ब्रेकिंग : चीन को भी कड़ा संदेश देते हुए राष्ट्रपति ने कहा -अशांति उत्पन्न करने वालों को छोड़ा नहीं जायेगा

ब्रेकिंग : चीन को भी कड़ा संदेश देते हुए राष्ट्रपति ने कहा -अशांति उत्पन्न करने वालों को छोड़ा नहीं जायेगा

नईदिल्ली।  स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में हमेशा की तरह धूम-धाम नहीं होगी. इसका कारण स्पष्ट है. पूरी दुनिया एक ऐसे घातक वायरस से जूझ रही है जिसने जन-जीवन को भारी क्षति पहुंचाई है और हर प्रकार की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की है. इस दौरान उन्होंने चीन को भी संदेश देते हुए कहा कि जो अशांति उत्पन्न करेगा, उसे माकूल जवाब दिया जाएगा.

राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर चीन का नाम लिए बगैर सीमा विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि आज जब विश्व समुदाय के समक्ष आई सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है, तब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया. सीमाओं की रक्षा करते हुए, हमारे बहादुर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए.

उन्होंने कहा कि भारत माता के वे सपूत, राष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे. पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है. हर भारतवासी के हृदय में उनके परिवार के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव है. उनके शौर्य ने यह दिखा दिया है कि यद्यपि हमारी आस्था शांति में है, फिर भी यदि कोई अशांति उत्पन्न करने की कोशिश करेगा तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि हमें अपने सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों पर गर्व है जो सीमाओं की रक्षा करते हैं, और हमारी आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.

अयोध्या में भूमिपूजन गौरव की अनुभूति

राष्ट्रपति कोविंद ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर हुए भूमिपूजन पर कहा कि केवल दस दिन पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ है और देशवासियों को गौरव की अनुभूति हुई है. देशवासियों ने लंबे समय तक धैर्य और संयम का परिचय दिया और देश की न्याय व्यवस्था में सदैव आस्था बनाए रखी. श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित न्यायिक प्रकरण को भी समुचित न्याय-प्रक्रिया के अंतर्गत सुलझाया गया. सभी पक्षों और देशवासियों ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया और शांति, अहिंसा, प्रेम एवं सौहार्द के अपने जीवन मूल्यों को विश्व के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया. इसके लिए मैं सभी देशवासियों को बधाई देता हूं.