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Video: एक शोकगीत जो अनसुना नहीं रहा- सुभाष मिश्र

Video: एक शोकगीत जो अनसुना नहीं रहा- सुभाष मिश्र

रायपुर,3 नवंबर। एक कलाकार माँ द्वारा अपने जवान बेटे की लाश के सम्मुख गाये गये शोक गीत के दर्द और पीड़ा को सामने देखकर मोबाइल कैमरे में दर्ज कर, अपनी भीगी आँखों से बहते आंसुओं को रोककर उसके बारे में लिखना भीतर तक झकझोरने वाला क्षण था। रंगकर्मी सिग्मा उपाध्याय और मैं (सुभाष मिश्र) जब मोबाइल से दीपक और पूनम तिवारी के घर में सूरज के शव के सामने इसे शूट कर रहे थे तो हम दोनों के लिए यह क्षण बहुत ही पीड़ा दायक था। पूनम द्वारा गाये गये शोक गीत के बारे में जब मैंने लिखा और पोस्ट किया तो आज सब उसे सुन रहे हैं , अख़बारों में उसकी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुई और सोशल मीडिया पर एक शोक गीत की तरह वायरल हुई, जिसने इस वीडियो को देखा, वह अपनी आंखे नम करने से खुद को नहीं रोक पाया। ये ऐसा शोक गीत था जिसे अनसुना नहीं किया जा सकता। बार -बार जुबां और ज़ेहन में पूनम का गाया गीत” चोला माटी के हो राम, ऐखर का भरोसा चोला माटी के हो “आता रहा है। 

ग़रीबी और तंगहाली में रह रहे बीमार दीपक तिवारी और पूनम के परिवार को इस दुख की घड़ी में सहयोग और आर्थिक संबल की ज़रूरत है। उनका कलाकार बेटा सूरज जो रंग छत्तीसा संस्था के ज़रिये अपने समूह को संचालित कर रहा था, अब इस दुनिया में नहीं है। हौसल्ले और साहस से भरी पूनम भीतर से ना टूटे,ये देखना हम सबकी जवाबदारी है।

सूरज बहुत ही उत्साही कलाकार था। वो हबीब तनवीर के नाटक चरणदास चोर जिससे उसके पिता दीपक तिवारी और माँ पूनम को अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली थी, उसे वह नये सिरे से करना चाहता था। सूरज के निधन की सूचना जब सुबह -सुबह रंगकर्मी दिनेश दुबे ने देते हुए बताया की पूनम और बेला कह रही थी की योग भैय्या, सुभाष भैय्या को फ़ोन नहीं लग रहा है। खबर सुनकर साहसा यक़ीन नहीं हुआ फिर हिम्मत कर सोशल मीडिया और फ़ोन से साथियों को सूचित किया। योगेन्द्र चौबे, सिग्मा उपाध्याय और मैं राजनांदगाँव के लिए निकले। योग के नाटक की दोपहर से जनमंच रायपुर में शुरूआत थी,सो वो नहीं जा पाया। जनमंच से योग मिश्रा, रचना मिश्रा और साथियों ने सूरज को भारी मन से श्रद्धांजलि दी।

छत्तीसगढ़ फ़िल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी द्वारा रायपुर के रंग मंदिर में आयोजित रंग रचना में जहां से पूनम तिवारी को सम्मानित भी किया गया था, उस मंच से पूनम और साथी रंग संगीत की प्रस्तुति कर रहे थे और उनका बेटा सूरज तबले के साथ संगत कर रहा था। आज इसके ठीक उल्ट पूनम गा रही थी और सूरज लंबी खामोशी ओढे अपनी माँ का गीत सुन रहा था। पूनम के गीत के मर्म को एक और व्यक्ति उपर कहीं आकाश से सुन रहा होगा जिनका नाम है, स्वर्गीय देवीलाल नाग। हबीब तनवीर के नाटकों के इस संगीतकार ने भी पूनम, दीपक तिवारी के साथ जुड़कर रंग छत्तीसा को जीवंतता प्रदान की। थोड़े दिनों पहले देवीलाल नाग दुनिया से चले गये और आज उनका संगतकार सूरज भी नहीं रहा। रह गई पूनम अकेली अपने लकवाग्रस्त साथी दीपक के साथ। दीपक तिवारी जो कभी हबीब तनवीर के नाटकों की जान हुआ करता था। आज बेटे की मौत पर मासूम सा कोने में ख़ामोश बैठा प्रकृति के इस क्रूर मजाक को देख रहा है।

पूनम और उसके साथियों ने आज अपने साथी संगतकार की अंतिम इच्छा का सम्मान कर घर से लेकर शमशान तक खूब गाया,बजाया। इस पूरे मंजर को देखकर कठोर से कठोर दिल वाले भी अपने को भीतर से पसीजने और रोने से नहीं रोक पाये। पूनम की ताक़त, जज़्बे को सलाम।


देखिए वीडियो - 


Video: एक शोकगीत जो अनसुना नहीं रहा

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