कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः दुख जाते-जाते रह जाता है

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः दुख जाते-जाते रह जाता है


कुछ छिपते-छिपते दिप जाता है

कुछ दिपते-दिपते छिप जाता है

कुछ ढहते-ढहते रह जाता है

कुछ रहते-रहते ढह जाता है


चुप रह जाता कोई कहते-कहते

कोई चुप रह कर कह जाता है

रह जाता है सुख आते-आते 

दुख जाते-जाते रह जाता है


आँसू बह-बह कर रह जाता है

रह-रह कर आँसू बह जाता है