस में मुस्लिमों पर अलगाववाद का आरोप लगाना, पैगंबर मोहम्मद के आपत्तिजनक कार्टून छापना और मस्जिदों पर रेड मारना, इन सबका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से कोई लेना-देना नहीं है. ये सिर्फ मुस्लिमों को प्रताड़ित करने के लिए है और ये बस याद दिलाने के लिए है कि मुस्लिम यूरोप की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकते हैं लेकिन वे कभी इसका हिस्सा नहीं बन सकते हैं.

मैक्रों ने इसी महीने अपने बयान में कहा था कि इस्लाम केवल फ्रांस ही नहीं पूरी दुनिया में एक संकट में घिरा हुआ है और उनकी सरकार दिसंबर महीने में एक बिल लाएगी जिससे इस्लामिक कट्टरपंथ पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. फ्रांस के राष्ट्रपति ने ऐलान किया था कि मदरसों और मस्जिदों की फंडिंग पर निगरानी और कड़ी की जाएगी और उन्हें विदेशी प्रभाव से मुक्त रखा जाएगा.

 कुवैत की संसद में भी मैक्रों की कड़ी आलोचना की गई. यहां की कई ट्रैवल एजेंसियों ने फ्रांस की यात्रा रोक दी है.ईरान की सरकार के प्रवक्ता सईद खातीबेजेदह ने शनिवार को कहा कि दुनिया भर में जिस पैगंबर में 1.8 अरब मुस्लिमों की भारी आबादी की आस्था है, उसके अपमान का कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता है. मोरक्को के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित करना जारी रखना उकसावे वाली गतिविधि है.