कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः पृथ्वी का कार्यकाल

 कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः पृथ्वी का कार्यकाल


पृथ्वी के कार्यकाल को

सूरज ने नहीं छोड़ा पीछे

वह घूम रही करोड़ों वर्षों से

वह उगा हुआ उस के रस्ते में

हवा छोड़ती नहीं किसी को पीछे

जल बहता रहता

पृथ्वी की नसों-नाड़ियों में

जीवन से आगे नहीं निकलता

आकाश छाया है सब पर

कहीं गया ही नहीं

किसी को पीछे छोड़ 


फिर कोई कैसे

पीछे छोड़ किसी को 

आगे बढ़ जाये

आगे जाने की जगह कहाँ


पृथ्वी अपने दिन गिन-गिन कर 

नहीं घूमती अंतरिक्ष में

वह नहीं जानती

कौन बढ़ गया आगे

कौन रह गया पीछे

कब कौन मिला उस की माटी में

बचे रह गये किस के कितने दिन

वह कहाँ जानती!


पृथ्वी घूम रही है

नहीं जानती अपने कार्यकाल को

किस ने जनम गँवाये कितने

कहाँ जानती पृथ्वी