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Video: तुम्हारा नंबर कैसे डिलीट करूं मनोज भाई?

Video: तुम्हारा नंबर कैसे डिलीट करूं मनोज भाई?

सुभाष मिश्र

ऐश्वर्या किंगडम रहवासी कॉलोनी के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल अब हमारे बीच नहीं रहे। पूरी कॉलोनी और शहर के लिए मनोज भैया ,मामा संबोधन से पुकारे जाने वाले मनोज बहुत ही यारबाज, पार्टीबाज और मददगार शख्स थे । जो लोग गांधी उद्यान में मार्निंग वॉक  के लिए जाते हैं या जो लोग ऐश्वर्या किंग्डम कालोनी ,  बनियान  ट्री कॉलोनी में रहते हैं ,वे सब मनोज भाई की जिंदादिली और यार बाजी की मिसाल देते नहीं थकते। बहुत तेज ठहाके  लगाने वाले सभी के साथ सामंजस्य स्थापित करने वाले मनोज भाई ने हमारी कॉलोनी में तालाबंदी का पूरा पालन कराते हुए यह भी ध्यान रखा की देह की दूरी के साथ उठना बैठना जारी रहे, पार्टी बाजी ना छूटे, सामाजिक दूरी तो कतई न हो ।कल शाम को कॉलोनी की एक स्ट्रीट में लाइट बंद हुई तो शाम तक उसे ठीक करवाते रहे। फिर अपनी यारबाजी के चलते दोस्तों के बीच गए ,बैठकर ठहाके  लगाए ,रम्मी खेलते रहे । घर से सुधा भाभी का फोन आया तो कहने लगे अभी आता हूं। अपने स्वास्थ के प्रति लापरवाह मनोज भाई मुम्बई से बिना बायपास कराये रायपुर लौट आये और होम्योपैथी दवाएं लेने लगे ।रमी में ताश के पत्ते देखते वे अचानक से पलंग पर लुढ़क गए। मनोज भाई के मित्रगण जिनमें पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल जैसे लोग भी शामिल थे, उन्हें तत्काल अस्पताल ले गए, जहां पर उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 


अक्सर सफेद कपड़े पहनने वाले मनोज अग्रवाल को ,मैं उन्हें पहले से जानता था किंतु जब मैं ऐश्वर्या किंग्डम  कॉलोनी कचना में रहने आया तह मुझे उन्हें  बहुत नजदीक से जानने का मौका मिला। सुबह शाम की वॉक , टॉक में उनसे मेलमुलाकात कालोनी के साथियों की दिनचर्या का हिस्सा होता जिनमें बोनस के रूप में ठहाके और चाय अलग से । तालाबंदी के समय उनके घर बैठना ,कालोनी में होने वाली हर छोटी मोटी समस्या पर उनसे बात करना। गजब के आदमी के मनोज भाई ।ऊपर से इतना खुश मिजाज मिलनसार दिखने वाला यह शख्स अपने भीतर एक ऐसा कोना भी रखता था जिसे वह कम ही लोगों से साझा करता होगा। पता नहीं क्यों उन्हें मुझ में ऐसा क्या दिखा कि उन्होंने मुझसे अपनी निजी दिक्कतों को भी शेयर किया। मैंने कहा यार मनोज, तुम इतना सब होने के बाद भी इतने खुश इतने अलमस्त और पार्टी बाज कैसे रह पाते हो ? मनोज भाई ने अपनी आदत अनुसार ठहाका लगाया और कहा कि भैया सब ठीक हो जाएगा। मुझे होली का दिन भुलाए नहीं भूलता। जब हमने मनोज भाई के साथ उनके घर बैठकर दोपहर तक अच्छी खासी पार्टी की और उसके बाद लगा की, शहर में निकलना चाहिए तो मैं आनंद हर्षुल और मनोज भाई, गाड़ी में सवार हुए और शहर का चक्कर लगाते - लगाते हमारे फार्म हाउस पहुंचे। वहां पर भी हम लोगों ने रंग खेला। पार्टी की, यारबाज मनोज भाई को लगा कि उन्हें अंतरंग मित्र  को इसमें शामिल करना चाहिए।उन्होंने उसे भी वहां बुलाया और पार्टी को पुराने किस्से कहानी, ठहाकों से भर दिया। मनोज बेहतरीन जोक सुनाते थे । 


जब कोई आदमी शिखर पर चला जाता है तो अपना अतीत जो गरीबी मुफलिसी का है, भूल जाता है। पर मनोज अपनी बिहार से रायपुर तक की यात्रा में अपनी मुफलिसी के दिनों में किये गये छोटे छोटे कामों को जिनमें पटाखा बेचने से लेकर बहुत से काम शमिल थे , याद करके गर्व के साथ साझा करते हुए फक्र से कहते कि भैया आदमी मुसीबतों से ही खरा बनता है ,मददगार बनता है और वह जानता है कि उसकी यात्रा में किन-किन लोगों की मदद से वहां तक पहुंचा है। आप कमाई और बाप कमाई में बहुत अंतर होता है।मुझे ऐश्वर्या किंगडम में रहते हुए डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया। इस अवधि में मेरे पास यहां की हर छोटी मोटी समस्या का एक ही हेल्पलाइन नंबर था। वह नम्बर था कॉलोनी के प्रेसीडेंट मनोज अग्रवाल का ।आप फोन लगाओ। उधर से आपको समाधान कारक उत्तर मिलेगा। मनोज भाई अब नहीं रहे कॉलोनी का पत्ता पत्ता बूटा बूटा उन्हें याद करेगा। जब भी आप किसी मददगार हाथ को अपनी ओर बढ़ते देखेंगे। किसी हेल्पलाइन से सकारात्मक जवाब पाएगे तो आपको मनोज अग्रवाल जैसे व्यक्तित्व की याद आएगी। मैं तुम्हारा नंबर अपने मोबाइल से कैसे डिलीट  करूं ,मनोज भाई। तुम बहुत याद आओगे। तुम बहुत याद आओगे।मनोज भाई । तुम्हें विनम्र श्रध्दाजंलि