कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः यह छोटा-सा मन

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः यह छोटा-सा मन


यह छोटा-सा मन

टूट-टूट कर घटता

घट-घट में

होता विशाल

जैसे सागर-ताल


मिल जाते 

उस में कितने मन

दूर-दूर तक 

बिखरे तन

आ जाते इतने पास

उषःकाल में जैसे

निष्काम प्रकाश

रोम-रोम में 

पूर्णचन्द्र आभास


सहज विलास

मृत्यु के मौन में

जीवन का उल्लास

जैसे निर्झर-धार

अपने-अपने अनुसार